देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें  (ANSA)

देवदूत प्रार्थना में पोप : यह चालीसा आपके जीवन को उत्कृष्ट बनाए

रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा लियो 14वें ने अपने संदेश में चालीसा काल के पहले रविवार के पाठ पर चिंतन किया तथा कहा कि चालीसा काल विश्वासियों को अवसर देता है कि हम अपने आपको प्रभु को शुद्ध करने दें, ईश्वर के साथ गहरा संबंध स्थापित करें, और ऐसा करके, हम अपने जीवन को उनकी उत्कृष्ट कृति बनाएँ।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार, 23 फरवरी 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में चालीसा के प्रथम रविवार 22 फरवरी को संत पापा लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।

चालीसा काल एक प्रकाशमान रास्ता

आज चालीसा काल के प्रथम रविवार का सुसमाचार पाठ हमें येसु के बारे बतलाता है जो पवित्र आत्मा से संचालित होकर निर्जन प्रदेश चले जाते हैं और शैतान उनकी परीक्षा लेता है (मती. 4.1-11) चालीस दिनों तक उपवास करने के बाद, वे अपने मानवीय स्वभाव का भार महसूस कर रहे हैं : शारीरिक रूप से भूख के द्वारा और मानसिक रूप से शैतान के प्रलोभन के कारण।

संत पापा ने कहा, “इसके द्वारा वे वही संघर्ष महसूस कर रहे हैं, जो हम अपनी यात्रा में करते हैं। लेकिन शैतान पर विजय पाने के द्वारा वे दिखाते हैं कि हम भी शैतान के धोखे और जाल से ऊपर उठ सकते हैं।”

इस जीवन वचन द्वारा धर्मविधि हमें निमंत्रण देता है कि हम चालीसा काल को एक प्रकाशमान रास्ते की तरह देखें। प्रार्थना, उपवास और दान के द्वारा हम अपने जीवन को एक उत्कृष्ट कृति बनाने में प्रभु के साथ सहयोग करना फिर शुरू करें। हम उन्हें अपने पापों के दागों को साफ करने और घावों को भरने दें, क्योंकि हम अपने जीवन को तब तक खूबसूरती से खिलने नहीं दे सकते जब तक कि प्रेम की पूर्णता न पा लें — जो सच्ची खुशी का एकमात्र माध्यम है।

उस खुशी की तुलना में कुछ भी नहीं

निश्चय ही, यह एक मुश्किल सफर है। हमेशा निराशा का खतरा रहता है या संतुष्टि के आसान रास्तों, जैसे पैसा, शोहरत और ताकत की ओर खिंचे चले जाने का खतरा (मत्ती 4:3–8)। ये प्रलोभन, जिनका सामना खुद येसु ने किया, उस खुशी की तुलना में कुछ नहीं हैं जिसके लिए हम बनाये गये हैं। क्योंकि अंततः ये हमें नाखुश, बेचैन और खाली छोड़ देते हैं।

यही वजह है कि संत पापा पौल षष्ठम सिखाते हैं कि प्रायश्चित हमारी इंसानियत को कमजोर करने के बजाय – उसे बेहतर, शुद्ध और मजबूत बनाती है, क्योंकि तब हम एक ऐसे रास्ते की ओर बढ़ते हैं जिसका मकसद “ईश्वर के प्रति प्यार और समर्पण है” (प्रेरितक संविधान पेनीतेमिनी, 17 फरवरी 1966)। “सचमुच, तपस्या हमें अपनी कमजोरियों का एहसास कराती है, साथ ही यह हमें उनसे उबरने और ईश्वर की मदद से, उनके साथ और एक-दूसरे के साथ गहरा संबंध स्थापित करने की शक्ति भी देती है।”

प्रायश्चित एवं त्याग के रास्ते

अतः संत पापा ने प्रायश्चित एवं त्याग के रास्ते को अपनाने का प्रोत्साहन देते हुए कहा, “इसलिए, कृपा के इस समय में, आइए, हम प्रार्थना और दया के कामों के साथ-साथ खुले दिल से प्रायश्चित करें। हम कुछ देर के लिए टीवी, रेडियो और सेल फोन बंद करके शांति के लिए जगह बनाएँ। हम ईश्वर के वचन पर चिंतन करें, पवित्र संस्कार की भेंट करें, और पवित्र आत्मा की आवाज सुनें जो हमारे दिल में हमसे बात करते हैं।”

सुनना और भलाई करना

आइये, हम एक दूसरे को सुनें – हमारे परिवारों में, कार्यस्थलों में और समुदायों में। उन लोगों के लिए समय दें जो अकेले हैं, खासकर, बुजूर्ग, गरीब और बीमार। व्यर्थ बर्बाद करना छोड़कर, हम बचे हुए चीजों से जरूरतमंदों की मदद करें। जैसा कि संत अगुस्टीन सिखाते हैं अगर हम विनम्रता और उदारता के साथ, उपवास और दान के द्वारा, खुद को संयमित करेंगे और क्षमा करके, अच्छे कार्य करेंगे और बुरे कार्य छोड़ देंगे, बुराई से दूर रहेंगे और भलाई करेंगे, तब हमारी प्रार्थना स्वर्ग तक पहुँचेगी और हमें शांति देगी। (प्रवचन, 206, 3)

कुँवारी मरियम से प्रार्थना

तब संत पापा ने विश्वासियों से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, “हम चालीसा काल की अपनी इस यात्रा को धन्य कुँवारी मरियम, हमारी माता को समर्पित करें जो परीक्षा की घड़ी में हमेशा अपने बच्चों का साथ देती हैं।  

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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23 फ़रवरी 2026, 15:06

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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