पोप लियो ने मोंतेकसिनो मठ में शांति के लिए प्रार्थना की
वाटिकन न्यूज
रोम, मंगलवार, 21 जुलाई 2026 (रेई) : संत पापा लियो 14वें 20 जुलाई को मोंतेकसिनो मठ गये और वहाँ के मठवासी समुदाय से मुलाकात की।
वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा जारी विज्ञाप्ति अनुसार, संत पापा लियो 14वें ने “संत बेनेडिक्ट की कब्र पर मौन प्रार्थना की, शांति के लिए अपनी प्रार्थना अर्पित की, खासकर दुनिया के उन जगहों के लिए जहाँ हिंसा और संघर्ष हो रहे हैं।”
उन्होंने धर्मसंघी समुदाय के साथ दोपहर का भोजन किया और बाद में कास्तेल गंदोल्फो लौटे, जहाँ वे 27 जुलाई तक अपनी गर्मी की छुट्टियाँ बिता रहे हैं।
मोंतेकसिनो का मठ रोम से लगभग 2 घंटे की दूरी पर है और यह बेनेडिक्टाईन ऑर्डर का पहला मठ है, जिसे संत बेनेडिक्ट ने खुद 529 में बनाया था।
मठ
15 फरवरी 1944 को मोंतेकसिनो की लड़ाई के दौरान मठ लगभग पूरी तरह से तबाह हो गया था, जब मित्र देशों की सेनाओं ने गलती से मान लिया था कि इस पर जर्मन सैनिकों का कब्जा है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इतालवी सरकार से मिले फंड से इसे फिर से बनाया गया, इसे 1964 में पोप पॉल षष्ठम ने फिर से प्रतिष्ठापित किया। आज, मठ में एक छोटा बेनेडिक्टाईन समुदाय है, जो दुनिया भर से तीर्थयात्रियों और आगंतुकों का स्वागत करता है।
पास में ही कसिनो युद्ध कब्रस्थान है, जहाँ 4,000 से ज्यादा राष्ट्रमंडल सैनिकों की कब्रें हैं, उनमें से 289 लोगों की पहचान नहीं हो पाई है।
मठ के पास ही पोलिश युद्ध कब्रस्थान भी है जहाँ 1,072 पोलिश सैनिकों की कब्रें हैं। कब्र के पत्थरों पर ख्रीस्तीय क्रूस अंकित हैं जो उन लोगों की धार्मिक पहचान दिखाते हैं।
पाचिस नुंनसियुस पुरस्कार
दस दिन पहले, इस जगह पर – जो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मलबे में बदल गई थी और युद्ध की तबाही की हमेशा रहने वाली निशानी है – 2026 का पाचिस नुनसियुस (शांति का संदेश) पुरस्कार येरूसालेम के लैटिन प्राधिधर्माध्यक्ष कार्डिनल पियेर बतिस्ता पित्साबाला को दिया गया था।
(अनुवाद - सिस्टर उषा मनोरमा तिरकी, डीएसए)
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