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डबलिन के महाधर्माध्यक्ष का प्रेरितिक पत्र, "पृथ्वी की पुकार, गरीबों की पुकार"

डबलिन के महाधर्माध्यक्ष डेरमोट फर्रेल द्वारा 12 अकटूबर को प्रस्तुत प्रेरितिक पत्र "पृथ्वी की पुकार एवं गरीबों की पुकार में" दो मुख्य बिन्दुओं जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता के नुकसान पर प्रकाश डाला गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

आयरलैंड, बृहस्पतिवार 14 अकटूबर 2021 (वीएनएस)- डबलिन के महाधर्माध्यक्ष डेरमोट फर्रेल ने प्रेरितिक पत्र में लिखा है, "हमें स्वीकार करना है कि जलवायु संकट मौजूद है। यह सबसे बड़ी चुनौती है जिसका सामना हमारा ग्रह कर रहा है। यह एक मुद्दा है जो इस पीढ़ी की परिभाषा देती है और जिसका समाधान थोड़े दिनों के प्रयास या सहज रास्तों से संभव नहीं है क्योंकि अब भी लम्बा रास्ता चलना है। साथ ही साथ, जलवायु संकट सिर्फ जलवायु से संबंधित नहीं है बल्कि यह बहु-स्तरीय संकट है और हमारे जीवन के सभी आयामों, जैसे- आवास, स्वास्थ्य, असमानता, पलायन, अर्थव्यवस्था, जल की गुणवत्ता, मिट्टी और हवा को प्रभावित करता है। संक्षेप में, इस संकट का मानवीय चेहरा है जिसका तत्काल एवं लम्बा प्रभाव हो सकता है जो सबसे अधिक कमजोर लोगों को प्रभावित करता है।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा है कि "पृथ्वी की पुकार एवं गरीबों की पुकार एक साथ चलते हैं।" उन्होंने पूरे पश्चिम को "पिछड़े भाइयों और बहनों" के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने याद किया कि पर्यावरण की रक्षा, गरीबों के लिए न्याय, समाज के प्रति प्रतिबद्धता और आंतरिक शांति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं एवं इस संकट से बाहर निकलने के सच्चे आधार हैं, जो वास्तव में जीवन का रास्ता है। हमारा भविष्य एवं ग्रह का भविष्य इस पर निर्भर करता है कि हम अपनी जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं।"  

अतः आयरिश धर्माध्यक्ष ने जीवनशैली में बदलाव लाने का आह्वान किया है। एक सच्चा बदलाव न केवल अभ्यास में परिवर्तन है बल्कि हृदय परिवर्तन है, आंतरिक रूप से परिवर्तन है जो केवल सुसमाचार में और कलीसिया के जीवन में ख्रीस्त के साथ मुलाकात से संभव होगा। यहीं पारिस्थितिक बदलाव की जड़ है। विश्वास, सृष्टि को ईश्वर के प्रेम की साक्षी एवं सृष्टिकर्ता के स्वभाव के रूप में देखता है। प्रार्थना हमें विचारधारा से दूर रखता तथा प्रभु के रूपांतरित करनेवाले आलिंगन में लाता है।  

14 October 2021, 16:46