संत पापा लियोः पुरानी यादों और शत्रुओं से सुलाह करें

संत पापा लियो ने अल्जीरिया की प्रेरितिक यात्रा के दौरा वहाँ के राष्ट्रपति और देश का राजनायिकों से भेंट की और उन्हें अपने संदेश में, पुरानी यादों की चंगाई और शत्रुओं से सुलाह करते हुए, मरूभूमि और मरूधानों को शांति का स्थल बनाने का आहृवान किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने अफ्रीका की अपनी प्रेरितिक यात्रा के पहले पड़ाव पर अल्जीरिया के राष्ट्रपति और राजनायिकों से भेंट की।

संत पापा ने गर्मजोशी स्वागत हेतु अल्जीरिया का राष्ट्रपति और राजनायिकों के प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कहा कि आपके निमंत्रण हेतु धन्यवाद। “संत अगुस्टीन के आध्यात्मिक पुत्र स्वरूप मैंने पहले ही दो बार सन् 2001 और 2013 में आन्नबा की भेंट की। संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी स्वरुप मैं ईश्वर की दिव्य योजना के लिए कृतज्ञता के भाव व्यक्त करता हूँ जिसकी बदौलत मैं पुनः यहाँ आता हूँ।” संत पापा ने अफ्रीकी देशों की अपनी प्रेरितिक यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैं यहाँ शांति के एक तीर्थयात्री की भांति आता हूँ जिससे मैं कुलीन अल्जीरियाई लोगों से मिल सकूँ। “हम सब भाई-बहनें हैं, क्योंकि हमारा एक ही स्वर्गीय पिता है।” अल्जीरियाई लोगों की गहरी धार्मिक भावना अपनी मिलन और क्षमा की संस्कृति को बढ़ावा देती है, मेरी यह यात्रा उसकी एक निशानी बनने की चाह रखती है। झगड़ों और गलतफहमियों से भरी दुनिया में, आइए हम मिलें और आपसी समझ स्थापित करने की कोशिश करें, इस बात को याद करते हुए कि हम एक परिवार हैं। आज, जागरूकता की यह सरलता ही हमारे लिए वह चाभी है जो कई बंद दरवाज़ों को खोलती है।

आल्जीरियाई लोग अजेय  

संत पापा ने कहा, प्रिय भाई और बहनों, मैं आप के मध्य शांति और आशा के एक साक्ष्य स्वरूप आता हूँ जिसकी  अति जरुरत आज दुनिया को है, जिसकी चाह आप सदैव रखते हैं। “वास्तव में, आप मुश्किलों से कभी हारे नहीं हैं क्योंकि आप में एकता, आतिथ्य और भाईचारे की भावना भरी हुई है, जो लाखों सीधे-सादे और ईमानदार लोगों की दिनचर्या का ताना-बाना है।” आप सचमुच अपने में मजबूत हैं, आप पर भविष्य निर्भर करता है- आप अपनी शक्ति या धन से चकाचौंध होने नहीं देते और न ही व्यक्तिगत या सामूहिक लाभ के लिए अपने सह-नागरिकों की गरिमा का परित्याग करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में मैंने बहुत से लोगों द्वारा यह सुना है कि आल्जीरियाई लोग अपने पड़ोसियों और अपरिचतों के संबंध में अपनी बड़ी उदारता प्रदर्शित करते हैं। यह मनोभाव अरब और बर्बर समुदायों में व्याप्त गहरे आतिथ्य को व्यक्त करता है, एक पवित्र कर्म जिसे हम हर समाज में मूलभूत आधारशिला स्वरुप देखना चाहेंगे। इसी तरह, दान देना (सदका) आपके बीच एक सामान्य और स्वाभाविक परंपरा है, यहाँ तक कि वे भी जिनके पास सीमित साधन हैं। सदका शब्द का अर्थ न्याय भी हो सकता है, इस मायने में कि हम चीज़ों को अपने लिए नहीं रखते, बल्कि न्याय के तौर पर हमारे पास जो है उसे दूसरों के संग साझा करते हैं। संत पापा ने कहा कि जो धन इकट्ठा करता है और दूसरों के प्रति बेफ्रिक रहता है, वह अन्यायी है। न्याय का यह मनोभाव सरल और मूलभूत दोनों है क्योंकि यह दूसरों में ईश्वर की छवि को पहचानता है। वास्तव में, करूणा के बिना वाला धर्म और बिना एकजुटता वाला समाज ईश्वर की निगाहों में अपमानित है। फिर भी कई समाज जो खुद को विकसित समझते हैं, वे असमानता और बहिष्कार के गर्त में डूबते जा रहे हैं। अफ्रीका इस बात को अच्छी तरह जानता है कि जो लोग और संगठन दूसरों पर हावी होते हैं, वे दुनिया को नष्ट करते हैं,  जिसे सर्वोच्च ईश्वर ने इसलिए बनाया है ताकि हम साथ रह सकें।

