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संत पापा लियो पेन्तेकोस्त के मिस्मा बलिदान में संत पापा लियो पेन्तेकोस्त के मिस्मा बलिदान में  (ANSA)

संत पापा लियोः आत्मा हमें प्रज्वलित करते और साहस प्रदान करते हैं

संत पापा लियो ने संत पेत्रुस महागिरजाघर में पेन्तेकोस्त महापर्व का मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए कि पेन्तेकोस्त हमारे लिए सचमुच नये विधान के त्योहार की भांति प्रतीत होता है, ईश्वर और दुनिया के लोगों के बीच का विधान।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने 24 मई को पेन्तेकोस्त महापर्व का मिस्सा बलिदान वाटिकन के संत पेत्रुस  महागिरजाघर में अर्पित किया।  

संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा कि पेन्तेकोस्त के महोत्सव से पास्का अवधि अपनी पूर्णतः को पहुंचती है। मुक्तिविधान की इस घटना को चिन्हित करने के लिए आज का सुसमाचार हमें सप्ताह के “प्रथम दिन की ओर ले चलता है” (यो. 20.19) अर्थात उस नये दिन की ओर जब पुनर्जीवित येसु अपने शिष्यों को दिखलाई दिये, उन्होंने उन्हें “अपनी हाथ और अपनी बगल दिखाई।” येसु अपने महिमामय शरीर को व्यक्त करते हैं, विशेषकर अपने घावओं को, जो क्रूसित होने के चिन्ह थे। दुःखभोग की ये निशानियाँ, जो शब्दों से अधिक प्रभावकारी थे, अब परिवर्तित हो गये हैं, वे जो मर गये थे सदैव के लिए जीवित हैं।

येसु में नया जीवन

संत पापा ने कहा कि येसु को देखकर, शिष्यों को भी नया जीवन प्राप्त होता है। उन्होंने अपने को व्यारी की कोठरी में बंद कर लिया था, वे भयभीत थे, लेकिन येसु उनके बीच में आते और खड़े हो जाते हैं, यद्यपि दरवाजे बंद थे, और यह उन्हें खुशी से भर देता है। वे हमारी मृत्यु से होकर गुजरते हैं, उस स्थित में जब हमारे लिए कुछ नहीं रह गया था कब्र को खोलते हैं। येसु अपने कार्यों को अपने वचनों के साथ पूरा करते हैं, “तुम्हें शांति मिले” और उसके तुरंत बाद, वे अपने शिष्यों के ऊपर फूंकते हैं। पुनर्जीवित येसु जीवन से भरे हैं। इस बात को साबित करने के बाद कि वे सच्चे व्यक्ति के रूप में जीवित हैं, वे प्रेमी पुत्र की भांति जीवन प्रदान करते हैं, जो पिता के पुत्र स्वरूप हमारे लिए भाई और मुक्तिदाता बने। उसी अंतिम व्यारी की कोठरी में जहाँ उन्होंने अनंत विधान नये विधान की स्थापना की, येसु पवित्र आत्मा को उड़ेलते हैं। अंतिम व्यारी का स्थल और धोखा अपने में बदल जाता है- प्रेरितों की कब्रें सारी कलीसिया के लिए पुनरूत्थान का गर्भ बन जाती हैं। पेन्तेकोस्त का महोत्वस इस भांति पास्का और येसु ख्रीस्त के शरीर का पर्व बन जाता है जो कृपा में हमारे लिए सबकुछ है।

इस रहस्य को मनाते हुए संत पापा लियो तीन बातों पर चिंतन किया।

क्षमा का उद्गम

सर्वप्रथम, पुनर्जीवित की आत्मा शांति की आत्मा है। वास्तव में, उनके पास्का रहस्य में, ख्रीस्त ईश्वर और मानवता के मध्य में शांति स्थापित करते हैं, और पवित्र आत्मा इस शांति को हमारे हृदयों में उड़ेलते और पूरे विश्व में प्रसारित करते हैं। यह शांति क्षमा से उत्पन्न होती है और हमें क्षमा की ओर अग्रसर करती है। यह हमारे लिए स्वयं येसु से मिले क्षमादान से शुरू होती है, जिन्हें हमने धोखा दिया, दोषारोपित किया और क्रूस पर चढ़ाया। वे हमें अपने प्रेम से आश्चर्यचकित करते हैं, पुनर्जीवित येसु हमें स्वयं कहते हैं, “यदि तुम किसी के पापों की क्षमा करेगे तो वे अपने पापों से मुक्त किये जायेंगे।”(यो.20.23)। इन शब्दों के द्वारा, येसु हमें एक दिव्य कार्य में सम्मिलित करते हैं, क्योंकि केवल ईश्वर हमारे पापों को क्षमा कर सकते हैं। यह अधिकार हमारे लिए एक वैश्विक मेल-मिलाप की निशानी स्वरुप दी गई है- ईश्वर अपनी शांति की आत्मा को इतिहास के एक छोर से दूसरे के लिए उड़ेलते हैं, क्योंकि जिन्होंने सभों को मुक्ति दिलाई वे किसी को अलग नहीं करते हैं। वास्तव में, पवित्र आत्मा सृष्टि के शुरू से जीवन देने वाले ईश्वर हैं, जो जल पर विचरन करते थे और अब वे सृष्टि को नवीन बनाते हैं, वे विश्व के इतिहास को बदले हैं। पेन्तेकोस्त हमारे लिए सचमुच नये विधान के त्योहार की भांति प्रतीत होता है, ईश्वर और दुनिया के लोगों के बीच का विधान। वहीं ऊपर से गर्जन की आवाज, वायु और जीभ के रूप में आग जिसे अंतिम व्यारी की कोठरी में सुना जाता है पुराने व्यावस्थान में सिनाई की निशानियों स्वरुप दिखाई देती है, हम ईश्वर के नये विधान को हमारे हृदयों में अंकित पाते हैं, जो पवित्र आत्मा के द्वारा प्रेम के अक्षरों में ख्रीस्त और कलीसिया के शरीर में अंकित है।

