पूर्वी ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के युवा पुरोहितों और मठवासियों से मुलाकात करते संत पापा लियो 14वें पूर्वी ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के युवा पुरोहितों और मठवासियों से मुलाकात करते संत पापा लियो 14वें  (ANSA)

पुर्वी कलीसियाओं के पुरोहितों एवं मठवासियों से पोप : 'साझा विश्वास में बढ़ें'

पूर्वी ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के युवा पुरोहितों और मठवासियों को संबोधित करते हुए, पोप लियो 14वें ने उनकी विरासत को बनाए रखने और एक-दूसरे का साथ देने की कोशिशों को बढ़ावा दिया, 'ताकि हम ख्रीस्त में अपने साझा विश्वास में बढ़ सकें, जो हमारी शांति के असली स्रोत हैं।'

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 फरवरी 2026 (रेई) : संत पापा लियो 14वें ने अध्ययन दौरे पर रोम आये पूर्वी ऑर्थोडॉक्स कलीसियाओं के 25 युवा पुरोहितों एवं मठवासियों से मुलाकात की।

संत पापा लियो 14वें ने बृहस्पतिवार को अर्मेनियाई, कोप्टिक, इथोपियाई, इरेड्रियाई, मलांकाराई और सीरियाई कलीसियाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे पुरोहितों एवं मठवासियों का स्वागत किया।

ख्रीस्तीय एकता को बढ़ावा देनेवाले विभाग की ओर से आयोजित इस अध्ययन दौरे के प्रतिभागियों ने काथलिक कलीसिया और रोमन कूरिया के बारे कई जानकारियाँ प्राप्त कीं।

एक दूसरे का साथ दें

संत पापा ने ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सप्ताह की याद दिलाते हुए कहा, “हमने हाल ही में ख्रीस्तीय एकता के लिए प्रार्थना सप्ताह मनाया, जिसकी विषयवस्तु एफेसियों को लिखे संत पौलुस के पत्र से लिया गया था, जिसमें प्रेरित ने विश्वास में एक होने की अहमियत पर जोर दिया था: "एक शरीर और एक आत्मा है, ठीक वैसे ही जैसे तुम्हें अपने बुलावे की एक ही आशा के लिए बुलाया गया था।" (एफे. 4:4)।

संत पापा ने कहा, “जैसा कि हम जानते हैं, संत पौलुस ने इस्राएल, एशिया माइनर, सीरिया, अरब और यहाँ तक कि यूरोप में भी कई यात्राएँ की। कई ईसाई समुदायों को शुरू करके और वहाँ जाकर, उन्हें हर कलीसिया की विशेषता, यानी उनकी जाति, उनके रीति-रिवाजों, साथ ही उनकी चुनौतियों और चिंताओं के बारे में जाना।” संत पौलुस समझ गये थे कि समुदाय अपने आप में खोकर, सिर्फ अपनी समस्याओं पर ध्यान दे सकते हैं। इसलिए, वे अपने सभी चिट्ठियों में याद दिलाते हैं कि हम सभी ख्रीस्त के एक ही रहस्यमयी शरीर के अंग हैं। इस तरह उन्होंने उन्हें एक-दूसरे का साथ देने और विश्वास एवं शिक्षाओं की एकता बनाए रखने के लिए बढ़ावा दिया जो ईश्वर के पारलौकिक स्वभाव और एकता को दिखाती हैं।

हम एकता और उदारता में बढ़ सकें

ख्रीस्तीय एकता पर बल देते हुए संत पापा ने कलीसिया में ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं को हमारे आम ख्रीस्तीय धरोहर का एक शानदार मोजाईक कहा, जिसकी सराहना सभी कर सकते हैं। साथ ही, कहा कि “हमें एक-दूसरे का समर्थन करते रहना चाहिए, ताकि हम मसीह में अपने साझा विश्वास में बढ़ सकें, जो हमारी शांति का असली स्रोत है।” (एफे 2:14)

इसके लिए पोप ने कहा कि हमें “अपने आपको निरस्त्र” करना होगा। ख्रीस्तीय एकता आंदोलन के अग्रणी प्राधिधर्माध्यक्ष अथनागोरस के शब्दों का हवाला देते हुए, जो कहा करते थे, "मैं सही होने की चाहत से, दूसरों को बदनाम करके, खुद को सही ठहराने की,सबसे मुश्किल लड़ाई, खुद के खिलाफ लड़ाई" लड़ने से आजाद हो गया हूँ।” पोप ने कहा कि जब हम अपने अंदर की गलत सोच को खत्म करते हैं और अपने दिलों को आजाद करते हैं, तो हम प्यार में बढ़ते हैं, ज्यादा करीब से मिलकर काम करते हैं, और मसीह में अपनी एकता के बंधन को मजबूत करते हैं, तो ख्रीस्तीय एकता धरती पर शांति और सभी के बीच मेल-मिलाप के लिए एक खमीर भी बन जाती है।

अंत में, संत पापा ने सभी पुरोहितों एवं मठवासियों को उनके दौरे के लिए आभार प्रकट किया तथा अपना प्रार्थनाओं का आश्वासन देते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

05 फ़रवरी 2026, 16:18