एशिया की कलीसिया से पोप : उदारता में एकजुट होकर पूरे महाद्वीप में पुल बनाएँ
देबोरा कस्तेलानो लुबोव
पोप लियो 14वें ने इंडोनेशिया के जकार्ता में एशिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ की 12वीं आमसभा के लिए एकत्रित धर्माध्यक्षों कहा है कि वे अपने-अपने देश में ईश्वर की उपस्थिति के बड़े चिन्ह बनें, और एशिया में काथलिक कलीसिया के जीवन एवं भविष्य पर असर डालनेवाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करें।
पोप ने कहा, "जब आप एशिया में काथलिक कलीसिया के जीवन और भविष्य पर असर डालनेवाले जरूरी मुद्दों पर बात करने के लिए एकत्रित हैं, तो मैं आपको अपने आध्यात्मिक सामीप्य का भरोसा दिलाता हूँ, और प्रार्थना करता हूँ कि इस मिलन में पवित्र आत्मा आपको प्रेरित करे और रास्ता दिखाए।"
पोप लियो ने यह बात शनिवार को इंडोनेशिया के जकार्ता में 20 से 26 जुलाई तक होनेवाली एशिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ (एफएबीसी) की 12वीं महासभा के लिए एकत्रित धर्माध्यक्षों और सदस्यों को प्रेषित वीडियो संदेश में कही।
येसु ही हमारी एकता के स्रोत
अपने संदेश में, पोप ने याद दिलाया कि एशियाई धर्माध्यक्षों की महासभा के लिए चुनी गई विषयवस्तु येसु के नथानेल से कही गई बात से ली गई है: “तुम इससे भी महान चमत्कार देखोगे।” (यो. 1:50), उन्होंने कहा कि फिलिप और नथानेल को अपने पीछे आने और अपने शिष्य बनने के लिए बुलाकर, हमारे प्रभु खुद को ईश्वर और मानव के बीच एक विशेष मध्यस्थ के रूप में प्रकट करते हैं। (यो.1:51)”
पोप लियो ने आगे कहा, “आज उनके शिष्यों के रूप में, हम जानते हैं कि येसु न सिर्फ ईश्वर के साथ हमारी एकता के मध्यस्थ हैं, बल्कि आपस में एक-दूसरे के साथ भी।”
पोप ने महासभा में शामिल सभी प्रतिभागियों को याद दिलाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समय में मानव की सुरक्षा पर अपने विश्व प्रेरितिक पत्र मनिफिका हूमानितास में, उन्होंने लिखा है कि “ख्रीस्तीय एकता का स्रोत ख्रीस्त के रहस्य में है और यह संस्कारों, खासकर पवित्र यूखरिस्त में हमारी सहभागिता से निकलती है।”
विभिन्न देशों में ईश्वर की उपस्थिति का एक बड़ा चिन्ह
पोप लियो ने कहा, "इसी वजह से, मैं आपको प्रोत्साहन देना चाहता हूँ कि आप अपनी स्थानीय कलीसियाओं में यूखरिस्तीय आध्यात्मिकता को बढ़ावा देते रहें, यानी, कलीसियाई एकता की आध्यात्मिकता जो यूखरिस्त में हमारे प्रभु ईश्वर के वरदान से प्रवाहित प्रेम पर आधारित हो।"
उन्होंने कहा, "इस तरह, मुझे उम्मीद है कि स्थानीय कलीसियाओं के अंदर और उनके बीच सहभागिता के रिश्ते मजबूत होंगे और आपके देशों में ईश्वर की उपस्थिति के महान चिन्ह बनेंगे, ताकि आप पूरे एशिया में एक साथ पुल बनानेवाले बन सकें।"
अंत में, पोप लियो ने एकत्रित सभी धर्माध्यक्षों और उनकी बातचीत को कलीसिया की माँ, धन्य कुँवारी मरियम की मध्यस्थता को सिपूर्द किया, और उनपर प्रभु की प्रज्ञा एवं दृढ़ता के वरदान की कामना की।
"और सर्वशक्तिमान ईश्वर, पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा का आशीर्वाद आप पर बरसे और आपके साथ सदा बना रहे। आमेन।"
(अनुवाद - सिस्टर उषा मनोरमा तिरकी, डीएसए)
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