संत पापा लियो और आल्जीरिया के राष्ट्रपति
संत पापा लियो और आल्जीरिया के राष्ट्रपति   (ANSA)

इतिहास के नायक

संत पापा ने कहा कि इतिहास की कठिन अनुभूतियों ने आप के देश को वैश्विक स्तर पर शक्ति को संतुलन में रखने हेतु मदद करता है। यदि सबों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर आप वार्ता करने के योग्य होते और दूर-सुदूर देशों की मुसीबतों में एकता दिखाते हैं, तो आप लोगों के बीच न्याय स्थापित करने में योगदान दे पाएंगे। हरएक का सम्मान और दूसरों के दर्द में शामिल होकर, नसमझी और संघर्षों को बढ़ावा न देना, आप को इतिहास में एक नए अध्याय शुरू करते हुए नायक बनने में मदद करेगा। आज, अंतरराष्ट्रीय कानून के लगातार उल्लंघन और नये उपनिवेश की प्रक्रिया में यह हमारे लिए पहले से कहीं अधिक जरूरी है। 

वर्तमान समय की माँग

अपने पूर्वर्ती परमाधिकारियों के विचारों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए संत पापा लियो ने कहा कि संत पापा बेनेडिक्ट 16वें ने कहा था कि “वैश्विकरण की प्रक्रिया को, अगर सही तरीके से समझा और दिशा-निर्देशित किया जाये, तो दुनिया भर में बड़े पैमाने पर संपत्ति के वितरण की ऐसी संभावना खुलती है जो पहले कभी नहीं हुई, लेकिन अगर उन्हें गलत तरीके से निर्देशित किया जाये, तो ये गरीबी और असमानता को बढ़ा सकते हैं, और यह वैश्विक संकट भी उत्पन्न कर सकता है।” (करितास इन भेरिताते 42) वहीं संत पापा फ्रांसिस ने विश्व में व्याप्त तनाव के अनुभव के आधार पर इस बात पर जोर देते हुए लिखा,“ज़रूरी है सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी की एक ऐसे शैली, ‘जिसमें लोकप्रिय आंदोलन और स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशन के संरचना शामिल हो, जो विकास हेतु बहिष्कृत किये गये लोगों को शामिल करने की मजबूत नैतिकता से उत्पन्न होती हो।” (फ्रत्तेल्ली तूत्ती.169)

संत पापा लियो का स्वागत
संत पापा लियो का स्वागत

युवाओं को स्थान

इस संदर्भ में संत पापा लियो ने देश के राजनायिकों से आग्रह किया कि वे एक सजीव, क्रियाशील, और स्वतंत्र नागर समाज की परिकल्पना करने में भयभीत न हों, जिसमें खासकर युवाओं को एक विशेष स्थान दिया जाता हो। “किसी देश की असली ताकत सबके सहयोग से जन सामान्य की भलाई हेतु कार्य करने में होती है। अधिकारी अपने में हावी न हों, बल्कि लोगों की सेवा और उनके विकास को बढ़ावा देते हुए कार्य करें।” इस भांति राजनीतिक क्रियाकलाप का रास्ता न्याय की स्थापना में है, जिसके बिना सच्ची शांति नहीं हो सकती, यह सभी के लिए सही और सम्मानजनक स्थिति को बढ़ावा देने में प्रकट होती है। काथलिक कलीसिया भी, अपने समुदायों और प्रयासों के माध्यम अल्जीरिया की आम भलाई में योगदान देना चाहती है।

