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21 सितम्बर मंगलवार की सुबह के सत्र के मुख्य वक्ता फादर ग्रेज़गोर्ज़ स्ट्रज़ेलज़िक 21 सितम्बर मंगलवार की सुबह के सत्र के मुख्य वक्ता फादर ग्रेज़गोर्ज़ स्ट्रज़ेलज़िक   (EpiskopatNews)

कलीसिया में यौन शोषण के गहरे ईशशास्त्र निहितार्थ हैं

वारसॉव में एक सुरक्षा सम्मेलन के रूप में विचार-विमर्श के तीसरे दिन, मध्य और पूर्वी यूरोप की कलीसिया के नेताओं ने जांच की कि याजकीय यौन शोषण के कारण होने वाली पीड़ा यौन पीड़ित लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वारसॉव, बुधवार 22 सितम्बर 2021 (वाटिकन न्यूज) : 4 दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने वालों ने मंगलवार को अपना काम जारी रखा, वे बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर रहे थे कि याजकों द्वारा यौन शोषण से बचे लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है और कलीसिया अपने सबसे कमजोर सदस्यों की रक्षा करने हेतु आगे कौन सा कदम बढ़ायेगी।

पोलैंड की राजधानी वारसॉव में इस सम्मेलन का आयोजन 19 सितम्बर से 22 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें मध्य और पूर्वी यूरोप के 20 देशों से लगभग 80 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

नाबालिगों के यौन शोषण का धार्मिक प्रभाव

मंगलवार की सुबह के सत्र के मुख्य वक्ता फादर ग्रेज़गोर्ज़ स्ट्रज़ेलज़िक थे। वे पोलैंड के संत जोसेफ फाउंडेशन के सदस्य और धर्मशास्त्र सिद्धांत के प्रोफेसर हैं। इन्होंने इस कार्यक्रम को आयोजित करने में मदद की है।

उनका भाषण "नाबालिगों के यौन शोषण के परिणामों के धार्मिक आयाम" पर केंद्रित था।

फादर ग्रेज़गोर्ज़ ने स्वीकार किया कि दुर्व्यवहार के मामलों में कलीसिया की प्रतिक्रिया कानूनी, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर केंद्रित है, जबकि धर्मशास्त्रीय चिंतन पृष्ठभूमि में धकेल दिया जाता है। हालांकि, उन्होंने कहा, धर्मशास्त्र को याजकीय यौन शोषण के संकट को पूरी तरह से समझने के लिए चर्चा में प्रवेश करना चाहिए।

फादर ग्रेजगोर्ज ने कहा कि विश्वास का कार्य, इसके प्रसार के साथ, उन लोगों द्वारा अनुभव किए गए आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर सीधा प्रभाव डालता है जिन्हें चोट लगी है।

उन्होंने कहा "चूंकि विश्वास, इसकी मध्यस्थता करती है,", "गवाह की विश्वसनीयता को इस संकट में घसीटा जाता है और घोटाले से अविश्वास पैदा होता है।"

पछतावा और हृदय परिवर्तन

फादर ग्रेज़गोर्ज़ ने कहा कि धर्मशास्त्र एक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,  चूंकि दुरुपयोग का अर्थ है धर्मशास्त्र के अस्वास्थ्यकर तत्वों की उपस्थिति, विशेष रूप से पुरोहिताई संस्कार के संबंध में।

पुरोहितों द्वारा दुर्व्यवहार को छिपाने वाले धर्माध्यक्षों ने केवल दुर्व्यवहार से बचे लोगों के दर्द को बढ़ाने और कलीसिया की विश्वसनीयता को कमजोर करने का काम किया।

पोलिश पुरोहित ने कहा, "अगर एक पुरोहित के व्यक्तिगत गवाह की विफलता को संस्थागत या सामुदायिक गवाह द्वारा कुछ हद तक भरा जा सकता था, संस्थागत अधिकारी की विफलता ने केवल एक रेगिस्तान छोड़ दिया।"

फादर ग्रेज़गोर्ज़ ने अपने भाषण को एक अनुस्मारक के साथ समाप्त किया कि कलीसिया स्वभाव से एक समुदाय है जो हृदय परिवर्तन के मार्ग पर यात्रा कर रही है।  उस पथ का एक अनिवार्य तत्व, कलीसिया के याजकों और संरचनाओं में एक प्रामाणिक परिवर्तन को प्रभावित करने वाली उचित पश्चाताप धर्मविधि है।

22 September 2021, 16:02