आप्रवासी और शरणार्थी के 112वें विश्व दिवस के संदेश का शीर्षक
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 9 अप्रैल 2026 (रेई) : पोप लियो 14वें ने 112वें विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस के लिए अपने संदेश की विषयवस्तु चुनी है “जो मेरे नाम पर बालकों में से एक का स्वागत करता है, वह मेरा स्वागत करता है।” जिसे रविवार, 27 सितंबर, 2026 को मनाया जाएगा।
समग्र मानव विकास के लिए गठित परमधर्मपीठीय विभाग ने एक विज्ञप्ति जारी कर, पोप लियो 14वें के 112वें विश्व आप्रवासी और शरणार्थी दिवस के संदेश का शीर्षक प्रकाशित किया।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि पोप लियो 14वें ने आप्रवासी और शरणार्थी के 112वें विश्व दिवस के अपने संदेश के लिए संत मती रचित सुसमाचार के वाक्यांश से शीर्षक चुना है, शीर्षक है “जो मेरे नाम पर बालकों में से एक का स्वागत करता है, वह मेरा स्वागत करता है।” (मती. 18:5)। इसके द्वारा, पोप आप्रवासियों में शामिल नाबालिगों के लिए कलीसिया की चिंता व्यक्त करना चाहते हैं, और सुसमाचार हमें सिखाता है कि उनमें से हर एक का स्वागत करना हमारा फर्ज है।
आगे कहा गया है कि यह पहली बार नहीं है जब पोप ने इस मुद्दे पर अधिकार के साथ बात की है, लेकिन मौजूदा पलायन की स्थिति नई चुनौतियाँ पेश करती है जो हमारे बीच सबसे कम उम्र के लोगों के अधिकारों और सम्मान को गंभीर रूप से खतरे में डालती हैं और इसके लिए तुरंत और असरदार जवाब की जरूरत है। इसलिए, यह संख्या या प्रतिशत पर चर्चा करने का मामला नहीं है, क्योंकि “सिर्फ एक व्यक्ति भी” बहुत मूल्यवान है।
विश्व दिवस की शुरुआत
विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस की शुरुआत 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने से कुछ ही महीने पहले हुई थी। 20वीं सदी की शुरुआत से विदेश में पलायन करनेवाले लाखों इताली लोगों की हालत देखकर, पोप पीयुस 10वें ने सभी ख्रीस्तीयों से आप्रवासियों के लिए प्रार्थना करने को कहा।
कुछ महीने बाद, उनके बाद आए पोप बेनेडिक्ट 15वें ने इताली आप्रवासियों के लिए प्रेरितिक कार्य में आध्यात्मिक और आर्थिक मदद देने हेतु आप्रवासी दिवस की शुरूआत की।
1952 में, आप्रवासी दिवस का मतलब विस्तृत और अंतरराष्ट्रीय हो गया, और दुनिया भर की कलीसियाओं से कहा गया कि वे पूजन पद्धति वर्ष में इस दिन को मनाने के लिए एक तारीख चुनें।
संत जॉन पौल द्वितीय पहले पोप थे जिन्होंने 1985 से हर साल एक संदेश जारी किया, जिसमें लोगों की कुछ खास सच्चाइयों और मुश्किलों की ओर ध्यान दिलाया गया, और कलीसिया को कार्रवाई करने के लिए आमंत्रित किया गया।
2004 में, आप्रवासियों और खाना बदोश लोगों की प्रेरितिक देखभाल के लिए परमधर्मपीठीय समिति ने इस दिन को शरणार्थियों तक बढ़ा दिया, और इसे आप्रवासियों और शरणार्थियों का विश्व दिवस कहा।
संत पापा जॉन पौल द्वितीय के कहने पर, 2005 से, विश्वव्यापी कलीसिया प्रभु प्रकाश महापर्व के बाद दूसरे रविवार को आप्रवासी और शरणार्थियों का विश्व दिवस मनाती आयी।
14 जनवरी 2018 को 104वें विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस पर पोप फ्रांसिस ने घोषणा की कि यह दिन अब से सितंबर के आखिरी रविवार को मनाया जाएगा।
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