संत पापा लियो वाटिकन में मिस्सा बलिदान के दौरान संत पापा लियो वाटिकन में मिस्सा बलिदान के दौरान  (ANSA)

संत पापा लियोः कार्यों के माध्यम ईश्वर का साक्ष्य दें

संत पापा लियो ने समर्पित धर्मसंघियों और धर्मबहनों के संग येसु का मंदिर में समर्पण का पर्व मानते हुए उन्हें अपने कार्यों में ख्रीस्त का साक्षी होने का निमंत्रण दिया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने येसु ख्रीस्त का मंदिर में समर्पण पर्व दिवस मानते हुए समर्पित जीवन के लोगों संग वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा कि ख्रीस्त के समर्पण के पर्व का सुसमाचार हमारे लिए सिमियोन और अन्ना का मंदिर में येसु को पहचानने और उन्हें मुक्तिदाता घोषित किये जाने की चर्चा करता है। यहाँ हम प्रेम की दो बातों को आपस में मिलता पाते हैं- पहला ईश्वर को जो अपने लोगों को बचाने आते हैं और मानवता जो उनके आने की प्रतीक्षा विश्वास भरी उत्सुकता में करती है।

सिमियोन और अन्ना

ईश्वर की ओर से, हम येसु को एक दरिद्र परिवार के पुत्र स्वरूप पाते हैं, वे येरूसालेम के भव्य संदर्भ में अपने को हमारी पूर्ण स्वतंत्रता में, हमारी दरिद्रता में पूरी तरह शामिल करते हैं। हम उनके कार्यों में कोई दबाव को नहीं पाते हैं, हम उनमें हथियारहीन उदारता की शक्ति को पाते हैं। वहीं दूसरी ओर, मानवता की आशा- विशेष कर इस्रराएल के लोगों की- दो बुजुर्गों, सिमियोन और अन्ना में अपनी पूर्णता को प्राप्त करती है। यह क्षण मुक्ति इतिहास में एक लम्बी प्रतीक्षा को व्यक्त करता है जिसे हम आदम वाटिका से मंदिर के आंगन तक फैला पाते हैं- एक इतिहास जिसमें हम ज्योति और अंधकार, असफलता और नवीनता को पाते हैं यद्यपि सदैव एक ही विशेष - सृष्टि प्राणियों का अपने सृष्टिकर्ता से पूर्ण मिलन की मुख्य चाह को अपने में धारण करती है। इस भांति, पवित्रों में पवित्रता के प्रांगण से, ज्योतिपुंज अपने को दुनिया के लिए एक दीप स्वरुप प्रदान करते हैं, और अलौकिक अपने में लौकिक के लिए इस कदर नम्रता में देते हैं, कि उनकी उपस्थिति का एहसास तक नहीं होता है।

संत पापा लियो, येसु के मंदिर समर्पण पर्व के मिस्सा में
संत पापा लियो, येसु के मंदिर समर्पण पर्व के मिस्सा में   (AFP or licensors)

सुनार की आग और धोबी की खार

संत पापा ने कहा कि आज हम  समर्पित जीवन का 30वाँ विश्व दिवस मना रहे हैं, इस दृश्य पर विचार करते हुए और इसे एक निशानी के रुप में पहचानते हुए हम समर्पित जन कलीसिया और विश्व में प्रेरिताई हेतु बुलाये गये हैं। संत पापा फ्रांसिस ने इसके संबंध में कहा था, “विश्व को जगाओ, क्योंकि समर्पित जीवन की मुख्य निशानी सुसमाचार की घोषणा है।” प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा ने कहा, कलीसिया आप को नबी बनने का आहृवान देती है- संदेशवाहक जो ईश्वर की उपस्थिति को घोषित करते हैं और उनके लिए मार्ग तैयार करते हैं। संत पापा ने पहले पाठ, नबी मलआकी के ग्रंथ की ओर ध्यान आकर्षित कराया जो समर्पित जीवन के लोगों को उदारता में अपने को ईश्वर के लिए “खाली” करने, सुनार की आग और धोबी की खार सदृश होने का निमंत्रण देता है (मलआकी 3.1-3)।     

अपने को इस रूप में देते हुए, ख्रीस्त- जो अनंत विधान के संदेशवाहक हैं, जो मानवता में आज उपस्थित रहते हैं- प्रेम, कृपा और करूणा से हमारे हृदयों को शुद्ध करते और हमें दीन बनाते हैं। “आप इस प्रेरिताई हेतु बुलाये गये हैं उससे भी बढ़कर अपने त्यागमय जीवन, प्रार्थना में जड़ित और करूणा में अपने को निछावर करें।” (लुमेन जेनसियुम 44)

