संत पापा लियोः अपनी विरासत को बनाये रखें
वाटिकन सिटी
संत पापा लियो ने अफ्रीकी देशों की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन अल्जीरिया के संत अगुस्टीन महागिरजाघर में यूख्रारीस्तीय बलिदान अर्पित किया।
अपने प्रवचन में संत लियो ने कहा कि दिव्य वचन इतिहास में व्याप्त है और ईश्वर की आवाज मानव द्वारा नवीन बनाता है। प्राचीन शहर हिप्पो के धर्माध्यक्ष, संत अगुस्टीन के महागिरजाघर, अन्नबा में हम ईश्वर के सुसमाचार को सुनते हैं। सदियों से, स्थानों के नाम जो हमारा स्वागत करते हैं, परिवर्तन हुए हैं, लेकिन संतगण निरंतर संरक्षकों की भांति और विश्वासी साक्ष्य के रुप में हमारे लिए एक उस भूमि से जुड़े हैं जो स्वर्ग से आती है। ईश्वर इसी विशेष आयाम को रात्रि पहर में निकोदेमुस के लिए प्रकट करते हैं, यह वह ताकत है जिसके द्वारा मसीह उसके कमजोर विश्वास और उसकी खोज को सुदृढ़ करते हैं।
ऊपर से जन्म लें
ईश्वर के आत्मा से प्रेषित, “जिसे हम नहीं जानते कि वह कहाँ से आता या किधर जाता है” (यो. 3.8) येसु निकोदेमुस के लिए एक विशेष अतिथि हैं। वास्तव में, वे उसे एक नये जीवन के लिए बुलाते हैं, अपने वार्ताकार को – और हमें भी – वे एक हैरान करने वाला कार्य सौंपते हैं: “तुम्हें ऊपर से जन्म लेने की आवश्यकता है।” यह उस हर नर और नारी के लिए निमंत्रण है जो मुक्ति की खोज करते हैं। येसु का निमंत्रण पूरी कलीसिया के लिए प्रेरिताई बनती है और इसके साथ अल्जीरिया के ख्रीस्तीय समुदाय के लिए भी, जिससे हम ऊपर से अर्थात ईश्वर से जन्म लें। इस परिदृश्य में, विश्वास हमारी पृथ्वी की मुसीबतों में विजय होती और ईश्वर की कृपा मरूभूमि को फलहित करती है। इसके साथ यह उद्घोषणा हमारे लिए एक चुनौती लाती है, जिसे सुसमाचार हमें मिल कर सामना करने का आहृवान करता है।
स्वतंत्रता का उपहार
वास्तव में, ख्रीस्त के वचनों में आज्ञा की शक्ति है- तुम्हें पुनः ऊपर से जन्म लेने की आवश्यकता है। यह आदेश हमारे कानों में इस भांति गूंजता है मानो यह असंभव हो। यद्यपि, जब हम आज्ञा देने वाले को ध्यान से सुनते, तो हम यह समझते हैं कि यह न तो कोई कठोर भार है और न ही कोई बाधा, और उससे भी बढ़कर न ही असफलता की कोई एक सजा। इसके विपरीत, यह कार्य हमारे लिए स्वतंत्रता का एक उपहार है क्योंकि यह हमारे लिए एक अप्रत्याशित संभावना को व्यक्त करता है- हम ऊपर से नये रुप में जन्म ले सकते हैं, इसके लिए हम ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। हम ऐसा उनके प्रेममय योजना के अनुरूप करते हैं, ईश्वर हमें मानवता की नवीनता हेतु एकतामय जीवन का निमंत्रण देते हैं जिसकी शुरूआत विश्वास से होती है। ईश्वर जब हमें पूरी तरह से नवीनता हेतु बुलाये हैं तो वे इसके लिए हमें अपनी शक्ति से भर देते हैं। संत अगुस्टीन इसे अपनी प्रार्थना में भली भांति प्रकट करते हैं, “हे प्रभु, मुझे आज्ञा दे और वह आज्ञा जिसकी चाह तू करता है।”
नये जीवन की शुरुआत
