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मोनाको में संत पापा लियो का पवित्र मिस्सा बलिदान मोनाको में संत पापा लियो का पवित्र मिस्सा बलिदान  (@Vatican Media)

संत पापा लियोः हम दूसरों के लिए खुशी लायें

संत पापा लियो 14वें ने मोनाको की प्रेरितिक यात्रा के अंतिम दौर में मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए मोनाको विश्वासी कलीसिया को दूसरे के जीवन में खुशी लाने का संदेश दिया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने मोनाको की एकदिवसीय यात्रा के अंतिम पड़ाव में लुईस द्वितीय के खेल मैदान में यूखारीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

संत पापा ने धर्मविधि हेतु निर्धारित संत योहन के सुसमाचार पर चिंतन व्यक्त करते हुए कहा कि सुसमाचार जिसका श्रवण हमने किया है येसु के विरूद्ध एक क्रूर सजा का जिक्र करता है। यह हमारे लिए उनके मृत्युदंड कि योजना को व्यक्त करता है। उनके संग ऐसा क्यों होता हैॽ ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने लाजरूस को मृतकों में  से जीवित किया, उन्होंने अपने मित्र को जीवन दान दिया, जिसकी कब्र में उन्होंने आंसू बहाये, उन्होंने मरियम औऱ मर्था के दुखों में अपने को साझा किया। येसु, जो हमें मृत्यु के दंश से बचाने के लिए इस दुनिया में आये, उन्हें स्वयं मृत्युदंड दिया जाता है। यह एक भाग्य का सवाल नहीं है बल्कि एक निर्णय और सावधानी पूर्ण ढ़ंग से लिया गया सोच विचार है।

भय का प्रभाव

कैफस और शास्त्रियों की सभा का यह निर्णय राजनीति से उत्पन्न होता है जो भय में आधारित है-यदि येसु निरंतर लोगों की आशा को जागृत करते रहे और उनके दुखों को खुशी में बदले रहे, तो “रोमी सम्राज्य आकर” उनके देश का विनाश कर देंगे। नाजरेत के मसीह को पहचाने के बदले- जो ख्रीस्त के रुप में बहु-प्रतीक्षित रहे- धार्मिक नेताओं ने उन्हें अपने लिए एक भय स्वरूप देखा। संहिता के शिक्षकों की दृष्टि को हम विकृत पाते हैं, और वे स्वयं संहिता का उल्लंघन करते हैं। ईश्वर की प्रतिज्ञा को भूल, वे निर्दोष की हत्या करना चाहते हैं, यह उनमें भय को प्रकट करता है जो शक्ति में बने रहने की चाह रखते हैं। यद्यपि, उन्होंने संहिता के नियम को भूला दिया था जो कहा है, “हत्या मत करो”, ईश्वर अपनी प्रतिज्ञा को नहीं भूलते हैं, जो दुनिया को मुक्ति हेतु तैयारी करती है। ईश्वर की कृपा ने उस खूनी फैसले को प्रेम का सबसे बड़े साक्ष्य बना दिया: कैफस चाहे कितना भी बुरा क्यों न रहा हो, उसने “भविष्यवाणी की कि येसु पूरे राष्ट्र के लिए मरने वाला है।”

संत पापा लियो का मिस्सा बलिदान, मोनाको में
संत पापा लियो का मिस्सा बलिदान, मोनाको में   (@Vatican Media)

दो शक्तियाँ

संत पापा ने कहा कि हम इस भांति यहांँ दो विरोधाभाव शक्तियों को पाते हैं, एक तरफ ईश्वर के रहस्य का प्रकटीकरण, जो  अपने को सर्वशक्तिमान ईश्वर और मुक्तिदाता के रुप में व्यक्त करते हैं तो वहीं दूसरी ओर शक्तिशाली अधिकारियों की गुप्त योजना जो बेहिचक हत्या का विचार रखते हैं। क्या यह आज भी नहीं होता हैॽ जहाँ से शक्तियाँ आती हैं, वहाँ हम येसु की निशानी को पाते हैं,जो हमें अपना जीवन देते हैं। यह संकेत लाजरूस को फिर से जीवित होने में प्रकट होता है, जो उन घटनाओं की सबसे करीब भविष्यवाणी है जो बाद में ख्रीस्त के दुखभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान में प्रकट होगी। पास्का में, पुत्र, पवित्र आत्मा की शक्ति से पिता के कार्यों को पूरा करते हैं। ईश्वर ने शुरू में कुछ नहीं से जीवन लाया उसी भांति समय की पूर्णत में वह सबों को मृत्यु से जीवन प्रदान करते हैं, जो सृष्टि को नष्ट करती है।

