संत  पापा लियो आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो आमदर्शन समारोह में  (ANSA)

संत पापाः ईश वचन जीवन के अर्थपूर्ण खोज की तृप्ति

संत पापा लियो ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह की धर्मशिक्षा माला में कलीसिया और ईश वचन के मध्य संबंध पर चिंतन करते हुए ईश्वर के वचन को मानव जीवन के अर्थपूर्ण खोज की तृप्ति कहा।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्टम के सभागार में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात और सुस्वागतम्।

आज की धर्मशिक्षा माला में हम ईश वचन और कलीसिया के मध्य गहरे और विशेष संबंध पर चिंतन करेंगे, जिसकी चर्चा हम देई बेरूबुम के छटवें अध्याय में पाते हैं। कलीसिया पवित्र धर्मग्रँथ का एक वास्तविक निवास स्थल है। पवित्र आत्मा की प्रेरणा से, ईश्वर के लोगों द्वारा बाईबल लिखा गया और इसे ईश प्रजा के लिए समर्पित किया गया है। ख्रीस्तीय समुदाय, यदि कहा जाये तो उसका निवास स्थल है- कलीसिया के जीवन और विश्वास में, यह अपने अर्थ और अपनी शक्ति को व्यक्त करती है।

ईश वचन की उपासना

वाटिकन द्वितीय महासभा हमें इस बात की याद दिलाती है, “कलीसिया धर्मग्रँथ की उपासना उस रूप में करती है मानो वह ख्रीस्त का शरीर हो, विशेष रुप से पवित्र धर्मविधि में, वह अपने को जीवन की रोटी से पोषित करती है, उस बलि वेदी से जहाँ ईश्वर का वचन और ख्रीस्त का शरीर दोनों प्राप्त होता है, और जिन्हें वह विश्वासियों को निरंतर प्रदान करती है। इससे भी बढ़कर, “पवित्र परंपरा के साथ, कलीसिया ने सदैव इस कार्य को किया है, वह विश्वास में इसे सर्वोतम नियम की तरह देखती है और देखती रहेगी।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन   (ANSA)

कलीसिया पवित्र धर्मग्रँथ के मूल्यवान बातों पर चिंतन करना कभी नहीं छोड़ती है। द्वितीय वाटिकन सभा के बाद, इस संबंध में, धर्माध्यक्षों की एक साधारण आमसभा को हम एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्वरुप पाते हैं जिसका आयोजन अक्टूबर 2008 में किया गया, जिसकी विषयवस्तु थी- “कलीसिया के जीवन और प्रेरिताई में ईश्वर का वचन”। संत पापा बेनदिक्त 16वें ने धर्मसभा के उपरांत इसके फलों को बेरूबुम दोमिनी के रुप में संग्रहित किया (30 सितम्बर 2010), जिसमें उन्होंने इस बात पर बल दिया “शब्द और विश्वास के बीच का गहरा संबंध यह स्पष्ट करता है कि सच्चे बाईबिल का अर्थ सिर्फ़ कलीसिया के विश्वास में ही प्राप्त किया जा सकता है, जिसका उदाहरण मरियम की दीन-हीनता में है... धर्मग्रंथों की व्याख्या का मुख्य आधार कलीसिया का जीवन है।”

ईश वचन में ईश मिलन

कलीसियाई समुदाय में, धर्मग्रंथ इस भांति संदर्भ को प्राप्त करती है जिसके फलस्वरुप वह अपने विशेष कार्य और लक्ष्य को पूरी करती है- ख्रीस्त की घोषणा करना और ईश्वर के संग वार्ता करने हेतु खोलना। “धर्मग्रंथ की अज्ञानता वास्तव में, ख्रीस्त की अज्ञानता है।” संत जेरोम की यह प्रसिद्ध अभिव्यक्ति हमें धर्मग्रंथ के अध्ययन और चिंतन के मुख्य लक्ष्य की याद दिलाती है- ख्रीस्त को जानना और उनके द्वारा ईश्वर के संग संबंध में प्रवेश करना, एक संबंध जिसे हम एक वार्ता के रुप में, बातचीत स्वरुप समझ सकते हैं। और धर्मसिद्धांत देई बेरूबुम हमें इस रहस्य को एक वार्ता के रुप में प्रकट करता है जिसमें ईश्वर मानव के संग मित्र स्वरुप वार्ता करते हैं। यह हमारे लिए तब होता है जब हम धर्मग्रँथ का अध्ययन प्रार्थना के मोनभाव से करते हैं, इस तरह ईश्वर हमसे मिलने आते और हमारे संग एक वार्ता में प्रवेश करते हैं।