यूखरीस्तीय धर्मविधि का प्रभाव

पवित्र आत्मा के कार्य में नम्र, आपके संस्थापकों और संस्थापिकाओं ने, ईमानदारी और प्रभावकारी ढ़ंग से इस काम को पूरा करने का अतिसुन्दर आदर्श प्रदान किया है। स्वर्ग और पृथ्वी के बीच में सदैव तानव में जीते हुए उन्होंने स्वयं को विश्वास और सहास से निर्देशित होने दिया। यूखारीस्तीय धर्मविधि में सहभागिता ने कुछेक को मौन मठवासी जीवन के लिए अग्रसर किया, दूसरों ने प्रेरिताई की पुकार सुनी, कुछ ने विद्यालय के कक्षा में, कुछ ने गलियों के गरीबों को या प्रेरितिकि कार्य हेतु कड़ी मेहनत की। इसी विश्वास ने उन्हें बारंबार विनम्रता और विवेक में, क्रूस के नीचे और संदूक के पास लौटने के लिए प्रेरित किया, जहाँ उन्होंने सब कुछ अर्पित किया और ईश्वर में अपने सभी कामों के लिए उत्साह और लक्ष्य दोनों पाया। कृपा की शक्ति से, उन्होंने जोखिम उठाये। विकट या उदासीनता भरी स्थिति में वे एक प्रार्थनामय उपस्थिति बनें, एक उदार हाथ और परित्यक्त तथा छोड़ दिये गये स्थिति में मित्रवत कंधे और हिंसा तथा नफ़रत से भरे हालात में शांति और मेल-मिलाप के साक्षी बनते हैं। वे धारा के विरूध जाने वाले परिणामों का सामना करने को तैयार थे, येसु ख्रीस्त में वे विरोधाभाव की एक निशानी बनें, कुछ परिस्थिति में उन्हें शहीद होना पड़ा।

समर्पित जीवन की धर्मबहनें
समर्पित जीवन की धर्मबहनें   (VINCENZO LIVIERI)

संत पापा बेनेदिक्त 16वें के शब्दों को उदृधृत करते हुए संत पापा ने लियो ने कहा कि “धर्मग्रंथ  की व्याख्या अधूरी रहेगी यदि हम उन लोगों की बातें न सुनें जिन्होंने सचमुच में ईश्वर के वचन को जीया है।” आज, हम अपने उन भाई-बहनों का आदार करते हैं जो नायक के रुप में  हमसे पहले “प्रेरितिक परंपरा, जहाँ ईश वचन ने नबूवत जीवन की सेवा में उन्हें स्थापित किया है।” हम भी उनके आदर्श को आगे बढ़ते हुए ऐसा करते हैं।

जीवन से साक्ष्य दें

आज भी आप, सुसमाचार प्रचार और अपने अन्य दूसरे प्रेमपूर्ण कार्यों के द्वारा इतिहास में ईश्वर की मुक्तिदायी उपस्थिति का साक्ष्य देने हेतु बुलाये गये हैं, यहाँ तक कि समाज की उन परिस्थितियों में भी है जहाँ मानव के जीवन को गलत रुप में देखा और कम आंका जाता है जो विश्वास और जीवन के मध्य की खाई को विस्तृत करती, आस्था और जीवन के बीच की खाई को और बढ़ाती है। “आप इसका साक्ष्य देने हेतु बुलाये गये हैं कि बुजुर्ग, गरीब, बीमार और कैदी सभी चीजों से बढ़कर ईश्वर की वेदी और हृदय में एक पवित्र स्थान रखते हैं। वहीं   उनमें से हर कोई ईश्वरीय अनुल्लंघनीय उपस्थिति हैं, जिसके सामने हमें नतमस्तक होने की जरुरत है, जिससे हम उनसे मिल सकें, उनकी आराधना और महिमा कर सकें।

मिस्सा बलिदान में पुरोहितगण
मिस्सा बलिदान में पुरोहितगण   (ANSA)

