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सन्त पापा लियो 14 वें के साथ यूरोपीय संघ के धर्माध्यक्ष , 21.05.2026 सन्त पापा लियो 14 वें के साथ यूरोपीय संघ के धर्माध्यक्ष , 21.05.2026   (@VATICAN MEDIA)

लोकलुभावनवाद और युद्धों के खिलाफ यूरोप का भविष्य

वाटिकन रेडियो मुख्यालय में यूरोपियन संघ के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ कॉमेक के आयोग की बैठक सम्पन्न हुई जिसमें सन्त पापा लियो 14 वें से मुलाकात तथा 2027 में यूरोप पर पुनः विचार शीर्षक से एक नये संकलन के प्रकाशन का प्रस्ताव रखा गया।

वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 22 मई 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): रोम स्थित वाटिकन रेडियो मुख्यालय में गुरुवार को यूरोपियन संघ के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ कॉमेक के आयोग की बैठक सम्पन्न हुई जिसमें सन्त पापा लियो 14 वें से मुलाकात तथा 2027 में यूरोप पर पुनः विचार शीर्षक से एक नये संकलन के प्रकाशन का प्रस्ताव रखा गया।

सन्त पापा से मुलाकात के विषय में  कॉमेक के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष मरियानो क्रोश्याता ने बताया कि सन्त पापा लियो 14 वें के साथ गुरुवार प्रातः सम्पन्न मुलाकात सौहार्द्र, प्रत्यक्ष तथा उदार रही। उन्होंने कहा कि वस्तुतः, हमारे कार्य और सन्त पापा अपनी धर्मशिक्षा, अपनी स्थिति और अपनी पहलों के माध्यम से जो सिखाते हैं और गवाही देते हैं, उसके बीच एक मज़बूत तालमेल था।

यूरोपीय संघ का मिशन

उन्होंने कहाः "यूरोपीय संघ शांति की एक योजना के तौर पर बना था और शांति इसकी जड़ों और इसकी पहचान में है। अस्तु, इसे देशों और अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच बातचीत को बढ़ावा देने के साथ-साथ बहुपक्षीयवाद को बढ़ावा देना चाहिये, जैसा कि सन्त पापा ने स्पष्टतः स्मरण दिलाया है।"

उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि ध्रुवीकरण से चिह्नित दुनिया में यूरोपीय संघ  "लोकलुभावनवाद के परिणामस्वरूप एकता के अभाव में कमज़ोर पड़ गया है।"

मूल्यों को प्रोत्साहन देना

धर्माध्यक्षी क्रोश्याती ने कहा कि सुसमाचार के शब्द तथा कलीसिया की धर्मशिक्षा को लागू किया जाना आज हमारे समक्ष एक चुनौती है जिसे प्राथमिकता दी जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि “इस मामले में हम भय, सुविधा या इससे भी बुरा, किसी भी संभावित राजनीतिक पसंद की वजह से पीछे नहीं हट सकते। हमारा काम बंटवारे, बहुमत और अल्पसंख्यकों से कहीं आगे है: यह मानवता की सेवा में तथा आज के यूरोप की सेवा में मूल्यों को बढ़ावा देना है।”

धर्माध्यक्ष क्रोश्याता ने बताया कि यूरोपीय धर्माध्यक्षों ने सन्त पापा के समक्ष 2027 में “रिएथिंकिंग यूरोप” का नया संस्करण प्रस्तुत करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रथम संस्करण के ठीक दस साल बाद होगा, जिसमें वाटिकन में, यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों के राजनैतिक प्रतिनिधि, अकादमी विशेषज्ञ और कलीसियाई धर्माधिकारियों सहित लगभग 300 लोग शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा "इस कार्यक्रम का लक्ष्य यूरोप और सम्पूर्ण विश्व के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर सोच-विचार और बातचीत का एक खास अवसर उत्पन्न करना है।"

सम्वाद और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व

कॉमेक के उपाध्यक्ष, डिजोन के महाधर्माध्यक्ष, आन्तुआन हेरोआद ने यूरोप के एक ऐसे विचार की चर्चा की जो “एकता और शांति पर आधारित हो।”  उन्होंने कहा, “सम्वाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए परिस्थिति उत्पन्न करना एक ज़िम्मेदारी है जो सिर्फ़ कानूनों और संस्थाओं से कहीं अधिक बढ़कर है।” उन्होंने कहा कि हालांकि हम राजनीतिज्ञ नहीं हैं तथापि यूरोप के मूल्यों का स्मरण दिलाना हम अपना दायित्व मानते हैं।

आप्रवासी और लोकलुभावनवाद

यूरोपीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ के उपाध्यक्ष कोपेनहेगन के धर्माध्यक्ष ज़ेस्लाव कोज़ोन ने आप्रवासियों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित कराया और दुख जताया कि “दुर्भाग्यवश आप्रवासियों को प्रायः बलि का बकरा और समाज का दुश्मन बना दिया जाता है।”

उन्होंने स्वीकार किया कि आप्रवास का मुद्दा कई दशकों चला आ रहा है, यह कोई नई बात नहीं है किन्तु, उन्होंने कहाः "नई बात यह कि आज यूरोपीय राजनीतिज्ञ लोकलुभावनवाद का इस्तेमाल कर इसे कई समाजों के लिए एक कथित खतरे में बदल रहे हैं।"

धर्माध्यक्ष ने स्मरण दिलाया कि काथलिक कलीसिया, विशेष रूप से उत्तरी यूरोपीय देशों में, आप्रवासियों से निर्मित कलीसिया है, जिनका स्वागत-सत्कार मानवतावादी कारणों से तथा कलीसिया के अभिन्न अंग के सदृश किया जाता है। उन्होंने कहा, "उनकी उपस्थिति को समृद्धि के रूप में देखा जाना चाहिये: ऐसी स्थिति में जब कुछ पल्लियों के लुप्त होने का खतरा था आप्रवासियों के आगमन से नया जीवन आया है।"

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22 मई 2026, 11:39