संत पापा का इतालवी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन को संबोधन संत पापा का इतालवी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन को संबोधन  (ANSA)

संत पापा लियोः कलीसिया का जन्म विश्वास से होता है

संत पापा लियो ने इतालावी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की 82वीं आमसभा को संबोधित करते हुए उन्हें सुसमाचार प्रचार हेतु अपने में साहस उत्पन्न करने का आहृवान किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए इटली धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सदस्यों से कहा कि हृदय अपने दैनिक जीवन में विश्वास की सरलता में ईश्वर की खोज करती है।

संत पापा ने अपने इस अनुभव को, हाल ही में पोम्पेई, नेपल्स और अचेरा की अपनी यात्राओं के संग संयुक्त करते हुए कहा, “कई निशानियाँ हमें थकान, बिखराव और अकेलेपन की ओर इशारा करती हैं। कभी-कभी हम इसे अपने समुदाय के विश्वास में एक तनाव की भांति पाते हैं, जहाँ हम नई पीढ़ियों को जोड़ने में कठिनाई का अनुभव करते हैं।” इस संदर्भ में सुसमाचार हमें हिला कर रख देता है, जब भीड़ को देखते हुए येसु उसे समस्या की भांति नहीं अपितु फसल की तरह लेते हैं, “फसल तो बहुत है, पर मज़दूर थोड़े। इसलिए फसल के स्वामी से प्रार्थना करो कि वह अपनी फसल काटने के लिए मज़दूर भेजे।” (लूका 10:2)।

ईश्वर की उदारता

संत पापा लियो ने कहा कि एक बोने वाले के रूप में ईश्वर अपनी उदारता में हमारे दिलों में अनंत जीवन, मुक्ति की चाह के बीज बोते हैं जो हमें स्वतंत्र करती है। इस संदर्भ में संत पापा ने ईश्वर के मनोभावओं को धारण करने का आहृवान किया। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ़ कठोर ज़मीन के बारे में शिकायत न करें और न ही सिर्फ़ आंकड़ों पर ध्यान दें, बल्कि हम जी उठे ईश्वर की निगाहों से उस फसल को देखें जिसे ईश्वर स्वयं हमारे लिए तैयार करते हैं।”

संत पापा का इतावली धर्माध्यक्षीय सम्मेलन को संबोधन
संत पापा का इतावली धर्माध्यक्षीय सम्मेलन को संबोधन   (ANSA)

विश्वास का जन्म सुसमाचार से

संत पापा ने पवित्र आत्मा में हृदयों को प्रज्वलित किये जाने का कामना करते हुए एभेन्जेली न्युतेंदी और एभेन्जेली गौदियुम की ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने कहा, “सुसमाचार से हमारे लिए विश्वास का जन्म होता है, जहाँ हम ख्रीस्त से भेंट करते हैं, जो मृतकों में जी उठकर आज भी कलीसिया में उपस्थित हैं।” सुसमाचार को केन्द्र बिन्दु में लाना हम धर्माध्यक्षों के लिए उत्साह का कारण बनता है जो हमें जीवन में आगे बढ़ने को प्रेरित करता है।

चुनौतियाँ

संत पापा ने चरवाहों के लिए चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा, “हमें खुद से यह पूछें- हम सुसमाचार प्रचार, धर्मशिक्षा, पूजन-विधि, करूणों के कार्यों और अपने सामुदायिक जीवन में ईश्वर के किस चेहरे को किस तरह चमकने देते हैं? हम ख्रीस्त से मिलने को कैसे बढ़ावा देते, और आज के संद्रर्भ में दूसरों को ख्रीस्तीय जीवन में शामिल करने का क्या अर्थ है?”

संत पापा सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष संग
संत पापा सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष संग   (ANSA)

संत पापा लियो ने कहा कि अतः ख्रीस्तीय जीवन की पहल करना सिर्फ संस्कारों के लिए तैयार करना नहीं है बल्कि यह “गर्भ” की भांति है जहाँ समुदाय वे विश्वास उत्पन्न होता है जो विश्वासियों को ईश्वर से मिलन उनके पास्का, अनंत जीवन की ओर अग्रसर करता है। अतः यह बपतिस्मा को हमारे जीवन के अस्तित्व की सत्यता स्वरूप पुनः खोजना है। “यह हमें कलीसिया की प्रेरिताई में आत्मा के उपहारों संग येसु ख्रीस्त के संग चलने के योग्य बनाता है।”