ईश्वर का विधान-शांति का नियम

संत पापा ने कहा कि यह विधान शांति का नियम है- हम इसमें प्रेम के दो आयमी आज्ञा को पाते हैं जिसे आत्मा हर हृदय की धड़कन में याद दिलाते हैं। हमारे हृदय के द्वारा, इसलिए हम प्रार्थना कर सकते हैं, “आओ पवित्र आत्मा” क्योंकि वह हमें पहले ही दिया गया है। हम उनकी कामना कर सकते हैं, क्योंकि हमें पहले ही उनकी प्रतिज्ञा की गई है। हम उनका स्वागत कर सकते हैं क्योंकि वे हमारे हृदय के मधुर अतिथि हैं।

प्रेरिताई की आत्मा

पुनर्जीवित की आत्मा प्रेरिताई की आत्मा है। इस दूसरे विन्दु पर चिंतन करते हुए संत पापा लियो ने कहा कि जैसे पिता ने मुझे भेजा है वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूँ।” (यो.20.21) इसके परिणाम स्वरुप हम येसु ख्रीस्त की प्रेरिताई की ओर आकर्षित होते हैं, वह प्रेरिताई जो हमारे लिए ईश्वर से आती और पवित्र आत्मा के द्वारा ईश्वर की ओर लौटती है- जो पिता और पुत्र से आती है जो एक तृत्वमय ईश्वर में आराधी और महिमान्वित होती है। पवित्र आत्मा ख्रीस्त का जीवित प्रेम है जो हमें पूर्ण बनाता है, हमें प्रेरित करता और प्रेरिताई में हमें पोषित करता है। प्रेरितों में सुसमाचार घोषित करने की शक्ति में, वही आत्मा मानवता को मुक्ति के वचनों की शिक्षा देती है। प्रेरितों ने पुनर्जीवित की सांसों को अपने में पाया है, यह घोषणा उनके ओंठो से निकलती है, जिसे हम पेत्रुस की आवाज में और उनके संग होने वालों में पाते हैं। पेन्तेकोस्त के दिन, प्रेरित क्रूसित और पुर्जीवित येसु को घोषित करना शुरू करते हैं। दूसरे शब्दों में, “ईश्वर के महान कार्य” जिसे हम मुक्ति में संक्षेपित पाते हैं, जो विश्वास से शुरू होता है। वास्तव में, पवित्र आत्मा का सर्वप्रथम कार्य हममें विश्वास है जिसके द्वारा हम यह घोषित करते हैं कि “येसु ही ईश्वर हैं।” (1 कुरि.12.3) यह विश्वास जीवित और अच्छे कार्य में व्यक्त किया जाता है, जिसे हम हर करूणा के कार्य और गुणों में पाते हैं। अतः ईश्वर का कार्य, हममें से हर कोई है, जो इस दुनिया में आया है, हम ईश्वर के भोज में शामिल होने को बुलाये जाते हैं, उनके वचनों को सुनने और हर जगह उसका साक्ष्य देने को कहे जाते हैं।