करूणा और फेंकने की संस्कृति

हर समय और हर स्थान में हमारी खुशी और शक्ति हमारे लिए मुक्ति से आती है। वास्तव में, हमारी अपनी कहानियाँ येसु की कहानी में शामिल हैं, जो कमज़ोरों और दबे-कुचले लोगों की ज़िंदगी से शुरू होती हैं। आज भी, दुनिया भर में बेगुनाहों को मारने की कितनी साज़िशें रची जाती हैं। उनकी मौत को न्यायसंगत साबित करने के लिए कितने बहाने बनाये जाते हैं। फिर भी, बुराइयों की उपस्थिति में, ईश्वर का दिव्य न्याय हमें कब्रों से बचाता है, जैसे कि लाजरूस के संग हुआ जहाँ हम उसे नया जीवन मिलता पाते हैं। येसु हमारे जीवन में आशा स्थापित करते हुए दुखों से निजात दिलाते हैं। वे हमारे कठोर हृदय को सेवा की शक्ति से परिवर्तित करते और अपने सर्वव्यापी सच्चे नाम करूणा को प्रकट करते हैं। यह वही करूणा है जो दुनिया को बचाती है। यह हर कमजोर मानव के जीवन को पोषित करती है, उस समय से जब वह गर्भ में पलता और  अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक पहुंचता है। करूणा की संस्कृति फेंकने की संस्कृति का बहिष्कार करती है जैसे कि संत पापा फ्रांसिस ने हमें शिक्षा दी।

विश्वासी भक्त मिस्सा बलिदान में
विश्वासी भक्त मिस्सा बलिदान में   (@Vatican Media)

जैसे कि हमने सुना, नबी की वाणी हमारे लिए ईश्वर की मुक्ति योजना को प्रकट करती है। प्रथम पाठ में नबी एजेकिएल हमारे लिए ईश्वर की मुक्ति योजना को घोषित करते हैं और हम उसे ईश प्रजा के पवित्रिकरण में अनुभव करते हैं, जो परिवर्तन की ओर अपनी यात्रा करते हैं, यह कि केवल व्यक्तिगत या अपने स्वार्थ तक सीमित रहता है बल्कि इसके द्वारा हम ईश्वर और पड़ोसियों के संग अपने संबंध को बदलता पाते हैं। 

हमारा पवित्रिकरण

संत पापा ने कहा कि मुक्ति हमारे पवित्रिकरण का रूप लेती है जहाँ हम अपने को देवमूर्तियों से शुद्ध होता पाते हैं। लेकिन ये देवमूर्तियाँ क्या हैंॽ नबी इसे वे सारी चीजों बतलाते हैं जो हमारे हृदय को गुलाम, धोखा और भ्रष्ट करती हैं। शब्द “देवमूर्ति” का अर्थ “तुच्छ विचार” कहने का अर्थ एक छोटा दृष्टिकोण, जो न केवल ईश्वर की महिमा को एक वस्तु के रूप में, बल्कि मानवीय बुद्धि को भी छोटा बनाता है। मूर्तिपूजक इस भांति वे संकीर्ण विचार वाले व्यक्ति होते हैं जो अपनी दृष्टि तक सीमित होते हैं जो उन्हें काला बना देती है। और इस भांति, इस दुनिया की महान और अतिसुन्दर चीजें देवमूर्तियाँ बन जाती और गुलामी का रूप धारण करती है- उनके लिए नहीं जो उन चीजों के अभाव को पाते हैं बल्कि जो उसमें डूबे रहते और अपने पड़ोसी को तकलीफों और दुख में छोड़ देते हैं। मूर्ति से मुक्ति इस भांति शक्ति से बचना है जो राज करती है, धन जो लालच उत्पन्न करती और सुंदरता के रूप में दिखावापूर्ण घमंड से अपने को मुक्त करना।

मोनाको में संत पापा लियो का मिस्सा

ईश्वर हमारा परित्याग नहीं करते हैं

संत पापा ने कहा कि इन प्रलोभनों की स्थिति में ईश्वर हमारा परित्याग नहीं करते हैं, लेकिन वे उसके पास आते जो अपने को कमजोर और दुःख में पाते हैं, वे जो यह विश्वास करते हैं कि दुनिया की मूर्तियाँ उन्हें बचा सकती हैं। जैसे कि संत अगुस्टीन अपनी शिक्षा में कहते हैं, “मानव अपने में स्वतंत्रता होता है जब वह नम्रता का उदाहरण देने वाले में विश्वास करता है।” यह हमारे लिए येसु का जीवन है जो हमारी मुक्ति हेतु मानव बनें। हमें सजा देने के बदले उन्होंने प्रेम से बुराई पर विजय पाई, इस भांति उन्होंने उस महान प्रतिज्ञा को पूरा किया, “मैं उन्हें शुद्ध करूँगा, वे मेरी प्रजा होंगे, और मैं उनका ईश्वर होऊँगा। (एजे,37.23)। ईश्वर हमें सच्चे विश्वास में मूर्तिपूजा से बहार निकालते हैं, उन्होंने हमें मृत्यु से जीवन प्रदान कर हमारे इतिहास को बदल दिया।

