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आल्जीरिया में सन्त पापा लियो का व्यस्त अति कार्यक्रम

अपनी यात्रा के पहले सार्वजनिक प्रभाषण में सन्त पापा लियो ने वहां मौजूद लोगों को याद दिलाया कि “भविष्य शांति प्रिय पुरुषों और महिलाओं का है”, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि “सच्ची स्वतंत्रता मात्र विरासत में नहीं मिलती; इसका चुनाव हर दिन नए सिरे से करना पड़ता है।”

वाटिकन सिटी

आल्जीरिया, मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 (रेई, एपी): सन्त पापा लियो 14 वें की 13 अप्रैल से 23 अप्रैल तक जारी अफ्रीका की प्रेरितिक यात्रा के प्रथम पड़ाव आल्जीरिया में सोमवार को सर्वप्रथम उन्होंने शहीद स्मारक मकाम-एकाहिद की भेंट की जो, 1954 से 1962 तक अल्जीरियाई स्वतंत्रता संग्राम में, अपने प्राण न्यौछावर करनेवालों की याद में निर्मित किया गया है।

अपनी यात्रा के पहले सार्वजनिक प्रभाषण में सन्त पापा लियो ने वहां मौजूद लोगों को याद दिलाया कि “भविष्य शांति प्रिय पुरुषों और महिलाओं का है”, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि “सच्ची स्वतंत्रता मात्र विरासत में नहीं मिलती; इसका चुनाव हर दिन नए सिरे से करना पड़ता है।”

राष्ट्राधिकारियों से

सोमवार को ही सन्त पापा ने आल्जीरिया के राष्ट्रपति भवन में आल्जीरियाई गणतंत्र के राष्ट्रपति से मुलाकात की और तदोपरान्त देश के वरिष्ठ राजनैतिक, प्रशासनिक एवं नागर अधिकारियों तथा राजनयिकों को अपना सन्देश दिया। इसमें उन्होंने सरकारी अधिकारियों से कहा कि वे सबकी प्रतिष्ठा का सम्मान करें तथा झगड़ों को बढ़ाने के बजाय अन्यों के दर्द के प्रति संवेदनशील बनें।

आल्जीरियर्स का ग्रेट मस्जिद

सोमवार अपराहन सन्त पापा लियो 14 वें ने आल्जीरियर्स के ग्रेट मस्जिद की भेंट की जहाँ उन्होंने कुछ क्षण मौन चिन्तन किया। मस्जिद में मौलवी मुहम्मद मामौन आल कसीमी उनके साथ थे। मौलवी कसीमी से बातचीत में सन्त पापा ने आपसी सम्मान और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करने के महत्व पर ज़ोर दिया। मस्जिद का दौरा खास इसलिए रहा क्योंकि अल्जीरिया एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां ईसाई समुदाय एक छोटा लेकिन जीवंत अल्पसंख्यक समुदाय है। आल्जीरिया की कुल आबादी चार करोड़ 68 लाख है जिनमें ख्रीस्तीय धर्मानुयायी मात्र दो लाख हैं। काथलिकों की संख्या लगभग 9000 है।  

स्वागत एवं मैत्री केन्द्र

सोमवार को ही सन्त पापा ने बाब-एल-ओएद में अगस्टीनियन मिशनरी धर्मबहनों द्वारा संचालित स्वागत एवं मैत्री केन्द्र की भेंट कर 1994 और 1996 के बीच अल्जीरियाई  ब्लैक डेकेड के नाम से कुख्यात गृहयुद्द को दौरान मारी गई धर्मबहनों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। 90 के दशक के इस गृहयुद्ध में लगभग ढाई लाख लोग हताहत हुए थे। मारे गये लोगों में 19 काथलिक धर्मानुयायी थे, जिनमें तिबरिन मठ के साथ ट्रैपिस्ट मठवासी और अगस्टीनियन धर्मसंघ की दो धर्मबहनें भी शामिल थीं, जिन्हें इस्लामिक विद्रोहियों ने 1996 में अपहृत कर मर डाला था।   

इस अवसर पर सन्त पापा ने कहा कि इन शहीदों का जीवन ऑगस्टिनियन आध्यात्मिकता में गहराई से अंकित एक पहलू को दर्शाता है, और वह है: साक्षी बनना, यहाँ तक कि शहादत तक भी। सन्त पापा लियो ने धर्मबहनों को उनकी सक्रिय मौजूदगी और उदार कार्यों के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