समर्पित जीवन की चुनौतियाँ

संत पापा ने किहा कि इसका साक्ष्य “सुसमाचार की चौकियों” में देखा जा सकता है जिन्हें आपके समुदायों ने अलग-अलग मुश्किल परिस्थितियों में, यहाँ तक कि संघर्ष भरी स्थितियों में बनाये रखा है। ये समुदाय अपने लोगों का परित्याग नहीं करते हैं, न ही वे भागते हैं, वे डटे रहते हैं, बहुधा उन्हें अपनी सुरक्षा खोना पड़ता है- वे जीवन की अति विकट परिस्थिति में भी हमें जीवन की अलंघनीय पवित्रता की याद दिलाते हैं। हथियारों की गड़गड़ाहट और शेखी, स्वार्थ और हिंसा की स्थिति में भी उनकी उपस्थिति ईश वचनों को घोषित करती है, “सावधान रहो, उन नन्हों में एक को भी तुच्छ न समझो, क्योंकि... उनके दूत स्वर्ग में निरंतर मेरे स्वर्गिक पिता के दर्शन करते हैं। (मत्ती.18.10)

सिमियोन की प्रार्थना

इस संदर्भ में संत पापा ने कहा कि मैं बुजुर्ग सिमियोन की प्रार्थना पर चिंतन करना चाहूँगा, जिसे हम प्रतिदिन करते हैं, “प्रभु, अब तू अपने वचन के अनुसार अपने दास को को शांति के साथ विदा कर, क्योंकि मेरी आंखों ने उस मुक्ति को देखा है।” (लूका.2.29-30) समर्पित जीवन, शांति में सभी क्षणभंगुर चीजों की असक्ति से मुक्त, दुनियावी सच्चाइयों की सच्ची चिंता और अनंत जीवन के लिए आशा में प्रेम भरी उम्मीद के मध्य एक अटूट संबंध को प्रकट करता है- वे चीजें जिनका चुनाव हम इस दुनिया में करते हैं हमारे लिए अंतिम और निश्चित लक्ष्य की ओर इंगित कराती है, और इस भांति वे हमारे लिए सभी चीजों को अर्थपूर्ण बनाने को योग्य होती हैं। सिमियोन ने येसु में मुक्ति का अनुभव किया और वे जीवन और मृत्यु के मध्य स्वतंत्र रहे। एक धर्मी और भक्त व्यक्ति की भांति अन्ना के संग जिसे “ईशमंदिर का परित्याग कभी नहीं किया”, वे दुनिया में ईश्वरीय प्रतिज्ञा की राह देखते हैं।

संत पापा लियोः येसु का मंदिर में समर्पण पर्व

हमारा जीवन भातृत्व का बीज

द्वितीय वाटिकन महासभा की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए संत पापा ने कहा, “कलीसिया...अपनी पूर्णतः केवल स्वर्गीय महिमा में प्राप्त करती है, उस समय, मानव जाति के संग, सारी पृथ्वी... ख्रीस्त में अपनी पूर्णत को प्राप्त करेगी।” यह भविष्यवाणी हम सभों को अपने में सम्माहित करती है जो वर्तमान की सच्चाईयों में संयुक्त है, यद्यपि हम सदैव स्वर्गिक चीजों के प्रति सजग हैं। ख्रीस्त मरे और जी उठे जिससे वे दासता में जीवन बीताने वालों को मृत्यु के भय से मुक्त कर सकें। (इब्रा.2.15)। संत पापा लियो ने समर्पित जीवन के भाई-बहनों से कहा, “अपने समर्पण में निकटता से उनका अनुसरण करना- उनकी निर्धनता और पवित्र आत्मा में जीवन साझा करने के द्वारा आप विश्व को संघषों से बाहर निकलने का मार्ग दिखा सकते हैं, अपने स्वतंत्र प्रेम और शर्तहीन क्षमा के द्वारा आप भातृत्व के बीज बो सकते हैं।”

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (ANSA)

मरियम सहायता करें

अपने प्रवचन ने अंत में संत पापा लियो ने कहा कि आज कलीसिया ईश्वर को और आप सबों की उपस्थिति के लिए धन्यवाद देती है। वह आप को शांति का खमीर और जहाँ कहीं ईश्वर आप को निर्देशित करें, आशा की निशानी बनने को प्रोत्साहित करती है। ईश्वर की वेदी में अपने जीवन के समर्पण को नवीन करते हुए हम अपने कार्यों को अपने संस्थापकों और संस्थापिकाओं के संग पवित्र मरियम की मध्यस्थता में सुपुर्द करते हैं।

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03 फ़रवरी 2026, 14:37