संत पापा लियो ने इस भांति धर्माध्यक्षों को इस बात की चुनौती दी कि वे अपने समुदायों को सजीव और स्वागत करने, प्रार्थनामय ढ़ंग से सुनने, यूख्रारीस्तीय को जीवन का केन्द्र बनाने जहाँ गरीब की सेवा बाह्य रूप में केवल नहीं की जाती बल्कि वे हमारे भाई-बहने बनते हैं जिसके द्वारा ईश्वर हमसे बातें करते हैं, जहाँ हम युवाओं की आवाज को सुनते और उनके जीवन की कहानियों से अपने को वाकिफ करते हैं, जहाँ परिवारों को घायल नहीं छोड़ा जाता है बल्कि उन्हें नम्रता में ईश्वर के सम्मुख लाया जाता है, जहाँ विश्वास सामाज, राजनीति और संस्कृति के लिए एक प्रभावकारी निष्ठा बनती है।

सुनने की माँग

संत पापा ने कलीसिया में चरवाहों की बुलाहट के सार की याद दिलाते हुए धर्माध्यक्षों से कहा कि यही कारण है हम धर्माध्यक्षों को गहराई से सुनने के लिए- ईश्वर के वचन को सुनने, ईश प्रजा को सुनने और समय के संकेतों को सुनने, अपनी प्रेरिताई में मिलने वाली चुनौती भरे कार्यों को सुनने हेतु बुलाया गया है। “जहाँ सच्चा सुना जाता, वहाँ समुदाय अपने आप में सिमट कर नहीं रहता, बल्कि यह समझदारी और प्रेरिताई की जगह बन जाता है और इसके द्वारा हम स्वयं को नवीन बनाते हैं।”

संत पापा के संग पूर्ण संगोष्ठी में सहभागी सदस्य
संत पापा के संग पूर्ण संगोष्ठी में सहभागी सदस्य   (ANSA)

सिनोडलिटी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए संत पापा ने धर्माध्यक्षों से कहा कि ईश्वर हमें एक प्रजा के रुप में पवित्र करते हैं जहाँ हम उनमें सच्चाई को पहचानते और पवित्रता में उनकी सेवा करते हैं। अतः सिनोडल कलीसिया हरएक को पवित्र आत्मा में मिले वरदानों को साझा करने का निमंत्रण देती है, जहाँ हमारी सहभागिता, एकता और प्रेरिताई एक आवश्यक शैली, उत्तरदायित्व और योजना बनती है जिसके माध्यम हम विभिन्न कृपाओं को सभों के संग उदारता में बांटते हैं।

इस सदर्भ में संत पापा ने इतालती धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के भिन्न संरचनाओं को एकता, सहयोगिता, आत्मापरख करते हेतु इटली की कलीसियाओं की सेवा करने का आहृवान किया। हम अपने कार्यों के निर्वाहन में बाहरी संगठन शैली या हर चीज़ को संचालन की श्रेष्ठता तक सीमित न करें, बल्कि इस बात पर ध्यान दें कि आज कौन-सी संरचना, प्रेरिताई और स्थानीय कलीसिया में सुसमाचार की घोषणा बेहतर ढ़ंग से करती है, हमें एक साथ चलने, अधिक प्रभावकारी, व्यवस्थित और फलदायी होने में मदद करती है।

ईश्वर का छोटापन

संत पापा ने कहा प्रिय भाइयो और बहनों, ईश्वर हमसे कलीसिया में कामयाब होने हेतु संख्या, प्रभावकारिता के आधार पर मूल्यांकन नहीं करने को कहते हैं। “जब हम ईश्वर की निगाहों से देखते हैं, तो हम पाते हैं कि उन्होंने हमारे बीच आने के लिए छोटे होने का मार्ग चुना... छोटेपन का यह मनोभाव ही कलीसिया की असली ताकत है। कलीसिया मेमने की रोशनी से जीती है और उसके चारो ओर जमा होती है, वह पवित्र आत्मा की शक्ति से दुनिया के मार्ग में आगे बढ़ती है।”

संत पापा लियो का आशीर्वाद
संत पापा लियो का आशीर्वाद   (ANSA)

साहस की आवश्यकता

संत पापा ने कहा कि ऐसा करने हेतु हमे साहस की जरुरत है। साहस से भरे समुदाय चीज़ को बचाने की चिंता नहीं करते बल्कि वे स्वतंत्रता में मसीह की घोषणा करते हैं। हम स्वागत करने वाले प्रेरितिक पल्ली बनें, जहाँ परिवार का मिलन होता जो सुसमाचार से नवीन बनाये जाते हैं। हम जोशीले और सहभागी होने वाले संगठन बनें। युवाओं के सवालों को दबाए बिना उनकी बातों को सुनने का साहस करें। गरीबों द्वारा अपने को सुसमाचार सुनाए जाने देने का साहस करे। एक ऐसा समुदाय जो विश्वास में माता-पिता से उत्पन्न होता है, ऐसे समुदायों से जो की अपनी ज़िंदगी से कह सकते हैं: “हमें मसीहा मिल गया है" (यो.1:41)। इटली को इस गवाही की ज़रूरत है।

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28 मई 2026, 16:03