संत पापा लियो ने कहा कि इस भांति जब हम अपने में यह पूछते हैं कि भविष्य में न्याय, शांति, एकता और मुक्ति कैसे संभव है, तो हम भी ईश्वर से वही सवाल करते हैं जिसे निकोदेमुस ने किया- क्या हमारा इतिहास सचमुच में बदल सकता है? हम अपनी समस्याओं, कठिनाइयों और मुसीबतों से दबे हैं। क्या हम सचमुच में पुनः अपने जीवन की शुरूआत कर सकते हैं। ईश्वर का उत्तर हाँ है जो प्रेम में, हमारे हृदयों को आशा से भर देते हैं। हम अपने जीवन में बोझ, दर्द या पाप से कितने भी दबे क्यों न हों- क्रूसित येसु हमारे सभी बोझों को हमारे संग और हमारे लिए ढ़ोते हैं। चाहे हम अपनी कमजोरियों के कारण कितने भी निराश क्यों न हों- ऐसी परिस्थिति में ईश्वर हमारे लिए अपनी शक्ति को प्रकट करते हैं, ईश्वर जिन्होंने येसु को मृतकों में से जीवित किया जिससे वे दुनिया को जीवन दे सकें। हम से हर कोई नये जीवन की स्वतंत्रता का अनुभव कर सकता है जो हमारे लिए मुक्तिदाता में विश्वास से आता है। पुनः एक बार संत अगुस्टीन हमें इसका उदाहरण देते हैं- हम उनकी प्रज्ञा से अधिक उनके परिवर्तन के लिए उनकी आराधना करते हैं। इस पुनर्जन्म में, हम उनकी माता, संत मोनिका को आंसूओं में पाते हैं-“मेरा कोई अस्तित्व नहीं रहा, मैं कहीं का न रहता, हे मेरे ईश्वर, यदि तू मुझ में निवास नहीं करता। या क्या मैं यह न कहूँ कि तेरे बिना मेरा कोई अस्तित्व नहीं है।”
ख्रीस्तीयों का जन्म
संत पापा लियो ने कहा कि ख्रीस्तीयों का जन्म सचमुच में ऊपर से होता है, जहाँ हम उन्हें ईश्वर के द्वारा येसु ख्रीस्त में उनके भाई-बहनों के रूप में बनाये गये पाते हैं, और कलीसिया जो संस्कारों के माध्यम से उनका पोषण करती है, सारी प्रजा के लिए आलिंगन का स्थल है। जैसे कि हमने सुना है, प्रेरित चरित इसका साक्ष्य देता है जहाँ हम मानवता की विशेषताओं को पाते हैं जब वे पवित्र आत्मा द्वारा नवीन किये जाते हैं। आज भी, हम इस प्रेरितिक नियम का आलिंगन और इसका अभ्यास करें, हम इसे कलीसिया में सच्चे परिवर्तन के मापदंड स्वरूप चिंतन करें- एक परिवर्तन की शुरूआत हृदय से होनी चाहिए, यदि यह सच्चा होने की चाह रखता, और यदि यह प्रभावकारी होना चाहता तो उसे हर किसी को अपने में सम्माहित करने की जरूरत है। इस संदर्भ में संत पापा लियो ने तीन मुख्य विन्दुओं का जिक्र किया।
पहला, विश्वासियों का समुदाय एक हृदय और एक आत्मा का था” (32)। यहाँ हम हृदयों के मेल को पाते हैं जो एक जैसा धड़कता है क्योंकि वे ख्रीस्त के हृदय से संयुक्त हैं। प्रथम कलीसिया, इस भांति सामाजिक संबंधों से जुड़ी नहीं थी, लेकिन वह विश्वास की एकता, प्रेम, विचारों और जीवन के निर्णयों में ईश्वर के प्रेम से संयुक्त थी जो पृथ्वी में मानव जाति को बचाने हेतु मानव बनें।
दूसरा, संत पापा ने कहा कि आइए हम विश्वासियों के बीच आध्यात्मिक एकता के ठोस प्रभाव की चर्चा करें। “सारी चीजें सबों का था (32) हर किसी का हर कुछ था, जहाँ वे एक शरीर के रूप में सारी चीजों का उपयोग करते थे। कोई किसी भी चीज से वंचित नहीं था, क्योंकि हर कोई अपने पास जो था उसे दूसरों के संग साझा करता था। चूंकि चीजों का होना उपहार के रूप में बदल सकता है, यह भातृत्व समर्पण एक आदर्श को घोषित नहीं करता है। सिर्फ़ एक-दूसरे के विरूद्ध बँटे हृदय और लोभ में डूबी आत्माएँ ही ऐसा मानती हैं।
