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मोनाको के युवाओं एवं नवदीक्षार्थियों से मुलाकात करते संत पापा लियो 14वें मोनाको के युवाओं एवं नवदीक्षार्थियों से मुलाकात करते संत पापा लियो 14वें  (AFP or licensors)

आशा, संदेह, विश्वास : पोप ने मोनाको में युवाओं के सवालों का जवाब दिया

अपनी प्रेरितिक यात्रा के पोप लियो 14वें ने मोनाको के युवाओं से बात की, विश्वास और संदेह पर सवालों के जवाब दिए, और उनसे "प्रभु एवं दूसरों के लिए खुद को पूरी समर्पित करने" का आग्रह किया।

वाटिकन न्यूज

मोनाको, शनिवार, 28 मार्च 2026 (रेई) : पोप लियो 14वें ने मोनाको की अपनी एक दिवसीय यात्रा के दौरान मोनाको की संरक्षिका संत देवोता को समर्पित गिरजाघर में वहाँ के हजारों युवाओं एवं नव दीक्षार्थियों से मुलाकात की।

संत पापा ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा, “मैं यहाँ आप सभी के साथ खुश हूँ और आप सभी का हार्दिक अभिवादन करता हूँ।” मोनाको रियासत की संरक्षिका संत देवोता की ओर खींचते हुए उन्होंने कहा, “वे एक साहसी जवान युवती थी जो जानती थी कि हिंसक जुल्म के बावजूद, यहाँ तक कि शहीद होकर भी, अपने विश्वास की गवाही कैसे देनी है।” उनके शरीर को कोर्सिका से मोनेगास्क तट लाया गया है। उनके शरीर को खत्म करने और उसकी हर याद मिटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उसके बलिदान ने शांति और प्यार के सुसमाचार को और आगे बढ़ाया। इससे हमें यह सोचने में मदद मिलती है कि अच्छाई बुराई से ज्यादा ताकतवर होती है, भले ही कभी-कभी ऐसा लगता है कि यह थोड़े समय के लिए हार रही है। उनकी शहादत हमें याद दिलाता है कि विश्वास की गवाही देना एक बीज है जो हमारी उम्मीदों और योग्यताओं से कहीं ज्यादा दूर दिलों और जगहों पर फैल सकता है और फल दे सकता है।

संत पापा ने गौर किया कि उस गिरजाघर में शहीद संत देवोता की स्मृति को संत कार्लो अकुतिस के साथ जोड़ा गया है जो एक युवा संत हैं जो येसु से प्यार करते थे एवं अंत तक विश्वस्त बने रहे।   

उन्होंने कहा, “प्यारे युवाओं, ये दोनों संत हमें हिम्मत देते हैं और अपने उदाहरणों पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।” हालांकि आज भी विश्वास को चुनौतियों और रुकावटों का सामना करना पड़ता है, लेकिन कोई भी चीज इसकी सुंदरता और सच्चाई को कम नहीं कर सकती। हम इसे हर उम्र के उन पुरुषों और महिलाओं की बढ़ती संख्या में देख सकते हैं जो प्रभु को जानना चाहते हैं और बपतिस्मा लेना चाहते हैं।”

ईश्वर का वरदान पहचानने के लिए प्रार्थना और चिंतन आवश्यक

पोप लियो से सवाल पूछने के लिए चार युवाओं को चुना गया था। पहला सवाल बेंजामिन का था, जो 22 साल का एक विद्यार्थी और काथलिक था। उसने उनसे पर्यावरण की समस्याओं और हिंसक लड़ाई के बीच “आत्मविश्वास बनाए रखने तथा उम्मीद बनाए रखने” के बारे में सलाह मांगी।

बेन्जामिन के सवाल कि “हमारी लगातार बदलती दुनिया के भटकाव से खुद से, दूसरों से और ईश्वर से दूर होने से हम कैसे बच सकते हैं?” का जवाब देते हुए पोप ने कहा कि यह एक अहम सवाल है जो ख्रीस्तीय जीवन के एक बुनियादी पहलू को छूता है: मसीह के साथ हमारे रिश्ते की मजबूती और, इसके द्वारा, हमारे अंदर और दूसरों के साथ एकता की भावना। इस बारे में, युवाओं के एक महान प्रशिक्षक ने एक बार कहा था कि “जीवन की एकता की जड़ दिल में है, यह दिल की बात है, यह ईश्वर का दिया हुआ एक वरदान है, जिसे विनम्रता से मांगा जाना चाहिए।”

