अल्जीरिया में पोप : ‘भविष्य शांति के पुरूषों और महिलाओं का है’
वाटिकन न्यूज
अल्जीरिया, सोमवार, 13 अप्रैल 2026 (रेई) : अफ्रीकी देशों की अपनी लम्बी प्रेरितिक यात्रा में पोप लियो 14वें 13अप्रैल को अल्जीरिया पहुँचे और उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरूआत मकाम एचाहिद शहीद स्मारक से की।
मकाम इचाहिद (शहीदों का स्मारक) एक मशहूर स्मारक है, जिसका उद्घाटन फरवरी 1982 में आजादी की 20वीं सालगिरह पर किया था। 90 मीटर से भी ऊँचा यह स्मारक खजूर के तीन पत्तों को दिखाता है, जो फ्रांसीसी उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देता है। इसे बनाने में कई साल लगे और इसे कनाडाई आर्किटेक्ट ब्रूस चार्ल्स अबुद ने अल्जीरियाई विशेषज्ञ के साथ मिलकर बनाया। तीन पत्तों के नीचे एक दीपक हमेशा जलता रहता है।
संत पापा ने स्मारक स्थल पर अपने सम्बोधन में कहा, “अल्जीरिया के प्यारे भाइयो एवं बहनो, आप सभी को शांति मिले!”
मैं ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने मुझे संत पेत्रुस के उतराधिकारी के रूप में आपके देश का दौरा करने का अवसर प्रदान किया है, जहाँ संत अगुस्टीन के आध्यात्मिक बेटे के रूप में दो बार यात्रा कर चुका हूँ। लेकिन, मैं सबसे पहले आपके सामने एक भाई के रूप में खड़ा हूँ, ताकि इस मुलाकात के द्वारा, हमारे दिलों को करीब लानेवाले प्यार के बंधन को फिर जोड़ सकूँ।
आजादी, सम्मान और संप्रभुता की लड़ाई
पोप ने कहा, “आप सभी को देखकर, मुझे एक मजबूत और युवा चेहरा दिखता है, जिनका आतिथ्य और भाईचारा मैंने अक्सर महसूस किया है। अल्जीरियाई दिल में, दोस्ती, भरोसा और एकजुटता सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि ऐसे मूल्य हैं जो मायने रखते हैं और आपके एकजुटता के जीवन को गर्मजोशी और ताकत देते हैं।”
अल्जीरिया एक महान देश है, जिसका परंपराओं से भरा एक लंबा इतिहास है, जो संत अगुस्टीन के समय और उससे भी पहले से है। यह एक दर्दनाक इतिहास भी है, जो हिंसा के दौर से भी जाना जाता है। फिर भी, आप आपनी महानता की भावना के द्वारा – जो मुझे लगता है कि यहाँ और अभी भी जिंदा है –हिम्मत और ईमानदारी के साथ इन मुश्किलों को पार कर पाए हैं।
इस स्मारक पर हमारी उपस्थिति अल्जीरिया के इतिहास और उन लोगों की आत्मा को श्रद्धांजलि देती है जिन्होंने इस देश की आजादी, सम्मान और संप्रभुता के लिए लड़ाई लड़ी।
इस जगह पर, हमें याद रखना चाहिए कि ईश्वर हर देश के लिए शांति चाहते हैं: एक ऐसी शांति जो सिर्फ लड़ाई-झगड़े की गैर-मौजूदगी न हो, बल्कि न्याय और सम्मान की अभिव्यक्ति हो। यह शांति, जो हमें भविष्य का सामना मेल-मिलाप की भावना से करने देती है, जो सिर्फ माफी से ही मुमकिन है। आजादी के लिए असली लड़ाई पक्के तौर पर तभी जीती जाएगी जब हमारे दिलों में अंततः शांति विराजेगी।
सच्ची आजादी माफ करने से आती है
संत पापा ने कहा, “मुझे मालूम है कि माफ करना कितना मुश्किल है। लेकिन, जैसे-जैसे दुनिया भर में लड़ाई-झगड़े बढ़ते जा रहे हैं, वैसे ही हम पीढ़ी दर पीढ़ी नाराजगी पर नाराजगी नहीं बढ़ा सकते।
भविष्य शांति पसंद पुरुषों और महिलाओं का है। आखिरकार, न्याय की जीत होगी, ठीक वैसे ही जैसे हिंसा, चाहे कितनी भी बुरी क्यों न लगे, कभी भी अंतिम शब्द नहीं होगी।”
