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स्पेन के तोलेदो शहर का महागिरजाघर स्पेन के तोलेदो शहर का महागिरजाघर 

तोलेदो महागिरजाघर की 800 वीँ जयन्ती पर सन्त पापा का आभार

स्पेन में तोलेदो महागिरजाघर की 800वीं जयन्ती पर एक पत्र भेजकर सन्त पापा ने महागिरजाघर की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक समृद्धि पर प्रकाश डाला।

वाटिकन सिटी

स्पेन, शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): स्पेन में तोलेदो महागिरजाघर के भक्तों को एक पत्र भेजकर सन्त पापा लियो 14 वें ने महागिरजाघर की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए 2026 के लिए सुनियोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भक्तों को प्रोत्साहित किया।

गौथिक कलानुकूल निर्मित महागिरजाघर की 800 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर सन्त पापा लियो ने तोलेदो महाधर्मप्रान्त के विश्वासियों को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने आठवीं शताब्दी सम्बन्धी समारोहों के लिये सुनियोजित कार्यक्रमों पर हर्ष व्यक्त किया और आशा की है कि 2026 स्पेन, यूरोप और हिस्पैनिक अमरीका में तोलेदो महागिरजाघर के समृद्ध इतिहास के लिए कृपा, क्षमा, दया और आभार व्यक्त करने का सुअवसर हो सके।

सन्त पापा का पत्र

सन्त पापा लियो 14 वें का पत्र महागिरजाघर में स्पेन में परमधर्मपीठ के राजदूत पियेरो पिओप्पो द्वारा पढ़ा गया जिसमें सन्त पापा ने स्मरण दिलाया है कि इस महागिरजाघर की आधार शिला 1226 ई. में तत्कालीन महाधर्माध्यक्ष रोदरिगो हिमेनेज़ तथा कस्तीले के सम्राट सन्त फरडीनान्ड तृतीय द्वारा रखी गई थी। 800 वर्षों के अन्तराल में तोलेदो महागिरजाघर धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में अहम घटनाओं का स्थल रहा है, जो इसकी कला और वास्तुकला में प्रतिबिंबित होती हैं।

सन्त पापा के संदेश में महागिरजाघर के सामाजिक और लोकोपकारी उदारता के कार्यों पर भी ज़ोर दिया गया, जो आज के समाज में मौजूद गरीबी के नए रूपों को देखते हुए किये जा रहे हैं। अपने प्रेरितिक उदबोधन डिलेक्सी ते का ज़िक्र करते हुए सन्त पापा लियो 14 वें ने तोलेदो के समुदाय से आग्रह किया कि वे ग़रीबों को न भूलें, जो विश्वास के साथ-साथ महागिरजाघर के प्रेरितिक मिशन की एक ठोस अभिव्यक्ति हैं।

विश्वास कला और धरोहर  

आयोजकों के अनुसार, महागिरजाघर की आठवीं जयन्ती के उपलक्ष्य में महाधर्मप्रान्त ने विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है जिसमें आस्था, कला, संगीत और विरासत एक साथ मिलकर एक अनोखा और साझा अनुभव देते हैं, जो सम्पूर्ण कलीसिया और विश्व के लिए खुला है।

यह कार्यक्रम चार खास विषयों के ज़रिए महागिरजाघर के जीवंत इतिहास को याद करता है: आवाज़, स्मृति, पत्थर का शरीर, इमारत और उसके समुदाय का आध्यात्मिक जीवन। आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अतिरिक्त, महागिरजाघर के जीर्णोद्धार और उसे बेहतर बनाने के निर्माण और अनुसन्धान कार्य भी शामिल हैं ताकि इस खास विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।

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30 जनवरी 2026, 10:09