संत पापा ने युवाओं के सामने स्वीकार किया कि आधुनिक युग ने संस्कृति, औषधि, स्वास्थ्य देखभाल, तकनीकी और संचार के क्षेत्र में जीवन को बेहतर सुविधाएँ प्रदान की हैं लेकिन उन्हें आज की चुनौतियों से भी अवगत कराया। जिन्हें हम नजरअंदाज नहीं कर सकते और जिनका सामना हमें साफ दिमाग और समझ के साथ करना चाहिए। जैसा कि बेंजामिन ने कहा, हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो हमेशा जल्दी में रहती है, नई चीजों के लिए बेचैन रहती है, और बिना रोक-टोक के बदलाव की दीवानी है। यह लगातार बदलाव से पहचानी जाती है, चाहे वह फैशन, दिखावे, रिश्तों, विचार अथवा व्यक्ति के पहचान का कोई आयाम ही क्यों न हो।

प्रेम सबसे बढ़कर

इन सबसे बढ़कर प्रेम ही जीवन को स्थिरता देता है: ईश्वर के प्रेम का अनुभव, और आपसी प्यार का पवित्र एवं ज्ञान देनेवाला अनुभव। एक-दूसरे से प्यार करने के लिए बदलाव के प्रति खुलापन के साथ साथ, निष्ठा, स्थिरता और दैनिक जीवन में त्याग करने की इच्छा भी चाहिए। सिर्फ इसी तरह बेचैनी को शांति मिल सकती है, और अंदर का खालीपन भर सकता है, “न कि क्षणिक चीजों, हजारों लाइक, बनावटी और कभी-कभी हिंसक रिश्तों से।” संत पापा ने कहा, “हमें दिल के दरवाजे को इन चीजों से साफ करना होगा, ताकि कृपा की सेहतमंद, जीवन देनेवाली हवा वापस आकर उसके कमरों को ताजा और नया कर सके, तथा पवित्र आत्मा की तेज हवा एक बार फिर हमारे जीवन के "पाल" को भर दे, और हमें सच्ची खुशी की ओर ले जा सके।”

इसके लिए संत पापा ने युवाओं और दीक्षार्थियों को प्रार्थना करने की सलाह दी। “प्रार्थना, कुछ पल शांत रहने और चिंतन करने की जरूरत है ताकि करने और कहने, मैसेज, रील और चैट की भागदौड़ को शांत किया जा सके, और सच में एवं सच्चे दिल से साथ रहने की खूबसूरती को और गहराई से महसूस किया जा सके एवं उसका आनन्द लिया जा सके। इस बारे में, संत कार्लो अकुतिस ने यूखरिस्त को “स्वर्ग का सीधा रास्ता” और पावन संस्कार की आराधना को धूप सेंकने जैसा बताया, जो आत्मा को स्वस्थ कर सकता है।

पास्का के दौरान बपतिस्मा संस्कार लेने की तैयारी के बारे में एथन के सवाल का जवाब देते हुए संत पापा ने पवित्र सप्ताह को दुःखभोग के रहस्यों पर चिंतन करते हुए, आत्मा की आवाज सुनने और अपने दिल में क्या हो रहा है, उसे जानने, अपने जीवन के अतीत और वर्तमान पर शांत और गहरे चिंतन का मौका बनाने की सलाह दी।

उन्होंने ख्रीस्त से मिले जीवन के वरदान का साक्ष्य देने के लिए उदार बनने हेतु प्रोत्साहित किया।

