वेनेजुएला के धर्माध्यक्ष : स्कूल शांति एवं न्याय का स्थान हो
वाटिकन न्यूज
वेनेजुएला, मंगलवार, 13 जनवरी 2026 (रेई) : वेनेजुएला धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के शिक्षा आयोग के अध्यक्ष बिशप कार्लोस एनरिक कूरियल हेरेरा ने सभी बच्चों, किशोरों, युवाओं और शैक्षणिक समुदाय के सदस्यों से देश के लिए सद्भाव बनाने हेतु पढ़ाई और सीखने के तरीकों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
धर्माध्यक्ष ने कहा, “इस नए साल में जब हम अपने स्कूलों में लौट रहे हैं, तो हमारा कमीशन हर शिक्षक, हर विद्यार्थी, हर परिवार और पूरे राष्ट्रीय शैक्षणिक समुदाय के हर सदस्य को उम्मीद से भरी शुभकामनाएँ भेजना चाहता है।”
उन्होंने आगे कहा कि वेनेजुएला के धर्माध्यक्ष चाहते हैं कि शिक्षा एक ऐसी “जगह बने जहाँ शांति और न्याय को मजबूत किया जाए, यह मानते हुए कि मुश्किलताओं के बावजूद, शैक्षणिक माहौल विश्वास, न्याय के मूल्यों के प्रति समर्पित और हमारे जीवन को निखारनेवाली आजादी के बीज बोने के लिए सबसे पवित्र जगह होती है।”
धर्माध्यक्ष हेरेरा ने कामना की कि प्रभु बच्चों एवं शिक्षकों को उनके हर कदम में साथ दें ताकि उनका प्रकाश जो प्रभु प्रकाश पर्व में प्रकट हुआ है उनके हृदयों में चमके तथा मुलाकात की खुशी उनमें सुसमाचारी निष्ठा के साथ सेवा करने की शक्ति को नवीनीकृत करे।”
उन्होंने संत जोस ग्रेगोरियो हर्नांडेज़ की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की कि वे “हमें अपनी सेवा के लिए अपनी प्रज्ञा और विनम्रता दें, और मदर कारमेन रेंडिलेस मार्टिनेज हमें उस कोमलता के साथ पढ़ाना सिखाएँ जो जीवन बदल दे।”
शांति निर्माण का न्योता
वेनेजुएला के धर्माध्यक्ष ने बच्चों और शिक्षकों को पढ़ाई और सीखने को “देश में शांति निर्माण के साधन” के तौर पर देखने के लिए आमंत्रित किया।
बिशप हेरेरा ने अंत में कहा, “शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत एक-दूसरे को सुनने, ईश्वर की इच्छा समझने, वेनेजुएला के लिए शांति और मेल-मिलाप की दुआ करने, और नागरिकता, लोकतंत्र, न्याय और शांति निर्माण करने के लिए अपने स्कूलों को सुरक्षित जगह बनाए रखने के अपने वादे को फिर से दोहराने का मौका हो।”
ब्रासेल्स में कार्डिनल परोलिन ने यूरोप से अपील की कि वे ख्रीस्तीय स्पष्टता को फिर खोजें
ब्रासेल्स के संत मिखाएल एवं संत गुदुला महागिरजाघर के 800वीं वर्षगाँठ पर वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने यूरोप के आध्यात्मिक भविष्य पर चिंतन किया जो नाजुक और भटका हुआ है।
आठ शताब्दी पुराना महागिरजाघर के अंदर, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु और बेल्जियम के शाही परिवार के सदस्य मौजूद थे, कार्डिनल परोलिन ने जोर देकर कहा कि "खस्तीय धर्म समय के बाहर या इतिहास के हाशिये पर नहीं है, बल्कि इसके अंदर, ठोस जगहों पर और असली समुदायों के जरिए बढ़ता है।"
उन्होंने कहा कि 13वीं सदी की इस गोथिक इमारत के बनने से बहुत पहले, संत मिखाएल को समर्पित एक प्रार्थनालय ब्रसेल्स में ख्रीस्तीय धर्म की गहरी जड़ों के गवाह थे।
वाटिकन राज्य सचिव ने कहा कि यह धीमी और धैर्य वाली प्रगति, कलीसिया के स्वभाव को दिखाती है, जो "किसी एक के काम या सिर्फ एक पल में पूरी हुई परियोजना से पैदा नहीं होती, बल्कि पीढ़ियों तक चलनेवाली एक निष्ठा से होती है, जिसमें हर व्यक्ति जो उसे सौंपा गया है, उसे लेता, उसकी रक्षा करता और आगे बढ़ाता है।"
उन्होंने कहा कि आठ सौ सालों से, महागिरजाघर शहर और देश के ख्रीस्तीय जीवन के साथ रहा है, और एक ऐसे विश्वास को दिखाता है जो अपने समय के सवालों से जुड़ा है।
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