इस देश में, जहाँ संस्कृतियाँ और धर्म एक दूसरे से मिलते हैं, आपसी सम्मान ही वह रास्ता है जो सभी को साथ चलने में मदद करता है। अल्जीरिया, अपनी जड़ों में मजबूत और अपने जवान लड़के और लड़कियों की उम्मीद में अटल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय एवं भूमध्यसागर के किनारों पर स्थिरता और बातचीत में योगदान देता रहे।
सांस्कृतिक और धार्मिक मेलजोल की भूमि
हर देश के पास इतिहास, संस्कृति और विश्वास की एक अनोखी विरासत होती है। अल्जीरिया को भी यह समृद्धि मिली है, जिसने मुश्किल समय में उसे संभाला है और भविष्य में भी उसे रास्ता दिखाती रहेगी। ईश्वर पर विश्वास आपकी विरासत में एक खास जगह रखता है। सचमुचे, विश्वास हर इंसान के जीवन को रोशन करता है, परिवारों को सहारा देता है और भाईचारे की भावना जगाता है। जो देश ईश्वर से प्यार करता है, उसके पास सच्ची दौलत होती है, और अल्जीरिया के लोग इस हीरे को अपने खजानों में से एक मानते हैं। हमारी दुनिया को ऐसे लोगों की जरूरत है — ऐसे पुरुष और महिलाओं की जो विश्वास रखते और न्याय एवं एकता चाहते हैं। इसी वजह से, भाईचारे और मेल-मिलाप की चाहत रखनेवाली मानवता के सामने, यह हमारे लिए एक बड़ा तोहफा और पवित्र फर्ज है कि हम पूरे यकीन के साथ यह घोषणा करें कि हम हमेशा भाई-बहनों के रूप में एक हैं, एक ईश्वर की संतान!
येसु के सवाल
संत पापा ने गौर किया कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ऐसी दौलत ढूंढते हैं जो खत्म हो जाती, धोखा देती और निराश करती है, और उससे भी अधिक दुःख की बात है कि वह इंसान के दिल को खराब कर देती है, जिससे जलन, दुश्मनी और झगड़े पैदा होते हैं। इन लोगों से, येसु यही सवाल दोहराते हैं जो उन्होंने दो हजार साल पहले पूछा था, “मनुष्य को इस से क्या लाभ यदि वह सारा संसार प्राप्त कर ले, लेकिन अपना जीवन गँवा दे?” (मती.16:26)। यह हर किसी के लिए एक जरूरी सवाल है। जिन शहीदों का हम यहाँ सम्मान करते हैं, उन्होंने पहले ही अपना जवाब दे दिया है। उन्होंने अपनी जान गँवाई लेकिन ऐसा करते हुए, उन्होंने अपने लोगों के प्यार के लिए उसे अर्पित कर दिया। उनकी मिसाल अल्जीरिया के लोगों और हम सभी को हमारी यात्रा में सहारा दे, क्योंकि सच्ची स्वतंत्रता सिर्फ विरासत में नहीं मिलती, इसे हर दिन नए सिरे से चुना जाता है।
संत पापा ने येसु द्वारा अपने शिष्यों को कह गये पर्वत प्रवचन या धन्यताओं के साथ समाप्त किया।
3)"धन्य हैं वे, जो अपने को दीन-हीन समझते हैं! स्वर्गराज्य उन्हीं का है।
4)धन्य हैं वे जो नम्र हैं! उन्हें प्रतिज्ञात देश प्राप्त होगा।
5)धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं! उन्हें सान्त्वना मिलेगी।
6)घन्य हैं, वे, जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं! वे तृप्त किये जायेंगे।
7)धन्य हैं वे, जो दयालू हैं! उन पर दया की जायेगी।
8)धन्य हैं वे, जिनका हृदय निर्मल हैं! वे ईश्वर के दर्शन करेंगे।
9)धन्य हैं वे, जो मेल कराते हैं! वे ईश्वर के पुत्र कहलायेंगे।
10)धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण अत्याचार सहते हैं! स्वर्गराज्य उन्हीं का है। (मती. 5:3-10).
और अंत में उनके हार्दिक स्वागत के लिए धन्यवाद दिया और अपनी आशीष प्रदान की।
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