जिनिवा में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बालेस्त्रेरो जिनिवा में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बालेस्त्रेरो 

यू एन की कठिनाइयाँ बहुपक्षीयवाद के संकट का प्रतिबिम्बन

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अन्तोनियो गुत्तेरेस द्वारा संघ के संभावित वित्तीय दिवालियापन की चेतावनी के बाद महाधर्माध्यक्ष बालेस्त्रेरो ने कहा कि स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है: "यह एक संरचनात्मक संकट है।"

वाटिकन सिटी

जिनिवा, शनिवार, 7 फरवरी 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघीय कार्यालय में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष एत्तोरे बालेस्त्रेरो ने वाटिकन मीडिया से बातचीत में कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की कठिनाइयाँ बहुपक्षीयवाद के संकट को प्रतिबिम्बित करती हैं।

चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अन्तोनियो गुत्तेरेस द्वारा संघ के संभावित वित्तीय दिवालियापन यानि फाइनेंशियल बैंकरप्सी की चेतावनी के बाद महाधर्माध्यक्ष बालेस्त्रेरो ने कहा कि स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है: "यह एक संरचनात्मक संकट है।" उन्होंने कहा कि मानवतावादी और लोकोपकारी सहायता में पहले से ही की गई बड़ी कटौती के बारे में सोचना वास्तव में दर्दनाक है।"

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि यदि इस संकट का जल्द ही हल नहीं निकाला गया तो और भी बड़ी चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं। इससे उन्होंने कहा कार्यप्रणाली में रोक-टोक, शांति कायम रखने देरी, कर्मचारियों की तन्ख्वाह देने में देरी और नये कर्मचारियों को न लिये जाने का संकट उत्पन्न हो सकता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पीसकीपिंग ऑपरेशन के बजट में 15% की कटौती पर विचार किया जा रहा है।

बहुपक्षीयवाद का संकट

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि यह बहुपक्षीयवाद के संकट का लक्षण है जिसके कई अलग-अलग चेहरे हैं। उदाहरण के लिए, युद्ध के सामने बहुपक्षीय संस्थाओं का काम न करना, हथियारों की नई दौड़, दूसरे विश्व युद्ध के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा बनाए गए निरस्त्रीकरण निकाय को खत्म करना। उन्होंने कहा कि अभी 05 फरवरी को ही न्यू स्टार्ट, जो अमरीका और रूस के बीच न्यूक्लियर हथियारों को कम करने पर साइन की गई अन्तरराष्ट्रीय संधि थी वह खत्म हो गई। इसके अतिरिक्त अन्य मुद्दे भी हैं, जैसे कि सबसे ताकतवर के कानून के पक्ष में कानून की व्यववस्था का खत्म होना और प्रोटेक्शनिस्ट इकोनॉमिक पॉलिसी यानि संरक्षणवादी आर्थिक नीतियां, जो संकट को और अधिक गहरा रही हैं।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि इन संकटों का कारण आम भलाई के विचार में भरोसे का लगातार नुकसान और कम होना है। उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध तेज़ी से शून्य-योग का एक खेल बनते जा रहे हैं और दुर्भाग्यवश इस भ्रम ने ज़ोर पकड़ लिया है कि एक साथ मिलकर नहीं बल्कि ताकत के बल पर ही सुरक्षा और विकास अकेले ही हासिल किया जा सकता है।  

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07 फ़रवरी 2026, 11:59