संत पापा लियो का आशीर्वाद
संत पापा लियो का आशीर्वाद   (@Vatican Media)

मूर्ति पूजा में गुलामी

इसलिए, प्रिय भाइयो और बहनों, संत पापा ने कहा कि बहुत सारे अन्यायों की उपस्थित में जो लोगों को दुख देते हैं और युद्ध जो देशों को तोड़ता है, नबी येरेमियस के शब्द जिस हम स्त्रोत भजन में सुनते हैं शक्तिशाली रूप में ध्वनित होता है, “मैं उनके शोक को आनंद में बदल दूंगा, मैं उन्हें खुशी से भर दूंगा, उनके दुःख में मैं उन्हें सांत्वना प्रदान करूंगा। (येरे.31.13)। मूर्ति पूजा लोगों को एक-दूसरे के प्रति गुलाम बनाती है, लेकिन उससे छुटकारा उन्हें पवित्र करता है। यह कृपा का एक उपहार है जो हमें ईश्वर की संतान और एक-दूसरे के लिए भाई-बहनें बनाता है। यह उपहार हमारे वर्तमान को प्रज्वलित करता है, क्योंकि जो युद्ध द्वारा इसे खून से रंग देते हैं, वे शक्ति और धन की पूजा का नतीजा है। हर ज़िंदगी को छोटा करना मसीह के शरीर को ज़ख्मी करना है। हम हथियारों के शोर और लड़ाई की तस्वीरों के आदी न हों। शांति सिर्फ़ शक्ति की तराजू नहीं है, यह शुद्ध हृदयों का कार्य है, उन लोगों का जो दूसरों को भाई-बहनों के रूप में देखते हैं, जिनकी हमें रक्षा करनी है, न कि शुत्र जिन्हें हमें हराना है।

विश्ववासी भक्तजन
विश्ववासी भक्तजन   (@Vatican Media)

दूसरों के लिए खुशी लायें

संत पापा ने कहा कि मोनाको की कलीसिया शांति में जीने और ईश्वर की आशीष का साक्ष्य देने हेतु बुलायी जाती है। अतः, प्रिय भाइयो एवं बहनों, आप विश्वास के द्वारा दूसरों के लिए खुशी लायें, सच्ची खुशी, जो किसी शर्त से नहीं जीती जाती, बल्कि प्रेम से बांटी जाती है। ईश्वर का प्रेम इस खुशी का उद्गम है: नए और कमज़ोरों के लिए प्रेम,  जिसका हमेशा स्वागत और देखभाल किया जाना चाहिए, युवाओं और बुज़ुर्गों के लिए प्रेम, जिन्हें ज़िंदगी की कठिनाइयों में हिम्मत मिलनी चाहिए,  सेहतमंद और बीमार लोगों के लिए प्रेम, जो कभी-कभी अकेले होते हैं, जिन्हें हमेशा ध्यान देने वालों की ज़रूरत होती है। आपकी संरक्षिका कुंवारी मरियम, छोटों और गरीबों का स्वागत करने और सम्मानजनक स्थान देने में आपकी मदद करें, जिससे सबको साथ लेकर चलने में हम विकास कर सकें।

दुनिया की लम्बी चालीसा, जहाँ हम युद्दधों और मूर्तिपूजा के कारण हृदयों में उदासीकरण को पाते हैं, येसु हमें अपने पास्का के लिए तैयार करते हैं। मानव जाति इस घटना की निशानी है- लाजरूस, क्योंकि उसे कब्र से बाहर निकाला गया, हम जो क्षमा प्राप्त पापी हैं, क्रूसित पुनर्जीवित येसु, जो मुक्ति के जनक हैं। वे हमारे लिए मार्ग, सत्य और जीवन हैं” (यो.14.6) जो हमारी तीर्थयात्रा और दुनिया में कलीसिया की प्रेरिताई को बनाए रखते हैं, वे ईश्वर हैं जो हमें जीवन देते हैं। यह काम बहुत बड़ा है और नामुमकिन लगता है, जब तक कि हम अपना जीवन अपने पड़ोसी को न दें। यह एक रोमांचक और फायदेमंद काम है, और सुसमाचार इसमें हमारे कदमों के लिए ज्योति बनता है।  

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28 मार्च 2026, 17:30