पोप : पास्का नफरत दूर भगाता और शक्तिशालियों को नीचे गिराता है
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, रविवार, 5 अप्रैल 26 (रेई) : संत पापा लियो 14वें ने शनिवार शाम को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पास्का जागरण की धर्मविधि की अध्यक्षता करते हुए अच्छाई, बुराई और पुनर्जन्म पर चिंतन किया।
पोप ने एक पुराने भजन का हवाला देते हुए कहा कि पास्का "नफरत को दूर करता है, मेलजोल बढ़ाता और शक्तिशालियों को नीचे गिराता है।"
समत पापा ने कहा, “आज रात की पवित्र करनेवाली शक्ति बुराई को दूर करती है, गलतियों को धो देती, पापी को शुद्ध करती… नफरत दूर करती, मेल-मिलाप बढ़ाती और शक्तिशालियों को नीचे गिराती है।”
प्यारे भाइयो और बहनो, इस समारोह के शुरू में इन्हीं शब्दों के साथ, उपयाजक ने पुनर्जीवित ख्रीस्त की ज्योति का गुणगान किया, जिसका प्रतीक पास्का मोमबत्ती है। इस एक मोमबत्ती से, हम सबने अपनी-अपनी मोमबत्तियाँ जलाई, और, हरेक ने उसी आग से ली गई एक छोटी लौ लेकर, इस महागिरजाघर को रोशन किया है। यह पास्का का प्रकाश है, जो हमें दुनिया के लिए रोशनी के रूप में कलीसिया में एक करता है। उपयाजक की घोषणा पर, हमने “आमीन” कहकर, इस मिशन को अपनाने के अपने समर्पण को पुष्ट किया, और जल्द ही हम अपने बपतिस्मा के वादों को दुहराते हुए अपनी “हाँ” दोहराएंगे।
मेरे प्यारे मित्रो, यह रोशनी से भरा जागरण है, जो ख्रीस्तीय परंपरा में सबसे पुराना है, जिसे “सभी जागरण की माता” के नाम से जाना जाता है। इसमें हम जीवन के ईश्वर की मृत्यु और पाताल लोक पर जीत को फिर से जीते हैं। हम इसे उस महापर्व के हिस्से के रूप में मनाते हैं, जिसको ईश्वर के दुःखभोग के रहस्यों से गुजरने के बाद मनाया जाता है जो हमारे लिए दुःख सहे, लोगों के द्वारा “तिरस्कृत और तुच्छ समझे गये।” (इसा 53:3)
क्या कोई उदारता का कार्य इससे बड़ा हो सकता है? इससे अधिक बड़ा उपहार? जी उठे प्रभु ही दुनिया के सृष्टिकर्ता हैं, जिन्होंने इतिहास के शुरु में हमें कुछ नहीं से बनाया, उन्होंने ही हमें अपना असीम प्रेम दिखाने के लिए क्रूस पर अपनी जान दे दी।
पहला पाठ हमें दुनिया की सृष्टि की याद दिलाती है। आरम्भ में, ईश्वर ने आकाश और धरती को बनाया (उत्पत्ति 1:1), दुनिया को अराजकता से बाहर निकाला, अव्यवस्था से सामंजस्य लाया और हमें – जो उनकी छवि और प्रतिरूप में बने हैं – इसकी देखभाल करने का काम सौंपा। और जब पाप के कारण मानव उस योजना पर खरी नहीं उतरी, तब भी ईश्वर ने हमें नहीं छोड़ा, बल्कि क्षमाशीलता के द्वारा, और भी विस्मयकारी तरीके से अपना दयालु चेहरा हमें दिखाया।
इस तरह “इस रात का पवित्र रहस्य” उस जगह से जुड़ा है जहाँ मानव का पहली बार पतन हुआ था, जो सदियों से मेल-मिलाप और कृपा के रास्ते के रूप में बना हुआ है।