संत पापा लियोः अल्जीरियाई राजनायिकों को संबोधन

भौगोलिक और आध्यात्मिक परिस्थितियाँ

एक तरफ भूमाध्यसागर और दूसरी तरफ सहारा हमारे लिए भौगोलिक और आध्यात्मिक परिस्थिति के महत्वपूर्ण चौराहे हैं। अगर हम इतिहास में झांक कर देखें, तो हमें वहाँ इंसानियत के बहुत सारे खजाने छिपे मिलेंगे। क्योंकि समुद्र और रेगिस्तान हज़ारों सालों से लोगों और संस्कृतियों के बीच आपसी मिलन के समृद्ध स्थल रहे हैं। यदि हम उन्हें कब्रिस्तान में बदल दें जहाँ उम्मीद भी खत्म हो जाती है तो हम पर लानत है। संत पापा ने कहा कि आइए हम इतिहास और भविष्य के इन बड़े भंडारों को बुराई से मुक्त करें। आइए हम शांति के मरुस्थल बनाएं, निराशा के कारणों का खंडन करें और उन्हें दूर करें, आइए हम उनका विरोध करें जो दूसरों की बदकिस्मती से लाभ उठाते हैं। इंसानी ज़िंदगी का फ़ायदा उठाना, अपने में गैर-कानूनी है, क्योंकि मानवीय सम्मान अनुल्लंघनीय है। हम अपनी आध्यात्मिक शक्ति, प्रज्ञा और संसाधनों को संग्रहित करें ताकि ज़मीन और समुद्र ज़िंदगी, मुलाकात और आश्चर्य के स्थल बनें। उनकी शानदार खूबसूरती हमारे हृदयों को स्पर्श करे, उनका अद्वितीय विस्तार हमें दिव्यता के चिंतन में मदद करें। सब फैलाव हमें ऊपर उठने के बारे में सोचने हेतु मदद करे। भूमध्यसागर, सहारा और उनके ऊपर का विशाल आसमान हमें सचमुच गुप्त रूप में ईश्वर की महानता का जिक्र करते हैं जिसके रहस्यमयी मौजूदगी में सारी चीजें बनी रहती हैं।

संत पापा का अल्जीरिया में स्वागत
संत पापा का अल्जीरिया में स्वागत   (ANSA)

जिंदगी का तनाव

इस असलियत को समझना हमारे लिए बहुत प्रभावकारी होता है, फिर भी आज बहुत से लोग इसकी अहमियत को कम आंकते हैं। करीब से देखने पर, अल्जीरियाई समाज भी धार्मिक समझ और आज की ज़िंदगी को हम तनाव से ग्रस्ति पाते हैं। हम यहाँ, विश्वस के अन्य स्थानों की तरह  कट्टरपंथ और दुनियादारी की चीजों को देख सकते हैं, जहाँ बहुत से लोग ईश्वर और सभी जीवों के सम्मान की असल समझ को खो देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि धार्मिक निशानी और शब्द, हिंसा और ज़ुल्म ईशनिंदा की भाषा बन सकते हैं, या दूसरी तरफ, भौतिकता के बड़े बाज़ार में खोखली निशानियाँ हमें खुश नहीं करती हैं।

सुलाह करें

लेकिन, संत पापा ने कहा ये सारी चीजें हमें निराश न करें। “हमें इनका सामना समझदारी से करना होगा। ये इस बात के संकेत हैं कि हम एक बहुत बड़े बदलाव के समय में जी रहे हैं,  जो लोग अपने दिलों को स्वतंत्र रखते, और अपनी अंतरात्मा के प्रति चेतना में जीते हैं, वे बृहृद आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं से दुनिया को देखने और जीवन के लक्ष्य को समझते हैं। हमें लोगों को तर्कपूर्ण विचारने और स्वतंत्र होने, सुनने और वार्ता करने और उस भरोसे के बारे में सिखाना होगा जो हमें दूसरों को पहचानने में मदद करता है जो हमारे लिए जोखिम नहीं बल्कि मित्रवत हैं। हमें पुरानी यादों  की चंगाई और पुराने दुश्मनों के बीच सुलह की दिशा में काम करने की जरूरत है। यही वह तोहफ़ा है जिसे मैं आपके लिए, अल्जीरिया के लिए, और उसके सभी लोगों के लिए देना चाहता हूँ, जिन के ऊपर मैं सर्वोच्च ईश्वर के आशीर्वाद कामना करता हूँ। 

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

13 अप्रैल 2026, 16:25