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रोम के पुरोहितों से मुलाकात करते संत पापा लियो 14वें रोम के पुरोहितों से मुलाकात करते संत पापा लियो 14वें   (ANSA)

रोम के पुरोहितों से पोप : विश्वास को पुनः जागृत करें

पोप लियो 14वें ने बृहस्पतिवार को रोम धर्मप्रांत के पुरोहितों से मुलाकात करते हुए उन्हें विश्वास के वरदान को पुनः जागृत करने, सुसमाचार का प्रचार करने, परिवारों और युवाओं के करीब रहने, तथा एक दूसरे को पुरोहित भाई के रूप में साथ देने हेतु आमंत्रित किया, खासकर, युवा पुरोहितों को जो बहुत ज्यादा परेशान महसूस करते हैं।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 फरवरी 2026 (रेई) : पोप लियो 14वें ने बृहस्पतिवार को वाटिकन में रोम धर्मप्रांत के पुरोहितों से मुलाकात की और उनसे कहा कि वे उस आग को फिर प्रज्वलित करें जिसे ईश्वर ने पहली बार उस समय जलाई थी, जब उन्हें अपने काम में साथ देने का वरदान दिया था।

पोप ने उनसे मिलकर “बहुत खुशी” जाहिर की और मजाक में कहा कि हालांकि चालीसा काल शुरू हो चुका है, लेकिन उनसे मिलकर उन्हें “कोई पछतावा नहीं है।”

अपने भाषण में, पोप ने पुरोहितों के लिए चुनौतियों और प्राथमिकताओं के बारे बताया, और उन्हें विश्वास को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

ईश्वर के वरदान को पुनः प्रज्वलित करें

पोप ने उनसे कहा कि वे खुद को “पहले से तय प्रेरितिक योजना को सिर्फ चलानेवाले” के रूप में न देखें, बल्कि ईश्वर के काम में सहयोग करने के लिए रचनात्मकता दिखाएँ।

पोप लियो ने कहा, “रोम की कलीसिया, ईश्वर के वरदान को पुनः जागृत करने का स्मरण रखें।”

पोप ने माना कि अक्सर “तेजी से बदलते सांस्कृतिक बदलावों और जिन हालातों में हमारा मिशन आगे बढ़ता है, कभी-कभी थकान और रूटीन के बोझ से घिरे महसूस करते हैं, या विश्वास एवं धार्मिक कार्यों के प्रति बढ़ती लापरवाही से निराश होने” के दबाव में, “हमें इस आग को और जलाने एवं पुनः प्रज्वलित करने की जरूरत महसूस होती है।”

उन्होंने पुरोहितों को मिलकर काम करने की अपील की। ​​पोप ने कहा, “हम अकेले सोच और काम नहीं कर सकते,” क्योंकि उन्होंने देखा कि पिछले कुछ सालों में लोगों का जीवन और पल्ली के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।

उन्होंने कहा, “सुसमाचार प्रचार के लिए लौटना बहुत जरूरी है। यही प्राथमिकता है, ये ही वे रास्ते और तरीके हैं जो लोगों को येसु की प्रतिज्ञा में वापस आने में मदद कर सकते हैं।  

बिना निराश हुए विश्वास को आगे बढ़ाएं

विश्वास को और अच्छे से आगे बढ़ाने के लिए, संत पापा ने पुरोहितों को अन्य रास्तों की खोजने का बढ़ावा दिया, जिनमें बच्चों, युवाओं और परिवारों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके।

युवाओं की सेवा करने की चुनौतियों को पहचानते हुए, जिनमें विश्वास के तत्व अक्सर सांस्कृतिक और सामाजिक कारणों के साथ मिले होते हैं, पोप ने कहा, “उनमें मौजूद गहरी बेचैनी, उनके संदेह, उनकी मुश्किलों को समझना और व्याख्या जरूरी है।”

इस संदर्भ में, पोप ने कहा कि पल्ली को “इलाके में मौजूद संस्थानों, स्कूलों, शिक्षा और मानव विज्ञान के विशेषज्ञ और उन सभी लोगों के साथ बातचीत करने के लिए बुलाया गया है जो हमारे युवाओं की किस्मत और भविष्य की परवाह करते हैं।”

पोप लियो ने माना, “हमारे पास ऐसे आसान हल नहीं हैं जो तुरंत नतीजे की गारंटी दें, लेकिन, जितना हो सके, हम युवाओं पर ध्यान दे सकते हैं, उनका साथ दे सकते हैं, उनका स्वागत कर सकते हैं और उनके जीवन का हिस्सा बन सकते हैं।”

थकान के बावजूद, आगे बढ़ते रहें

पोप ने युवा पुरोहितों से भी बात की, यह मानते हुए कि वे “अक्सर अपनी पीढ़ी और इस युग की क्षमता एवं बोझ को खुद महसूस करते हैं।”

उन्होंने कहा, “मैं आपको कभी भी खुद को बंद न करने के लिए कहता हूँ।” “अपनी थकान और अपनी मुश्किलों के बारे में भी बातचीत करने से न डरें, खासकर, उन भाई पुरोहितों के साथ जिनके बारे में आपको लगता है कि वे आपकी मदद कर सकते हैं।”

अंत में, पोप लियो ने पुरोहितों से “पुरोहितीय भाईचारा” को सच्चाई से जीने की अपील की, और कहा, “आइए हम एक-दूसरे का साथ दें और एक-दूसरे का समर्थन दें।”

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19 फ़रवरी 2026, 16:54