संत पापा लियोः येसु हमारे अधिवक्ता
वाटिकन सिटी
संत पापा लियो 14वें ने मोनाको की अपनी एकदिवसीय प्रेरित यात्रा के दौरान निष्कंलक गर्भाधारण के महागिरजाघर में काथलिक विश्वासियों के संग प्रार्थना सभा में सहभागी होते हुए उन्हें अपना संदेश दिया।
संत पापा ने अपने संबोधन में कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों,
ईश्वर के सम्मुख हमारे लिए एक धार्मिक बिचवई, येसु ख्रीस्त हैं। इन शब्दों के द्वारा प्रेरित संत योहन हमें मुक्ति के रहस्य को समझने में मदद करते हैं। हमारी कमजोरी में, जहाँ हम मानवीय स्थिति में अपने को पापों से बोझिल, अपने प्रयास से जीवन की पूर्णतः और खुशी का आलिंगन करने में अयोग्य होते हैं, ईश्वर स्वयं येसु ख्रीस्त के माध्यम हमारे पास आते हैं। प्रेरित हमें बतलाते हैं कि येसु, एक बलि मेनने की भांति, अपने ऊपर दुनिया और मानवता की सारी बुराइयों को लेते हैं, वे उन्हें हमारे संग और हमारे लिए ढ़ोते हैं, इस भांति उन्होंने बुराई पर विजय प्राप्त की और उसे बदलते हुए हम सबों को मुक्ति प्रदान किया है।
संत पापा ने राजनायक अलबर्ट, धर्माध्यक्ष दोमनिक मारिये दाबिदे, पुरोहितों और धर्मसंधियों का अभिवादन करते हुए कहा कि मुझे आप के बीच आना और आप की कलीसियाई यात्रा में साझा होना खुशी प्रदान करती है।
उन्होंने अधिवक्ता स्वरुप येसु की भूमिका पर चिंतन करते हुए कहा कि ख्रीस्त हमारे विश्वास के जीवित क्रेन्द हैं, और इस बात का ध्यान रखते हुए मैं आप सभों को संबोधित करता हूँ।
येसु एकता के उपहार
येसु को एकता के उपहार स्वरुप व्यक्त करते हुए संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त, धार्मिक व्यक्ति स्वरुप, सारी मानवता हेतु अपने पिता से निवेदन करते हैं, वे पिता और एक-दूसरे के संग हमारा मेल-मिलाप करते हैं। येसु न्याय की घोषणा करने नहीं आये जो हमें दोषीदार करार देते हों, बल्कि वे हमें अपनी करूणा प्रदान करते हैं जो हमें शुद्ध, चंगाई और परिवर्तित करते हुए एक ईश्वरीय परिवार का अंग बनाता है। अपनी करूणा और दयालुता में हमारे अधिवक्ता बनाते हैं जो गरीबों और पापियों की रक्षा करते हैं, बुराई को बढ़ावा देने के लिए नहीं अपितु उन्हें तकलीफों और गुलामी से मुक्त करने हेतु, जो हमें ईश्वर की संतान और एक-दूसरे के लिए भाई-बहनें बनाता है। ऐसा नहीं कि येसु के कार्य केवल शारीरिक और अध्यात्मिक चंगाई तक ही सीमित हैं। हम उनमें एक महत्वूपर्ण सामाजिक और राजनैतिक आयाम को भी पाते हैं क्योंकि चंगाई प्राप्त व्यक्ति को मानवीय और धार्मिक समुदाय में पुनः पूर्ण सम्मान और स्थान मिलता है, क्योंकि बीमारी या पाप के कारण उन्हें समाज से अलग कर दिया जाता था।
कलीसिया का बुलावा
यह एकता अपने में कलीसिया की श्रेष्ठ निशानी है, जो इस दुनिया में बिना भेदभाव किये ईश्वर के प्रेम की निशानी बनने को बुलायी गई है। इस संदर्भ में आप की कलीसिया एक बृहद समृद्धि को वहन करती है। क्योंकि यह सचमुच में एक वह स्थल है जहाँ सबों का स्वागत और देखभाल किया जाता है जो इस समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषता के समिश्रण को व्यक्त करती है। वास्तव में, मोनाको की रियासत अपने में छोटी है, यद्यपि यहाँ मोनाको, फ्रांस, इटली और अन्य बहुत से देशों के लोग निवास करते हैं। यह एक छोट महानगर है, जिसमें मूलता की विविधता के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक अंतर भी है। कलीसिया में ऐसी विविधता सामाजिक स्तरों में विभाजन के अवसर नहीं बनना चाहिए। इसके विपरीत, यहाँ हर किसी का स्वागत मानव और ईश्वरीय संतान स्वरुप किया जाता है। इसके अलावा, हम सबों में कृपा के उपहार को पाते हैं जो मेल-मिलाप, भातृत्व और पड़ोसी प्रेम को बढ़ाता है। यह उपहार ख्रीस्त से आता है, जो पिता के सामने हमारे सहायक हैं। क्योंकि हम सबों ने उनमें बपतिस्मा प्राप्त किया है, जैसा कि संत पौलुस कहते हैं, “अब न कोई यहूदी है और न कोई यूनानी, न कोई गुलाम है और न आज़ाद, न कोई नर है और न नारी क्योंकि हम सब येसु ख्रीस्त में एक हैं।” (गला.3.28)