हमने धर्मग्रंथ से जो सुना है, उसके द्वारा धर्मविधि ने हमें इस यात्रा के कुछ पड़ाव दिखाए हैं। इसने हमें याद दिलाया कि कैसे ईश्वर ने अब्राहम का हाथ रोका था जब वह अपने बेटे इसहाक की बलि देनेवाला था, ताकि हमें दिखा सकें कि वे हमारी मौत नहीं चाहते, बल्कि चाहते हैं कि हम खुद को उनके हाथों में, बचाए गए लोगों के वंश के जीवित सदस्य बनने के लिए समर्पित करें (उत्पति 22:11–12, 15–18)। इसी तरह, धर्मविधि ने हमें यह सोचने के लिए प्रेरित किया है कि कैसे ईश्वर ने मिस्र में गुलामी से इस्राएलियों को मुक्त कराया, और समुद्र – जो मौत की जगह और एक बड़ी रुकावट थी – को मुक्ति का नया जीवन रास्ता बना दिया। यही संदेश नबियों के शब्दों में भी गूंजता है, जिन्होंने ईश्वर की प्रशंसा एक दूल्हे के रूप में की है जो बुलाते और एकत्रित करते हैं (इसा. 54:5–7), एक झरना जो प्यास बुझाता है, पानी जो फल लाता है (इसा. 55:1,10), एक रोशनी जो शांति का रास्ता दिखाती है, आत्मा जो दिल को बदल देती और नया कर देती है। (एजेकिएल 36:26)
मुक्ति इतिहास में इन सभी पलों में, हमने देखा है कि पाप जो बांटता और मारता है उसकी कठोरता का जवाब ईश्वर प्यार की शक्ति से देते हैं, जो जोड़ता और जीवन को वापस लाता है। हमने भजनों और प्रार्थनाओं के साथ जुड़ी कहानी सुनी है, जो हमें याद दिलाती है कि, मसीह के पास्का रहस्य के द्वारा, “हम जो बपतिस्मा में उनके साथ मृत्यु में दफनाये गए थे… जीवन की नई राह पर चल सकें… पाप के लिए मरे हुए और मसीह में ईश्वर के लिए जीवित” (रोमियों 6:4,11); इसलिए हम बपतिस्मा में पिता के प्यार के लिए पवित्र हो जाते हैं, संतों की संगति में एकजुट होते हैं और कृपा से, उनके राज्य को बनाने के लिए जीवित पत्थर बन जाते हैं। (1पतरस 2:4–5)
इस आलोक में, आइए हम जी उठने की घटना पर चिंतन करें, जिसको हमने मती रचित सुसमाचार में सुना। पास्का की सुबह, महिलाएँ अपने दुःख और डर पर काबू पाकर अपनी यात्रा पर निकल पड़ीं। वे येसु की कब्र के पास जाना चाहती थीं। उन्हें उम्मीद थी कि कब्र सील किया हुआ होगा, जिसके दरवाजे पर एक बड़ा पत्थर होगा और सैनिक पहरा दे रहे होंगे।
संत पापा ने कहा, “पाप यही है: एक भारी रुकावट जो हमें बंद कर देती है और हमें ईश्वर से अलग कर देती है, हमारे अंदर आशा के उनके शब्दों को मारने की कोशिश करती है। लेकिन, मरिया मगदलेना और दूसरी मरिया नहीं डरीं। वे कब्र पर गईं और अपने विश्वास एवं प्यार के कारण, पुनरूत्थान की पहली गवाह बनीं। भूकंप में और अलग हटाये गये पत्थर पर बैठे स्वर्गदूत में, उन्होंने ईश्वर के प्यार की ताकत देखी, जो किसी भी बुरी ताकत से ज्यादा ताकतवर थी, जो "नफरत को दूर भगाने" और "शक्तिशालियों को गिराने" में सक्षम थी। मनुष्य शरीर को मार सकता है, लेकिन प्यार के ईश्वर का जीवन हमेशा का जीवन है, जो मौत से भी बढ़कर है और जिसे कोई कब्र कैद नहीं कर सकती। इस तरह क्रूसित येसु ने क्रूस से राज किया, स्वर्गदूत पत्थर पर बैठ गये, और येसु उन्हें जीवित दिखाई दिए, और नमस्कार किया!” (मती. 28:9)
