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समर्पित जीवन दिवस पर नाईजीरिया की धर्मबहनें समर्पित जीवन दिवस पर नाईजीरिया की धर्मबहनें 

समर्पित व्यक्ति : मुश्किल समय में हमेशा उपस्थित

समर्पित एवं प्रेरितिक जीवन की संस्थाओं के लिए गठित विभाग के प्रमुख ने एक पत्र में जोर दिया है कि समर्पित जीवन, एक ऐसी उपस्थिति है जो हमेशा रहती है’, खासकर, दुनिया के उन इलाकों में जहाँ संघर्ष, हिंसा, विभाजन और अस्थिरता है।

वाटिकन न्यूज

समर्पित एवं प्रेरितिक जीवन की संस्थाओं के लिए गठित विभाग ने एक पत्र भेजा है, जिसके माध्यम से “दुनिया के हर हिस्से में पहुँचने” की कोशिश की है, जहाँ समर्पित पुरूष और महिलाएँ अपना मिशन जारी रखे हैं।

पत्र में समर्पित एवं प्रेरितिक जीवन की संस्थाओं के लिए गठित विभाग की अध्यक्ष सिस्टर सिमोना ब्रैम्बिला; प्रो-प्रीफेक्ट, कार्डिनल एंजेल एफ. अर्तिम; और विभाग की सचिव, सिस्टर तितयाना मेरलेते ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी शुरूआत सुसमाचार के प्रति निष्ठा और समर्पित महिलाओं एवं पुरुषों द्वारा दिए गए जीवन दान के लिए उनका शुक्रिया अदा करते हुई हुई है। पत्र में बताया गया है, “यह जीवन जो कभी-कभी मुश्किलों से भरा होता है, लेकिन हमेशा उम्मीद की निशानी के रूप में जिया जाता है।”

हम मुश्किल हालात में रहते हैं

पिछले साल को याद करते हुए, विभाग के प्रमुखों ने प्रेरितिक दौरे और “मुश्किल हालात में सहभाग होने के लिए बुलाए गए कई समर्पित लोगों” से मिलने की कृपा पर ध्यान दिया। ये वे लोग हैं जो ऐसी जगहों पर रहते हैं जहाँ लड़ाई-झगड़े, गरीबी, जबरन विस्थापन, धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा, सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता हैं।

पत्र में बताया गया है, ये चुनौतियाँ दिखाती हैं कि कैसे समर्पित जीवन “एक ऐसी ‘मौजूदगी है जो घायल और पीड़ित लोगों के साथ बनी रहती है’, उन जगहों पर जहाँ अक्सर सुसमाचार को कमजोरी और मुश्किल हालात में जिया जाता है।”

यह मौजूदगी कैसी दिखती है यह हालात और समाज पर निर्भर करता है, जो जगह-जगह अलग-अलग होते हैं। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि ठीक वहीं जहाँ “राजनीतिक और सामाजिक हालात भरोसे को परखते हैं और उम्मीद को खत्म करते हैं”, समर्पित लोगों की “निष्ठा, विनम्र, रचनात्मक और समझदारी पूर्ण उपस्थिति इस बात का संकेत बन जाती है कि ईश्वर अपने लोगों को नहीं छोड़ते।”

प्यार से रहना

"सुसमाचारी 'रहना' कभी भी स्थिर न रहना या हार मान लेना नहीं है", पत्र में बताया गया है, "यह एक रचनात्मक उम्मीद है जो शांति का नजरिया और भाव पैदा करती है"। यह झगड़े के बीच में हथियार डालने वाले शब्दों, बातचीत के लिए दबाव डालने वाले रिश्तों, "छोटे बच्चों" की रक्षा के लिए चुने गए फैसलों आदि का रूप ले सकता है।

रहने का यह चुनाव कोई व्यक्ति या समुदाय का नहीं है। बल्कि यह कलीसिया और पूरी दुनिया के लिए एक भविष्यवाणी वाला शब्द बन जाता है।

प्रेरितिक जीवन “सक्रिय सामीप्य को स्पष्ट करने में मदद करता है जो घायल गरिमा को सहारा देता; चिंतनशील जीवन मध्यस्थ प्रार्थना एवं निष्ठा के द्वारा रक्षा करता, विश्वास की परीक्षा में आशा करता है; धर्मनिर्पेक्ष संस्थाएँ सामाजिक और पेशेवर सच्चाइयों में एक समझदारी भरे खमीर के रूप में सुसमाचार की गवाही देती हैं; ऑर्दो वर्जिनुम मुक्त और निष्ठा की ताकत दिखाता है जो भविष्य के लिए रास्ता खोलता है; एकांतवासी जीवन ईश्वर की प्राथमिकता और दिल को हथियार विहीन करने की आवश्यकता की याद दिलाता है।"

जीवन के इन अलग-अलग रूपों में, एक पहलू या, जैसा कि पत्र में बताया गया है, एक भविष्यवाणी सामने आती है: “प्यार से रहना, बिना छोड़े, बिना चुप रहे, अपने जीवन को इतिहास के इस समय के लिए वचन बनाना।”

इस भविष्यवाणी में, शांति की गवाही बढ़ती है। जैसा कि पोप लियो 14वें ने बार-बार समझाया है, शांति कोई अमूर्त विचार नहीं है, बल्कि एक “जरूरी और रोजाना का सफर” है जिसके लिए सुनने, सब्र रखने, बातचीत करने, दिल और दिमाग बदलने और कमजोर पर ताकतवर की सोच को नकारने की जरूरत होती है।

पत्र में आगे लिखा है, “शांति विरोध से नहीं, बल्कि मुलाकात से, मिली-जुली जिम्मेदारी से पैदा होती है।” जब कोई प्यार से सुनता है, तो बातचीत और शांति बन सकती है। इसीलिए समर्पित जीवन, जब वह बिना किसी झगड़े के जरूरतमंदों के करीब रहना चुनता है, तो वह “शांति का कारीगर” बन सकता है।

विभाग के प्रमुखों ने समर्पित लोगों को प्रभु को समर्पित किया है कि वे अपने मिशन में एक नबी की उपस्थिति एवं एक शांति के बीज बनें।

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29 जनवरी 2026, 16:37