संत पापा लियो 14वें स्वर्गीय रानी प्रार्थना में संत पापा लियो 14वें स्वर्गीय रानी प्रार्थना में  (ANSA)

संत पापा लियोः स्वर्गारोहण ईश्वर पिता से मिलन

संत पापा लियो ने येसु के स्वर्गारोहण पर्व के अवसर पर स्वर्गीय रानी प्रार्थना का पाठ किया और तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को स्वर्ग की ओर आरोहित किये जाने पर विचार करने का आहृवान किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने, 17 मई को स्वर्गारोहण महापर्व के अवसर पर येसु के आरोहित किये जाने के रहस्य पर चिंतन करते हुए सच्ची, अच्छी प्रेमपूर्ण बातों के अनुरूप जीवनयापन करने का संदेश दिया।

संत पापा ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रागँण में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात और सुस्वागतम्।

आज विश्व के विभिन्न देशों में येसु के स्वर्गारोहण का महोत्सव मनाया जा रहा है।

येसु का पृथ्वी से स्वर्ग की ओर आरोहित किये जाने का स्वरूप जैसे कि धर्मग्रथ इसके बारे में जिक्र करता है- इस रहस्य को हम अपने लिए अतीत की एक सुदूर घटना स्वरुप प्रस्तुत पाते हैं। यद्यपि यह ऐसा नहीं है, क्योंकि हम येसु में एक शरीर स्वरूप संयुक्त हैं जो हमारे लिए एक सिर की भांति हैं। स्वर्ग में आरोहित किये जाने के द्वारा, वे हमें अपने पिता के संग परिपूर्ण एकता में बने रहने की ओर ध्यान आकर्षित कराते हैं। इस सदंर्भ में संत अगुस्टीन कहते हैं- “प्रधान का आगे जाना सदस्यों के लिए आशा है।”

स्वर्गारोहण का रहस्य

संत पापा लियो ने कहा, वास्तव में, ख्रीस्त का सम्पूर्ण जीवन आरोहित होने की गतिविधि को व्यक्त करता है। वे अपनी मानवता में, वे पूरे विश्व का आलिंगन करते और अपने को उसके संग संयुक्त करते हुए, मानव को पापमय स्थिति से ऊपर उठाते और मुक्ति प्रदान करते हैं। इस भांति वे ज्योति, क्षमा और आशा को वहाँ लाते हैं, जहाँ पहले अँधकार, अन्याय और निराशा थी, जिससे नर और नारियाँ निश्चित रुप से पास्का विजय को प्राप्त कर सकें, जिसमें ईश्वर का पुत्र, मृत्यु के द्वारा “हमारी मृत्यु को खत्म करते और पुनर्जीवित होने के द्वारा हमें पुनः जीवन प्रदान करते हैं।

सजीव संबंध

इस तरह, स्वर्गारोहण, हमारे लिए सुदूर एक प्रतिज्ञा के बारे में नहीं कहता है बल्कि यह हमारे लिए एक सजीव संबंध है, जो हमें भी स्वर्गीय महिमा की ओर लेकर आता है, जहाँ हम अपने जीवन की क्षितिज से ऊपर उठते और उसे विस्तृत होता पाते हैं, इसके साथ ही हम अपने विचार, अनुभव और कार्य करने के तरीकों को पहले से ही ईश्वर के हृदय के अति निकट पाते हैं।

संत पापा लियो ने कहा कि इससे भी बढ़कर, इस आरोहण के मार्ग में, हम मार्ग को पहचानते हैं। वास्तव में, हम इसे येसु में पाते हैं- उनके जीवन के उपहार में, उनके उदाहरण और उनकी शिक्षाओं में। हम इसे धन्य कुंवारी मरियम और संतों में भी चिन्हित पाते हैंः जिन्हें कलीसिया हमारे लिए वैश्विक आर्दश निशानियों के रूप में प्रदान करती है। संत पापा फ्रांसिस ने भी उन्हें हमारे लिए “पास के” संतों स्वरूप घोषित करना पंसद किया, जिनके संग हम अपने रोज दिन के जीवन को जीते हैं-माता-पिता, दादा-दादी, हर उम्र के लोग और उनकी परिस्थिति, जो खुशी और निष्ठा में, सुसमाचार को ईमानदारी पूर्वक जीने की कोशिश करते हैं।

सच्ची, अच्छी और प्रेमपूर्ण बातें

संत पापा लियो ने कहा कि उनके संग, उनकी सहायता के द्वारा, और हम उनकी प्रार्थना के प्रति कृतज्ञ के भाव व्यक्त करते हैं, जो हमें भी दिन-ब-दिन स्वर्ग की ओर आरोहित होने की शिक्षा देते हैं। जैसे कि संत पौलुस कहते हैं, हमें उन सच्ची, अच्छी और प्रेमपूर्ण बातों पर ध्यान देने की जरुरत है, और ईश्वर की सहायता से, उन सारी चीजों का अभ्यास करना, जिन्हें हमने “देखा और सुना” है। इस भांति, दिव्य जीवन जिसे हमने बपतिस्मा में प्राप्त किया है और जो हमें ऊंचाई, पिता की ओर आकर्षित करता है, हममें और हमारे इर्दगिर्द विकसित हो सके, जिससे एकता और शांति के मूल्यवान फलों का प्रसार विश्व में हो।

मरियम, स्वर्ग की रानी, जो हमें हर क्षण प्रज्वलित और दिशा-निर्देशित करती हैं, हमारे मार्ग में हमारी सहायता करें।

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18 मई 2026, 11:24