पोप ने विश्व बाल दिवस के लिए गठित समिति को समाप्त किया
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, शनिवार, 14 फरवरी 2026 (रेई) : विश्व बाल दिवस के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति को पिछले अगस्त माह में लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए गठित विभाग में शामिल करते हुए पोप लियो 14वें ने 13 फरवरी को एक प्रलेख प्रकाशित कर समिति को समाप्त कर दिया।
विश्व बाल दिवस के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति का गठन, संत पापा फ्राँसिस ने नवम्बर 2024 को, विश्व बाल दिवस के “कलीसियाई संचालन और प्रेरितिक आयोजन” को संभालने की जिम्मेदारी के साथ किया था। इसी के साथ विश्व बाल दिवस मनाया गया था, जिसमें दुनियाभर के हजारों बच्चों ने रोम आकर एक संगीत, विश्वास और गवाही के कार्यक्रम में भाग लिया था।
जिम्मेदारी लोकधर्मी, परिवार एवं जीवन विभाग को हस्तांतरित
इस पहल को जारी रखा जाएगा और इसके दूसरे संस्करण को रोम में 25 से 27 सितम्बर 2026 को मनाया जाएगा जैसा कि पोप लियो 14वें ने पिछले नवम्बर में घोषणा की थी।
लेकिन, इस कार्यक्रम का आयोजन और संचालन करने की जिम्मेदारी अब पूरी तरह से लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए गठित विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है, जिसके अध्यक्ष कार्डिनल केविन फरेल हैं। पत्र में लिखा है, “लोकधर्मी, परिवार एवं जीवन के लिए गठित विभाग उन सभी मामलों के लिए जिम्मेदार है जो पहले समिति की जिम्मेदारी थी।”
सहयोग और क्षमता को बढ़ावा देना
पोप लियो बताते हैं कि यह फैसला अगस्त 2025 के आदेश के साथ तय दिशा को जारी रखता है और “इसका मकसद सही सलाह-मशविरा करने के बाद, इस नेक पहल को पूरा करने के लिए सहयोग और क्षमता को बढ़ावा देना है।”
पोप लियो ने परमधर्मपीठीय समिति के दस्तावेज और संबंधित नियमों को भी खत्म कर दिया है। इसके अलावा, समिति द्वारा "पहले अपनाए गए किसी भी कानून और नियम" को भी रद्द कर दिया है, और उनका "कानूनी और सिविल ऑर्डर दोनों में कानूनी असर खत्म हो जाएगा।" इसके अलावा, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समिति के दूसरे सदस्य तुरंत अपनी भूमिकाएँ समाप्त कर देंगे।
प्रलेख के अनुसार, लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए विभाग के अध्यक्ष, "समिति के बाकी मामलों को तय करेंगे" और "अर्थव्यवस्था के सचिवालय को मंज़ूरी के लिए और बाकी सम्पति के बंटवारे के बारे में किसी भी फैसले के लिए एक अंतिम परिशोधन रिपोर्ट पेश करेंगे।"
विश्व बाल दिवस पहली बार 25 मई, 2024 को रोम के ओलंपिक स्टेडियम में पोप फ्रांसिस की मौजूदगी में मनाया गया था और इसमें 50,000 से ज्यादा बच्चों और किशोर-किशोरियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें कुछ युद्ध प्रभावित इलाकों के बच्चे भी शामिल थे।
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