दुःख से आहत दुनिया के लिए आशा के साक्षी

सोफी के सवाल कि “उन लोगों के लिए उम्मीद के गवाह कैसे बनें जो दुःख से आहत हैं और विश्वास की रोशनी और आराम खोने रहे हैं संत पापा ने कहा, “चुनौतियों का सामना करते हुए, येसु ने हमें सलाह दी है: “इस बात की चिंता मत करो कि तुम्हें कैसे बोलना है या क्या कहना है क्योंकि बोलने वाले तुम नहीं हो, बल्कि तुम्हारे पिता की आत्मा तुम्हारे द्वारा बोलता है।” (मती.10:19–20) वे सुसमाचार के लिए सहे गए अत्याचार की बात कर रहे थे, लेकिन हम उनके शब्दों को उस हालात में भी लागू कर सकते हैं जिसमें हमें उदारता बनने के लिए बड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ता है। संत पापा ने ठोस साक्ष्य देने और आशा के शब्द बोलने के लिए अभ्यास करने की आवश्यकता बतायी, क्योंकि वे अचानक नहीं आ सकते बल्कि ईश्वर के साथ एक गहरे रिश्ते से आते हैं, जिसमें हमें सबसे पहले जीवन के बुनियादी जवाब मिलते हैं। अगर हम ईश्वर की कृपा को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, और इस तरह प्यार के इस रिश्ते को एक साझा उपहार बनाते हैं, तो हम भरोसा कर सकते हैं कि सही शब्द और काम करने के लिए जरूरी ताकत सही समय पर आएगी।

आगे संत पापा ने संत अगुस्टीन के शब्दों का हवाला दिया, “प्यार करो और जो चाहो वो करो” (उपदेश 7) दूसरे शब्दों में, प्यार ईश्वर और दूसरों के लिए एक मुफ्त वरदान है; पास रहें और दूर न हों, तब भी जब हम हर समस्या या मुश्किल को हल नहीं कर सकते। प्यार और विश्वास के साथ नजदीक रहें। अतः संत पापा ने युवाओं से कहा, “मोनाको एक खूबसूरत देश है, लेकिन इसकी असली खूबसूरती आपसे आती है, जब आप उन लोगों की आँखों में देख पाते हैं जो परेशान हैं या जो शहर की रोशनी के बीच खुद को खोये हुए महसूस करते हैं।”

इसी तरह संत देवोता को अपना जीवन पूरी तरह निछावर करने की शक्ति मिली, और संत कार्लो अकूतिस पवित्रता के अपने रास्ते पर चले, एवं वेब की दुनिया में भी रोशनी की एक किरण छोड़ गए।

प्यारे नौजवानों, अपना सब कुछ — अपना समय, अपनी शक्ति — ईश्वर और अपने भाइयों एवं बहनों को देने से न डरें, खुद को पूरी तरह प्रभु और दूसरों के लिए लगा दें। सिर्फ इसी से जीवन में हमेशा रहनेवाली खुशी और इसका गहरा अर्थ मिलेगा। दुनिया को हमारे समय की गलतियों को दूर करने, अपनी चुनौतियों का सामना करने और सबसे बढ़कर, ईश्वर एवं पड़ोसी से प्यार करने के मीठा स्वाद को फिर से खोजने के लिए आपकी गवाही की जरूरत है।

मसीह में सम्पूर्ण और सच्चा जीवन जीयें

नव-दीक्षार्थियों को जो बपतिस्मा की तैयारी कर रहे हैं पोप ने कहा, “आप सभी को जिन्हें यह कृपा का वरदान पहले ही मिल चुका है, मैं अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आप मसीह में एक सम्पूर्ण और सच्चा जीवन जिएँ, तथा सभी की भलाई के लिए विश्वास, आशा, न्याय और उदारता में शांति निर्माता बनें। आप इस कलीसिया और इस देश के युवा चेहरे हैं। मोनाको एक छोटा देश है, लेकिन यह एकजुटता और उम्मीद की एक बड़ी जगह हो सकता है।”

संत पापा ने उन्हें अपने दैनिक कार्यों तथा सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यों में सुसमाचार को शामिल करने की सलाह दी ताकि बेजुबानों को आवाज मिल सके, जिससे देखभाल की संस्कृति फैले। उन्होंने कहा, “हर चीज को ईश्वर का वरदान बनायें और हर बात को एक मिशन की तरह जिएँ जो आपको मसीह में दोस्त बनने और इस यात्रा में एक-दूसरे के वफादार साथी बनने के लिए बुलाता है।”

अंत में माता मरियम, संत देवोता और संत कार्लो अकूतिस की मध्यस्थता को सिपूर्द करते हुए संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

 

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28 मार्च 2026, 15:58