मरियम महागिरजाघर  

सोमवार सन्ध्या सन्त पापा लियो ने अफ्रीका की महारानी मरियम को समर्पित महागिरजाघर में अल्जीरियाई समुदाय से मुलाकात की जिन्होंने जयनारों और संगीत की धुनों के साथ उनका भावपूर्ण स्वागत किया। तेज़ हवा और बारिश भी खचाखच भरे महागिरजाघर के बाहर खड़े लोगों को नहीं रोक पाई। सन्त 1800 ई. में फ्रांस के औपनिवेशिक शासन के दौरान उक्त महागिरजाघर का निर्माण रोमी-बीजेन्टाईन शैली में किया गया था। यहाँ सन्त पापा ने विभिन्न धर्मों के लोगों के साक्ष्य सुनें जिनमें एक मुस्लिम महिला और एक पेंटेकोस्टल स्टूडेंट शामिल थे, जिन्होंने ईसाई और मुस्लिम  होने के बावजूद  भ्रतृत्व भाव से एकसाथ रहने अपने अनुभवों को साझा किया। साक्ष्य प्रस्तुत करनेवालों से सन्त पापा ने कहा कि ऐसी दुनिया में “जहां बंटवारा और युद्ध देशों, समुदायों और यहां तक ​​कि परिवारों में भी दर्द और मौत फैलाते हैं”, उनका “एकता और शांति का अनुभव एक ज़रूरी संकेत है”।

डूबे हुए के प्रति श्रद्धा 

इस अवसर पर सन्त पापा ने महागिरजाघर के निकट स्थित एक स्मारक पर प्रार्थना की जो यूरोप पहुंचने की कोशिश में जहाज़ के डूबने से मारे गए आप्रवासियों की याद में निर्मित किया गया था। अल्जीरिया की प्रेरितिक यात्रा का आधिकारिक आदर्श वाक्य सन्त पापा लियो की शुरुआती पंक्ति है, और वह है “शांति आपके साथ हो” और वाटिकन के अनुसार, शांति और ईसाई-मुस्लिम सहअस्तित्व इस यात्रा का एक सामान्य सन्देश और शीर्षक है।

अल्जीयर्स के महाधर्माध्यक्ष फ्राँस के कार्डिनल जॉन-पॉल वेस्को ने कहा कि किसी भी दिन,  महागिरजाघर में आने वाले 10 में से 9 लोग मुस्लिम होते हैं। सन्त पापा लियो के आगमन की पूर्व सन्ध्या कार्डिनल वेस्को ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया, “यह अति सुन्दर है हम अलग-अलग धर्मों के अनुयायी होने के बावजूद एक साथ भाई-बहन बन सकते हैं और एक समाज बना सकते हैं।” उन्होंने कहा कि “जब से यह देश आज़ाद हुआ है, हमारी कलीसिया यही कर रही है।”

महागिरजाघर की भेंट के उपरान्त सन्त पापा आल्जियर्स स्थित परमधर्मपीठीय प्रेरितिक दूतावास लौटे जहाँ उन्होंने आल्जीरिया के काथलिक धर्माध्यक्षों के साथ मुलाकात कर आल्जीरिया में अपने प्रथम दिन का व्यस्त कार्यक्रम समाप्त किया।

सन्त पापा लियो 14 वें की आल्जीरिया प्रेरितिक यात्रा के विषय में कार्डिनल जॉन-पॉल वेस्को ने कहा यह सन्त पापा की एक प्ररितिक यात्रा तो है ही किन्तु इसके साथ-साथ यह उनकी एक बहुत ही व्यक्तिगत यात्रा है। उनका अगस्टीनियन धर्मसमाज, पाँचवी सदी की आरम्भिक ख्रीस्तीय कलीसिया के धार्मिक और दार्शनिक दिग्गज, हिप्पो के सन्त अगस्टीन की शिक्षाओं से प्रेरित है,  जिनका जन्म आज के अल्जीरिया में हुआ था और जिन्होंने अपने जीवन के पाँच साल को छोड़कर बाकी सब वहीं बिताए थे।

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14 अप्रैल 2026, 11:45