येसु की चाह
संत पापा ने मानवीय सुरक्षा के संबंध में सुसमाचार प्रचार, दूसरे विन्दु पर जोर देते हुए कहा कि येसु की चाह है कि हर कोई पिता के प्रेम का सुसमाचार स्वीकार करे। उससे भी बढ़कर, एक अभिवक्ता के रुप में वे हमारे लिए विशेष कर उन लोगों की सुरक्षा की बात कहते हैं जो अपने को ईश्वर द्वारा छोड़ दिये जाने का अनुभव करते हैं, जो भूला दिये गये और हाशिये में निवास करते हैं। इस भांति उन्होंने अपने को करूणमय ईश्वर की आवाज और चेहरा बनाया जो प्रताड़ित लोगों के लिए कार्य और न्याय करते हैं।
संत पापा ने कहा कि अतः में एक उस कलीसिया की सोच रखता हूँ जो अपने को अभिवक्ता बनाती है, मुख्यतः जो मानवता, हर नर-नारी की सुरक्षा करती है। हम इसमें एक महत्वपूर्ण और प्रेरितिक मार्ग को सम्माहित पाते हैं जिसका उद्देश्य मानव के सम्पूर्ण विकास को प्रोत्साहित करना है उसके साथ ही उसका अंतिम लक्ष्य जो हमारा एक-दूसरे के संग और मानव का तृत्वमय ईश्वर के संग रहस्यमय मिलन की बात व्यक्त करता है।
सुसमाचार घोषणा की सर्वप्रथम सेवा मानव और समाज को ख्रीस्त और उसके शब्दों की ज्योति से ज्योतिर्मय करना है जिससे वे स्वयं के सम्मान को पहचान सकें, मानवीय जीवन के अर्थ को, संबंधों के मूल्य और सामाजिक एकता को, जीवन जीने के अर्थ को और जीवन के अंतिम लक्ष्य को जान सकें।
सुसमाचार की घोषणाः उत्साह और उदारता में
इस संदर्भ में संत पापा लियो ने कहा कि मैं आप को सुसमाचार घोषणा हेतु उत्साह और उदारता में कार्य करने को प्रोत्साहित करता हूँ। “जीवन, आशा और प्रेम का सुसमाचार घोषित करें। आप सबों के लिए सुसमाचार की ज्योति को लायें जिससे हर नर-नारी के जीवन की रक्षा हो तथा जन्म से लेकर प्राकृति मृत्यु तक उसे बढ़ावा मिले।” संप्रदायिकता की लहर को रोकने के लिए नए रास्ते अपनाये, जो मानवता को व्यक्तिगतवाद में बदलने की जोखिम उत्पन्न करता है और सामाजिक जीवन को दौलत कमाने पर आधारित कर देता है।
सजीव विश्वास प्रेरितिक है
संत पापा लियो ने कहा कि सुसमाचार की घोषणा और विश्वास का अभ्यास अपने में कितना महत्वूर्ण है जो आपके समाज और आपकी पहचान से संयुक्त है, यह सिर्फ आदत बनकर न रहे, चाहे यह अपने में कितना ही अच्छा क्यों न हो। एक सजीव विश्वास सदैव प्रेरितिक होता है, जो सवालों का उत्तर देता और सोचने-विचारे को विवश करता है। क्या हम सचमुच में मानव जाति की रक्षा करते हैं? क्या हम हर परिस्थिति में जीवन की रक्षा करते हुए मानव सम्मान की रक्षा करते हैं? क्या वर्तमान आर्थिक और सामाजिक शैली, वास्तव में, न्यायपूर्णत और एकता की पहचान है? क्या इसमें ज़िम्मेदारी का कोई नैतिक मूल्य है, जो “सिर्फ चीज़ों के लेन-देन के तर्क, मुनाफ़े के एक लक्ष्य” से आगे बढ़कर एक अधिक समानता का समाज बनाने में मदद करता है?
विश्वास खोजने वालों की मदद करें
प्रिय मित्रों, संत पापा ने कहा कि हम अपनी निगाहें येसु ख्रीस्त की ओर करें, जो पिता से हमारे अधिवक्ता हैं, विश्वास में, आप व्यक्तिगत रूप से उनके संग संबंध स्थापित करें, एक विश्वास जो साक्ष्य देने में मदद करता है, जो हमारे जीवन में परिवर्तन लाने और समाज के नवनीकरण में मदद करता है। इस विश्वास को हमें एक नयी भाषा और नये रुप में घोषित करने की आवश्यकता है, जिसमें डिजिटल माध्यम शामिल है। हम हर किसी को इस विश्वास से परिचित करायें और सृजनात्मक रुप में ऐसा निरंतर करें। यह खासकर उन लोगों के लिए हो जो ईश्वर से मिलना सीख रहे हैं, और मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप दीक्षार्थियों और उन लोगों का विशेष ध्यान दें जो विश्वास की खोज करते हैं। विश्वास की पुनःखोज कर रहे लोगों पर आप खास ध्यान दें।
संत पापा ने मोनाकोवासियों को उनकी सरंक्षिका संत देवोता, कुंवारी और शहीद को सुपुर्द करते हुए माता मरियम से संरक्षण की कामना की।
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