देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें देवदूत प्रार्थना का संचालन करते पोप लियो 14वें  (ANSA)

देवदूत प्रार्थना में पोप : सच्ची धार्मिकता महान प्रेम की मांग करती है

रविवार को देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा लियो 14वे ने रविवार के सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया जहाँ उन्होंने बतलाया कि सुसमाचार हमें सिखाता है कि सच्ची धार्मिकता के लिए हमें प्यार करना है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार, 16 फरवरी 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 15 फरवरी को संत पापा लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार!

आज भी हम सुसमाचार पाठ में “पर्वत प्रवचन” के एक भाग को सुनेंगे। (मती. 5,17-37) धन्यताओं की घोषणा के बाद येसु हमें ईश्वर के राज्य  में प्रवेश करने के लिए आमंत्रित करते हैं, इस यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करने के लिए, वे संहिता एवं मूसा के नियमों के असल अर्थ को प्रकट करते हैं। ये नियम ईश्वर के सामने सही महसूस करने की बाहरी धार्मिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए नहीं हैं, बल्कि हमें ईश्वर और हमारे भाई-बहनों के साथ एक प्यार भरा रिश्ता बनाने में मदद करते हैं। इसलिए येसु कहते हैं कि वे संहिता को समाप्त करने नहीं, बल्कि "पूरा करने" आए हैं ।"(पद 17)

संहिता को पूरा करना वास्तव में प्यार करना है, जो इसके गहरे मतलब और अंतिम लक्ष्य को समझता है। यह शास्त्रियों और फरीसियों से "बेहतर न्याय" (20) पाने के बारे में है, एक ऐसा न्याय जो सिर्फ आज्ञाओं का पालन करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमें प्यार के लिए खोलता और प्रेम के लिए समर्पित करता है। असल में, येसु संहिता के कुछ नियमों की जाँच करते हैं जो जीवन के ठोस मामलों से जुड़े हैं, और विरोधाभास की भाषा का प्रयोग करते हैं। वे इसका इस्तेमाल धार्मिक न्याय और ईश्वर के राज्य के न्याय के बीच का फर्क दिखाने के लिए करते हैं: एक तरफ येसु कहते हैं: "तुमने सुना है कि कहा गया है," और दूसरी तरफ, वे कहते हैं: "लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ।" (21-37)।

संत पापा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है। यह हमें बताता है कि मूसा और नबियों को संहिता इसलिए दिया गया था ताकि वे ईश्वर तथा हमारे और इतिहास के लिए उनकी योजना को जान सकें, या संत पौलुस के शब्दों में कहें तो, एक शिक्षक के रूप में था जिसने हमें ईश्वर तक पहुँचाया। (गलातियों 3:23-25)

लेकिन अब येसु के रूप में वे स्वयं हमारे बीच आये, जिसके द्वारा उन्होंने संहिता को पूर्णता दी, हमें पिता का पुत्र बनाया एवं उनके साथ पुत्र के रूप में तथा आपस में भाई-बहन के रूप में पुनः संबंध स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।

संत पापा ने कहा, “येसु हमें सिखलाते हैं कि सच्चा न्याय प्रेम है जो हर नियम के अंदर है, हमें प्यार की जरूरत को समझना होगा। वास्तव में, किसी व्यक्ति को शारीरिक रूप से नहीं मारना काफी नहीं है, यदि हम उसे अपने शब्दों से मारते हैं या उसकी इज्जत का सम्मान कहीं करते। (21-22) इसी तरह, अपने जीवनसाथी के प्रति औपचारिक रूप से वफादार रहना और व्यभिचार नहीं करना काफी नहीं है; अगर इस रिश्ते में एक-दूसरे के लिए कोमलता, एक-दूसरे को सुनना, सम्मान देना, एक-दूसरे की परवाह करना और एक आम योजना में साथ चलना नहीं है। इन उदाहरणों में, जो खुद येसु हमें देते हैं, हम और भी जोड़ सकते हैं। सुसमाचार हमें यह बहुमूल्य सीख देता है कि थोड़ा सा न्याय काफी नहीं है; गहरे प्यार की जरूरत है, जो ईश्वर की शक्ति से संभव है।

तब माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए संत पापा ने कहा, “आइये, हम कुँवारी मरियम का आह्वान करे जिन्होंने ख्रीस्त को हमें दिया, जो संहिता और मुक्ति की योजना को पूरा करते हैं: हमारी मध्यस्थता करें, हमें ईश्वर के राज्य के तर्क में प्रवेश करने और उसके न्याय के अनुसार जीने में मदद करे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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16 फ़रवरी 2026, 15:13

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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