सुसमाचार में सहयोग

प्रिय मित्रों, संत पापा लियो ने कहा कि हम सचमुच में सुसमाचार के सहयोगी हैं-सारी दुनिया इसकी नायक है, केवल इसका अभिभावक मात्र नहीं। पवित्र आत्मा की शक्ति से हमारी घोषणा आशा और खुशी में होती है क्योंकि हम- हाँ, हम सभी दुनिया को नवीन बनाते हैं, उनकी ज्योति और नमक बनते हैं। निश्चित रुप से हमारी योग्यता के कारण नहीं लेकिन ईश्वर के वचनों के कारण जो हम पापियों को पवित्र करते, हमारे कोढ़ को शुद्ध करते, और उस प्रेरित को परिवर्तित करते जो उन्हें अस्वीकार करता है। हम इसे स्पष्ट रुप में देख सकते हैं, कि परिवर्तनें दुनिया में नया जीवन नहीं लाती हैं लेकिन गलती और हिंसा के कारण उसे उम्रदार बना देते हैं। इसके बावजूद, पवित्र आत्मा हमारी बुद्धि को प्रज्वलित करते और हमारे हृदयों में नयापन लाते हैं। ऐसा करते हुए वे इतिहास को बदलते हैं, उसे मुक्ति हेतु खोलते हैं, जो ईश्वर की ओर से हरएक के लिए दिया जाने वाला उपहार है। कलीसिया की प्ररिताई इसका साक्ष्य देती है, इसके द्वारा दुनिया की दुविधा को वह ईश्वर और मानव के बीच में एकता स्वरूप परिवर्तित करती है।

पेन्तेकोस्त के मिस्सा बलिदान में संत पापा लियो

इस प्रेरिताई की शुरूआत ईश्वर की सच्चाई और मानव के बारे में घोषित करते हुए होती है क्योंकि पुनर्जीवित की आत्मा सच्चाई की आत्मा है, जिसके बारे में स्वयं ईश्वर हम से प्रतिज्ञा करते हैं, और अपनी कलीसिया की एकता की मांग करते हैं- यह एकता ईश्वर के प्रेम में आधाऱित है जो प्रेम के स्रोत हैं। आत्मा जिन्होंने नबियों के माध्यम कहा है, सदैव सत्य में एकता को प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि वे हममें समझ, एकजुटता और जीवन की एकरूपता लाते हैं। जैसे कि संत अगुस्टीन हमें अपनी शिक्षा में कहते हैं. “पवित्र आत्मा की चाह यही है कि यह उनकी उपस्थिति की निशानी बनें।” भाषाओं के उपहार को हम एक विश्वास के संदर्भ में समझते हैं। सहायक हमें इस समझ में उत्पन्न होने वाले विध्न से बचाते हैं, इसके साथ ही विभाजन,दिखावा और उन बातों को दूर करते हैं जो सुसमाचार की ज्योति को धूमिल करती है। इस तरह ईश्वर के द्वारा मिलने वाली सच्चाई सभों के लिए मुक्ति का एक शब्द बनती है, एक संदेश जो हर संस्कृति को अंदर से परिवर्तित करती है।

संस्कार पवित्रता के स्रोत

संत पापा ने कहा कि वास्तव में, पुनर्जीवित की आत्मा एक बार हमेशा के लिए हमें नहीं दिया जाता बल्कि यह निरंतर होता है। जैसे कि यूखारीस्तीय जीवित ख्रीस्त की सजीव उपस्थिति है जो हमें सदैव पोषित करते हैं, ठीक उसी भांति पवित्र आत्मा अपनी कृपाओं को बपतिस्मा में हमें प्रदान करते हैं, जो हमें ख्रीस्तीय बनाता है, दृढ़करण में, जो हमें साक्षी के रुप में स्थापित करता है, और अभिजंयन के द्वारा वे हमें प्रेरित और ईश प्रजा हेतु चरवाहा बनाता है। हर संस्कार में वे हमारे लिए पवित्रता का स्रोत बनते जो प्रार्थना के माध्यम उपहारों और कृपाओं, करूणा के कार्यों और ईश वचन के अध्याय को विकसित करते हैं। जैसे कि प्रेरित हमें शिक्षा देते हैं, पवित्र आत्मा सभों को जन सामान्य की भलाई हेतु दिया गया है। यही कारण है कि हम कलीसिया हैं, एक शरीर जो ईश्वर में निवास करते और दुनिया की सेवा करते हैं। आत्मा का धन्यवाद जो हम सभों के लिए सच्ची शांति लाते हैं, येसु ख्रीस्त की  वही सच्चाई जो हमें बचाती है।

आत्मा हेतु प्रार्थना

संत पापा कहा प्रिय मित्रों, उत्साही हृदय से, आइए हम आज पुनर्जीवित येसु की आत्मा से प्रार्थना करें जिससे वे हमें युद्ध की बुराई से बचाये, जो शक्ति से नहीं प्रेम की सर्वशक्तिमत्ता से जीती जा सकती है। हम निवेदन करें कि वे मानवता को दुःखों से मुक्त करें जो अकूत शक्ति से नहीं बल्कि अथक उपहार से होता है। हम प्रार्थना करें कि वे हमें येसु ख्रीस्त के नाम में घोषित मुक्ति के माध्यम पापों के जंजाल से मुक्ति प्रदान करें। यही वह कृपा है जो प्रेरितों में साहस भरती है; वह इसी तरह आज और हमेशा, कलीसिया की माता मरियम की मध्यस्थता के ज़रिए हममें भी साहस भरता रहे।

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25 मई 2026, 11:02