आमदर्शन समारोह में  विश्वासियों  और तीर्थयात्रीगण
आमदर्शन समारोह में विश्वासियों और तीर्थयात्रीगण   (AFP or licensors)

ईश वचन में प्रभावकारी शक्ति

संत पापा लियो ने कहा कि पवित्र धर्मग्रंथ जो कलीसिया को दिया गया है जिसे वह सुरक्षित रखती और उसकी व्याख्या करती है जो उसकी एक सक्रिया भूमिका को प्रकट करती है वास्तव में, हम उसमें एक प्रभावकारी शक्ति को पाते हैं, जो ख्रीस्तीय समुदाय को प्रोषित और शक्ति प्रदान करती है। सभी विश्वासी इस स्रोत से पीने हेतु बुलाये जाते हैं, सर्वप्रथम य़ूखारीस्तीय धर्मविधि और अन्य दूसरे संस्कारों में। पवित्र धर्मग्रँथ से प्रेम और उसका ज्ञान उनका पथप्रदर्शन करे, जो वचन की प्रेरिताई करते हैं- धर्माध्यक्षगण, पुरोहित, उपयाजक, प्रचारक। इसकी व्याख्या का कार्य और वे जो धर्मग्रँथ विज्ञान का अभ्यास करते हैं अपने में मूल्यवान है और इस तरह ईशशास्त्र में हम धर्मग्रँथ की केन्द्रीय भूमिका को पाते हैं, जहाँ ईश्वर के वचन में वह अपनी नींव और आत्मा को प्राप्त करता है।

आमदर्शन समारोह में  संत पापा लियो
आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो   (@Vatican Media)

ईश वचन हमारी प्यास बुझाती है

संत पापा ने कहा कि कलीसिया की तीव्र इच्छा यही है कि ईश्वर का वचन हर विश्वासी के जीवन में पहुँचे और उनके विश्वास की यात्रा को पोषित करे। इसके साथ ही ईश्वर का वचन कलीसिया को अपने से परे जाने में मदद करता है, यह उसे सभों की प्रेरिताई हेतु निरंतर खुला रहने में मदद करता है। वास्तव में, हम बहुत सारे शब्दों से अपने को घिरा पाते हैं लेकिन उनमें से कितने अपने में व्यर्थ हैं। हम कभी-कभी ज्ञान की बातों को भी सुनते हैं, यद्यपि वे हमारे लिए अनंत लक्ष्य को स्पर्श करने में मदद नहीं करते हैं। ईश्वर का वचन, इसके बदले हमारे अर्थपूर्ण खोज की प्यास को बुझाती है, हमारे लिए जीवन की सच्चाई को प्रकट करती है। यह केवल ईश वचन है जो हमारे लिए सदैव नया बना रहता है, जो हमारे लिए ईश्वर के रहस्य को प्रकट करता है, यह अक्षय है जिसकी समृद्ध कभी खत्म नहीं होती है।

संत पापा लियोः ईश वचन हमारी प्यास बुझती है

ईश वचन हेतु अपने को खोलें

प्रिय मित्रों, संत पापा ने कहा कि कलीसिया में रहते हुए हम इस बात को जानते हैं कि पवित्र धर्मग्रंथ पूर्णरूपेण येसु ख्रीस्त से सबंधित है और एक व्यक्ति इसके मूल्य और शक्ति को गहरे रुप में अनुभव करता है। ख्रीस्त पिता ईश्वर के जीवित वचन हैं, जिन्होंने शरीरधारण किया। सभी धर्मग्रँथ उस व्यक्ति के बारे में घोषणा करते हैं, और वे हममें से हरएक के लिए और सारी मानवता हेतु उनके मुक्तिदायी उपस्थिति को घोषित करता है। आइए तब हम अपने मन और दिल को उस उपहार का स्वागत करने के लिए खोलें, मरियम के उदाहरण का अनुसरण करते हुए जो कलीसिया की माता हैं। 

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11 फ़रवरी 2026, 12:12