मेरे प्यारे मित्रो, आज दुनिया के लिए हमारा भी यही संदेश है। जिस मुलाकात का साक्ष्य हम देना चाहते हैं – विश्वास के शब्दों और उदारता के कामों से – हम उसे अपने जीवन में “अल्लेलूया” गाकर और अपने हम अपने होठों से कहते हुए कर सकते हैं। (संत अगुस्टीन, प्रवचन 256, 1) जैसे महिलाएँ चेलों को बताने के लिए दौड़ीं, वैसे ही आज हमें भी इस महागिरजाघर से निकलकर सबको यह सुसमाचार देना चाहिए कि येसु जी उठे हैं और उनके साथ जी उठने के बाद, उनकी शक्ति से, हम भी शांति और एकता की एक नई दुनिया को जन्म दे सकते हैं, “बहुत सारे लोग फिर भी […] एक ही व्यक्ति, क्योंकि भले ही बहुत से ख्रीस्तीय हैं, मसीह एक हैं” (संत अगुस्टीन, भजन संहिता पर व्याख्या, 127:3)।
संत पापा ने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, “यहाँ एकत्रित हमारे भाई-बहनें, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं और बपतिस्मा लेनेवाले हैं, इस मिशन के लिए खुद को समर्पित करेंगे। नवदीक्षार्थी के रूप में एक लंबी यात्रा के बाद, आज वे मसीह में एक नये प्राणी बनने के लिए दोबारा जन्म ले रहे हैं (2 कोर 5:17) और सुसमाचार के गवाह बन रहे हैं। उनके लिए, और हम सभी के लिए, आइए हम वही दोहराएं जो संत ऑगस्टीन ने अपने समय के ख्रीस्तीयों से कहा था: “मसीह का प्रचार करें, बोयें…, अपने हृदय में जो ग्रहण किये हैं उसे हर जगह फैलायें।” (संत अगुस्टीन उपदेश116, 23–24)
बहनो और भाइयो, आज भी कब्रें खोली जा सकती हैं, और अक्सर उन्हें सील करनेवाले पत्थर को लुढ़काये दा सकते हैं, जो इतने भारी और इतने करीब से रखे होते हैं कि हिलने लायक नहीं लगते। कुछ इंसान के दिल पर भारी पड़ते हैं, जैसे अविश्वास, डर, स्वार्थ और गुस्सा; और कुछ दूसरे, इन अंदरूनी संघर्षों से पैदा होकर, युद्ध, अन्याय और लोगों एवं देशों के अकेलेपन के जरिए हमारे बीच के रिश्तों को तोड़ देते हैं। आइए, हम खुद को इनसे पंगु न होने दें! सदियों से, कई पुरुषों और महिलाओं ने, ईश्वर की मदद से, उन्हें दूर किया है - शायद बड़ी कोशिश से, कभी-कभी अपनी जान की कीमत पर - लेकिन अच्छे फलों के साथ, जिनका लाभ हम आज उठाते हैं। वे ऐसे लोग नहीं हैं जिन्हें पाया नहीं जा सकता, बल्कि हमारे जैसे लोग हैं, जो जी उठे प्रभु की कृपा से, प्यार और सच्चाई से मजबूत हुए, जैसा कि प्रेरित पेत्रुस कहते हैं, "ईश्वर के शब्द" (1 पेत्रुस 4:11) बोलने की हिम्मत रखते थे और "ईश्वर से मिलनेवाली ताकत से काम करते थे, ताकि ईश्वर की महिमा हो।" आइए हम उनके उदाहरण से प्रेरणा लें, और इस पवित्र रात को उनके समर्पण को अपना बनाएँ, ताकि पास्का के वरदान, मेल-मिलाप और शांति, दुनियाभर में हर जगह और हमेशा बढ़ें और फलें-फूलें।
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