कलीसिया का जन्म निरंतर
इसके विपरीत, एक ईश्वर में विश्वास, स्वर्ग और पृथ्वी के ईश्वर, लोगों को एक पूर्ण न्याय में पिरोते हैं, जो हर किसी से प्रेमपूर्ण कार्य की मांग करता है- अर्थात हर प्राणी को प्रेम करना जिससे ईश्वर हमें ख्रीस्त में प्रदान करते हैं। अतः दरिद्रता और प्रताड़ना के मध्य हम ख्रीस्तीयों के लिए प्रेम के सिद्धांत को पाते हैं, हम इसे अपने पड़ोसियों के लिए करें, जैसा कि हम उन्हें अपने लिए करने की चाह रखते हैं। इस नियम से प्रेरित, जो ईश्वर के द्वारा हमारे हृदयों में अंकित है, कलीसिया को हम निरंतर जन्म लेता हुआ पाते हैं,क्योंकि जहाँ निराश है वहाँ वह आशा जगाती है, दैयनीय स्थिति में वह सम्मान उत्पन्न करती है, और जहाँ संघर्ष है वहाँ वह मेल-मिलाप को लाती है।
जीवन में नवीनता लायें
तीसरा, प्रेरित चरित के पद हमारे लिए इस नये जीवन की नींव को व्यक्त करते हैं जो हर भाषा और संस्कृति के लोगों का आलिंगन करती है। शिष्यों ने उत्साह में पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त का साक्ष्य दिया और सभों में उत्साह था।(33) प्रेम जो उन्हें प्रेरित करता है वह एक नौतिक समर्पण से बढ़ कर है, यह मुक्ति की एक निशानी है- प्रेरित इस बात की घोषणा करते हैं कि हमारा जीवन बदल सकता है क्योंकि ख्रीस्त मृतकों में से जी उठे हैं। प्रेरितों का इस भांति प्रथम कार्य एक हृदय और एक आत्मा से लोगों के समक्ष ईश्वर का साक्ष्य देना है, यह हमें भय के मारे विचलित न करें, न हम अपने में तोलमोल करें। संत पापा ने धर्माध्यक्षों और पुरोहितों को अपने कार्य में नवीनता लाने का आहृवान किया जिसे सेवा के द्वारा पूरी कलीसिया नये जीवन का एक साक्ष्य लोगों के लिए दे सकें।
अपनी विरासत बनाये रखें
संत पापा ने अल्जीरिया के ख्रीस्तीयों से कहा कि अपनी भूमि में आप ख्रीस्त ने प्रेम की नम्र और विश्वासनीय निशानी बने रहें। सुसमाचार का साक्ष्य अपने छोटे कार्यों में दें, सच्चे संबंधों और दिनचर्या की वार्ता में- इस भांति, आप अपने निवास स्थलों में स्वाद और ज्योति जलायेंगे। इस देश में आप की उपस्थिति धूवन की तरह है-एक बढ़ते हुए अनाज की भांति जो खुशबू बिखेरती है क्योंकि इसके द्वारा ईश्वर की महिमा होती और बहुत से भाई-बहनों को खुशी और सांत्वना प्राप्त होता है। यह धूवन अपने में छोटा है, कीमती है जो किसी का ध्यान आकर्षित नहीं करता लेकिन हमारे हृदयों को ईश्वर की ओर लाता है, यह एक दूसरे को वर्तमान समय की कठिनाइयों में अडिग बन रहने को प्रोत्साहित करता है। हमारे दिलों की गहराई से तारीफ़, दुआ और विनय निकले, जिसके द्वारा करूणा, दान और क्षमा की मीठी खुशबू फैलती है (ऐफि. 5:2)। आपकी कहानी उदार आतिथ्य और मुश्किल समय में हिम्मत दिखाने की है। यहाँ शहीदों ने प्रार्थना की; यहाँ संत अगुस्टीन ने अपने झुंड से प्रेम किया, सच्चाई की तलाश की और पक्के विश्वास के साथ मसीह की सेवा की। आप इस परंपरा के वारिस बनें, भातृत्व में करूणा के माध्यम ऊपर से जन्मे लोगों की तरह स्वतंत्रता की गवाही दें, जो दुनिया के लिए मुक्ति की उम्मीद है।
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here
