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वारसॉव में सम्मेलन को संबोधित करती हुई प्रो. सुचोका वारसॉव में सम्मेलन को संबोधित करती हुई प्रो. सुचोका 

यौन शोषण न केवल पश्चिमी, परंतु सार्वभौमिक समस्या, प्रो.सुचोका

पोलैंड के एक पूर्व प्रधान मंत्री के अनुसार, वारसॉव में होने वाला एक सुरक्षा सम्मेलन मध्य और पूर्वी यूरोप में कलीसिया को याजकीय यौन शोषण की वास्तविकता का सामना करने में मदद करना चाहता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वारसॉव, सोमवार 20 सितम्बर 2021 (वाटिकन न्यूज) : नाबालिगों की सुरक्षा के लिए परमधर्मपीठीय आयोग ने पोलैंड की राजधानी वारसॉव में एक सुरक्षा सम्मेलन का आयोजन की है, जिसमें पूर्वी और मध्य यूरोप का दर्दनाक इतिहास सामने आ रहा है।

अधिकांश क्षेत्र दशकों तक साम्यवाद और सोवियत संघ की लोहे की मुट्ठी के अधीन रहा। उन वर्षों के दौरान, कई देशों में कलीसिया को उत्पीड़न के खिलाफ एक गढ़ के रूप में देखा गया था। अब, लोहे के पर्दे के गिरने के तीस साल बाद, उस इतिहास का एक और पक्ष अपना चेहरा दिखा रहा है, क्योंकि कलीसिया याजकीय यौन शोषण के संकट को जड़ से खत्म करना चाहती है।

नाबालिगों की सुरक्षा के लिए परमधर्मपीठीय आयोग  ने 19 से 22 सितंबर तक "ईश्वर के बच्चों की सुरक्षा का हमारा साझा मिशन" विषय के तहत कार्यक्रम आयोजित किया है।

दुर्व्यवहार केवल 'पश्चिमी समस्या' : गलत

प्रोफेसर हन्ना सुचोका वारसॉव सुरक्षा सम्मेलन के आयोजकों में से एक हैं, पोलैंड के पूर्व प्रधान मंत्री और वाटिकन के पूर्व पोलिश राजदूत हैं।

वाटिकन न्यूज से बात करते हुए, उन्होंने यौन शोषण संकट के प्रति कलीसिया की प्रतिक्रिया में इतिहास की भूमिका का वर्णन किया। प्रो. सुचोका ने कहा, "कई देशों में, यहां तक कि पोलैंड में भी, दस साल पहले भी," यह सामान्य सोच थी कि पीडोफिलिया और यौन शोषण केवल पश्चिमी कलीसियाओं के लिए विशिष्ट है, पूर्व में नहीं, क्योंकि कम्युनिस्ट शासन के अधीन कलीसिया उत्पीड़ित थी और इसलिए यौन शोषण के लिए कोई जगह नहीं थी।”

सिक्के का दूसरा पहलू

उन्होंने कहा कि अब हालांकि, यह स्पष्ट हो गया है कि न केवल पश्चिमी देशों में, बल्कि पूर्वी देशों में भी याजकीय यौन शोषण हुआ। उन्होंने कहा कि हाल ही में "साम्यवाद के समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध धर्माध्यक्षों" के बारे में  परमधर्मपीठ द्वारा लिए गए निर्णयों से पता चलता है कि याजकों द्वारा दुर्व्यवहार वास्तव में कलीसिया में हुआ था।

प्रो सुचोका ने कहा, "हम उनके व्यवहार के दूसरे पक्ष को देख सकते हैं। वे साम्यवाद के खिलाफ लड़ने में बहुत सक्रिय थे, लोगों की मदद कर रहे थे, लेकिन दूसरी ओर वे यौन शोषण के लिए भी जिम्मेदार थे, चाहे उन्होंने इसे छिपा दिया  या खुद शामिल थे।”

उन्होंने कहा कि यह स्थिति पोलिश काथलिक कलीसिया के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में कलीसिया के लिए एक चुनौती पेश करती है। उसने कहा, "हम केवल संत नहीं थे,"हम भी पापी थे।"

स्पष्ट उत्तर देना

प्रो. सुचोका ने कहा कि फिर भी, पिछला प्रदर्शन जरूरी नहीं कि भविष्य की सफलता में बाधा हो। अब समय आ गया है कि मध्य और पूर्वी यूरोप की कलीसिया अतीत के नैतिक व्यवहार से "स्वच्छ विराम" बना ले। पूर्व साम्यवादी देशों की कलीसिया को "इस प्रश्न का स्पष्ट समाधान प्रस्तुत करने की आवश्यकता है: 'हम अपने देशों में क्या कर सकते हैं?'

कलीसिया के निर्माण हेतु प्रयास

प्रो. सुचोका ने कहा, हालाँकि, नाबालिगों की सुरक्षा के लिए परमधर्मपीठीय आयोग और स्थानीय कलीसिया के नेता याजकीय यौन शोषण को जड़ से खत्म करने में बड़ी प्रगति कर रहे हैं,  परंतु कुछ काथलिक उनके प्रयासों को "कलीसिया पर हमले" के रूप में देखते हैं।

प्रो. सुचोका ने इस दृष्टिकोण पर अफसोस जताया और कहा कि आयोग के प्रयास का उद्देश्य कलीसिया को ठीक करना और यौन शोषण के शिकार लोगों की मदद करना है।"हम कलीसिया के खिलाफ नहीं हैं," उसने जोर देकर कहा। "हम कलीसिया के लिए कुछ करना चाहते हैं,  अन्यथा कलीसिया छाया में समाप्त हो जाएगी और स्थिति का 'सामना' नहीं  कर पाएगी।"

20 September 2021, 15:17