रोम के परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी में सम्मेलन रोम के परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी में सम्मेलन 

कार्डिनल ताग्ले : लीमा की संत रोस एक नये मिशनरी आंदोलन को प्रेरित करती हैं

31 जनवरी को वाटिकन उद्यान में लीमा की संत रोस की प्रतिमा स्थापित करने से पहले, परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी में एक सम्मेलन में पेरू की संत पर ध्यान केंद्रित किया गया।

वाटिकन न्यूज

रोम, बृहस्पतिवार, 29 जनवरी 2026 (रेई) : रोम स्थित परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी में हुए सम्मेलन  में लीमा की संत रोस (1586-1617) के बारे बात की गई। यह सम्मेलन को पेरू के राजदूतावास ने वाटिकन में, पेरू के परमधर्मपीठीय काथलिक यूनिवर्सिटी के समर्थन से आयोजित किया था।

एक मिशनरी जो युवाओं को प्रेरित करती है

सम्मेलन की शुरुआत करते हुए, सुसमाचार प्रचार विभाग के प्रो-प्रीफेक्ट कार्डिनल लुइस अंतोनियो ताग्ले ने पेरू और फिलीपींस की संरक्षिका लीमा की संत रोस पर अपने विचार रखे।

उनकी पवित्रता की खबर समुद्रों और पीढ़ियों को पार कर गई है, और वे हर जगह, यहाँ तक कि दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों के लिए एक "मॉडल" और "आध्यात्मिक शरण" बन गई हैं। जैसा कि कार्डिनल ने बताया, मनीला महागिरजाघर के छह हिस्सों में से एक हिस्सा उन्हें समर्पित है। उन्होंने संत को समर्पित एक पल्ली में अपनी सेवा की याद की, जिनकी भक्ति स्पैनिश दोमिनिकन मिशनरियों के जरिए फिलीपींस तक फैली।

कार्डिनल ताग्ले ने जोर दिया कि पोप क्लेमेंट 10वें ने 1671 में उन्हें संत घोषित किया, तब से ही संत रोस "निरंतर मिशनरी" रही हैं। खासकर, वे आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा हैं, जो औपचारिक शिक्षाओं के बजाय उदाहरणों से ज्यादा मार्गदर्शन पाती है। प्रो-प्रिफेक्ट ने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन एक नए "मिशनरी आंदोलन" का बीज बन सकता है।

“कांटों के बीच लिली”

वाटिकन सिटी स्टेट की गवर्नरेट की अध्यक्ष सिस्टर रफैला पेत्रिनी ने लीमा की संत रोस को एक ऐसी हस्ती बताया जो हमेशा जवान हैं, प्यार और हमदर्दी जगा सकती हैं, और समय एवं जगह के पारे अपनी "मिसाल" और "लोकप्रियता" का जादू फैलाती हैं।

31 जनवरी को स्थापित की जानेवाली प्रतिमा में इसी पवित्रता की झलक दिखेगा, जिसको पोप लियो 14वें की उपस्थिति में वाटिकन वाटिका में लीमा की संत रोस की एक प्रतिमा और माता मरियम की एक तस्वीर का उद्घाटन किया जाएगा। पेरू की ये कलाकृति उस पल को दिखाती हैं जब संत, रोजरी की कुँवारी मरियम के बारे चिंतन कर रही थीं, और उन्हें येसु के दर्शन हुए, जिन्होंने उन्हें एक अंगूठी और फूल दिए।

प्रतीमा, जिसमें एक एंकर और रोजरी मुकुट शामिल हैं, संत रोस की यात्रा को दिखाता है और उस व्यक्ति का "चमकता और मुस्कुराता हुआ" चेहरा दिखाता है जिसने ख्रीस्त का अनुसरण करने का फैसला किया।

पेरू के धर्माध्यक्ष कार्लोस एनरिक गार्सिया कैमाडर ने एक वीडियो संदेश में कलीसिया के इतिहास में संत रोस की भूमिका के बारे बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि संत रोस की तरह, "सत्य की खोज" हमेशा "दान और सेवा" के साथ जुड़ी रहेगी।

परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन यूनिवर्सिटी के रेक्टर फादर मार्क एंड्रयू लुईस ने संत रोस को पोप फ्रांसिस से जोड़ा। 2017 में, संत की मृत्यु की चौथी सदी के मौके पर, संत पापा ने दुनिया के लिए उनके प्यार को याद किया था और उन्हें सुलेमान के सर्वश्रेष्ठ गीत के एक हिस्से का जिक्र करते हुए "कांटों के बीच एक लिली" कहा।

रेक्टर ने यह भी बताया कि संत रोस को आज भी फूलवाले और माली याद करते हैं - ये वो पेशे हैं जिन्हें उन्होंने अपने जीवन का ज्यादातर हिस्सा दिया और जो आज भी लैटिन अमेरिका में बहुत जरूरी हैं।

दैनिक काम में कृपा

लीमा के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल कार्लोस कस्तिलो मैतासोलियो ने संत रोस की "आध्यात्मिक ईशशास्त्र" पर ध्यान दिया, यह देखते हुए कि उन्होंने अपना जीवन अपने अंदर के पहलू पर केंद्रित की। उन्होंने एक लाइन कही जिसको वे अक्सर येसु से कहती थीं: "मेरे प्यारे पति, मुझे काम करने में मदद कीजिए।"

रोस का काम कृपा का एक रूप बन गया। कार्डिनल ने कहा, "मूल समस्या इस गुण के विपरीत है, जब "कृपा" एक तोहफा बनने के बजाय "जीत" बन जाती है, क्योंकि संत रोस के जीवन की खासियत "आध्यात्मिक बुनियाद" की कमी होती है। "तब यह कृपा नहीं, बल्कि बेइज्जती बन जाती है।"

अंत में, वाटिकन में पेरू के राजदूत, जॉर्ज पोंस सैन रोमान ने सम्मेलन में आए लोगों को धन्यवाद दिया, जिनकी वजह से यह सम्मेलन संभव हुआ। उन्होंने वाटिकन फिल्म लाइब्रेरी में पेरू के फिल्म निर्माता लुइस एनरिक कैम की डायरेक्ट की हुई डॉक्यूमेंट्री “ऊना रोजा पर इल मोंदो” (“दुनिया के लिए एक रोस”) की पिछली स्क्रीनिंग के बारे में भी बताया।

यह डॉक्यूमेंट्री इस संत के आदर्श को फैला रही है जो आज भी अत्यन्त प्रसांगिक और प्रभावशाली हैं। राजदूत ने कहा कि “इंटरनेट से पहले” के समय में भी, लीमा की तीन-चौथाई आबादी ने उनके ताबूत के जुलूस में हिस्सा लिया था।

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

29 जनवरी 2026, 15:14