2026.08.25 संत मक्सिमिलियन कोलबे 2026.08.25 संत मक्सिमिलियन कोलबे  (Catholic Mobilizing Network)

संत मक्सिमिलियन कोल्बे ‘मौत के सामने जीवन का साक्ष्य देते थे’

कलीसिया संत मक्सिमिलियन कोल्बे की याद जिस महीना करती है, उसी महीने अमेरिका में काथलिक विश्वासी मौत की सजा का विरोध करके जीवन का सम्मान करने के लिए उनकी मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना कर रहे हैं।

वाटिकन न्यूज

अमरीका, मंगलवार, 25 अगस्त 2026 (रेई) : कलीसिया ने 14 अगस्त को संत मक्सिमिलियन कोल्बे का पर्व मनाया, जो एक पोलिश पुरोहित थे और संत मरियम के निष्कलंक हृदय के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे, जिन्हें 1941 में नाजी जर्मन नजरबंद शिविर में कैद करके मार दिया गया था।

अमरीका के विश्वासी संत मक्सिमिलियन कोल्बे की मध्यस्थता की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं, जहाँ 2025 में 47 को फांसी की सजाएँ दिए जाने के रिकॉर्ड के बाद यह लगातार बढ़ रही हैं।

2026 में अब तक 23 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिसमें संत कोल्बे के पर्व से एक दिन पहले तीन लोगों को फांसी की सजा मिलना भी शामिल।

ऑशविट्ज़ में नाजी मौत शिविर से मिले साक्ष्य से, हम देख सकते हैं कि कैदियों के इस संरक्षक संत और जीवन समर्थक को मौत पर जीवन की ताकत पर सचमुच कितना यकीन था।

ऐसे समय में जब अमेरिका के कई राज्य न्याय के नाम पर लोगों को फांसी दे रहे हैं, और नुकसान के कभी न खत्म होनेवाले चक्र में मौत का बदला मौत से ले रहे हैं, संत कोल्बे हमें न्याय का ऐसा नजरिया तलाशते रहने के लिए प्रेरित करते हैं जो जीवन पर आधारित हो।

कोल्बे को नाजी शासन का खुलेआम विरोध करने के लिए जेल में डाला गया था, जिसे उन्होंने अपने लोकप्रिय पत्रिका और रेडियो स्टेशन के द्वारा प्रसारित किया था।

जुलाई में, कोल्बे के बैरक (सैन्यागार) से कुछ लोग भाग गए। सजा के तौर पर, कमांडर ने 10 लोगों को मरने के लिए एक भूख के कमरे में भेजने के लिए चुना। जब फ्रांसिसज़ेक गैजोनिज़ेक नाम के एक जवान व्यक्ति को चुना गया, तो वह अपनी पत्नी और बच्चों के लिए रोने लगा। तब कोल्बे आगे बढ़े और उसकी जगह ली।

मौत के सामने कोल्बे के बलिदान ने इस जवान पिता और उसके बच्चों के भविष्य के लिए जीवन के प्रति उनकी पक्की प्रतिबद्धता को दिखाया।

वह प्रतिबद्धता रुकी नहीं। जब कोल्बे और उनके साथी नौ कैदी एक अंधेरे कमरे में भूख से मर रहे थे, तो उन्होंने उन्हें जीने की वजह दी।

ऑशविट्ज़ की कहानियाँ बताती हैं कि कोल्बे उन लोगों के साथ प्रार्थना किये और भजन गाये, और उन्होंने उनके पापस्वीकार भी सुने। जीवन की यह आशा पूरे मौत शिविर में लोगों तक फैली।

कड़ी सजा इसलिए दी गई थी ताकि यह एक उदाहरण बन जाए तथा यह दिखाया जा सके कि नाज़ियों ने जिन लोगों को हिरासत में लिया था, उनके जीवन पर उनकी कितनी ताकत थी। लेकिन चीख-पुकार और दर्द से रोने के बजाय, पूरे कैंप में कैदियों को उस कमरे से उम्मीद की आवाजें सुनाई दे रही थीं।

दो हफ्तों से भी अधिक समय तक बिना कुछ खाए रहने के बावजूद कोल्बे और उनके साथ तीन व्यक्ति जिंदा बचे थे। अंत में, उन्हें कार्बोलिक एसिड का जानलेवा इंजेक्शन देकर मार दिया गया। इस तरह कोल्बे ने अंत तक अपनी इज्जत बनाए रखी, और नर्स से जानलेवा सुई डालने के लिए अपना हाथ उठाया।

फ्रांसिसजेक गैजोनिजेक न सिर्फ उस भुखमरी वाले कमरे के खतरे से बल्कि ऑशविट्ज़ और पूरी लड़ाई से भी बच गया। इसलिए 41 साल बाद, वह भी मौजूद था जब पोलिश पोप संत जॉन पॉल द्वितीय ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में संत मक्सिमिलियन कोल्बे को संत घोषित किया।

काथलिक मोबिलाइजिंग नेटवर्क की कार्यकारी निदेशक क्रिसेन वैलानकोर्ट मर्फी कहते हैं कि हर बार जब अमरीका में किसी को फांसी दी जाती है – जैसे कि इस साल 23 लोगों ने अपनी जान गंवाई है – तो मुझे संत कोल्बे की मौत वाली जगह पर जीवन बचाने के पक्के इरादे की याद आती है।

उन्होंने कहा, “मैं प्रार्थना करता हूँ कि वे हमारी मध्यस्थता करें, क्योंकि हम अपने समय में अमरीका में मौत की सज़ा का विरोध करके ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं।”

संत मक्सिमिलियन कोल्बे, हमारे लिए प्रार्थना कर।

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25 अगस्त 2026, 15:36