संत पापाः पवित्र आत्मा भातृत्व के भाव उत्पन्न करते हैं
वाटिकन सिटी
संत पापा लियो ने पेन्तेकोस्त महापर्व के अवसर पर विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के संग स्वर्गीय रानी प्रार्थना का पाठ किया।
संत पापा ने स्वर्गीय रानी प्रार्थना के पूर्व अपने संदेश में कहा कि आज पेन्तेकोस्त महापर्व के अवसर पर, हम पवित्र आत्मा के उपहारों पर चिंतन करने हेतु बुलाये जाते हैं, जो शुरुआती कलीसिया पर प्रचुर मात्रा में दिया गया था और आज उसके सदस्यों को फिर से, रोज दिन के जीवन की परिस्थितियों में ज्योति और साहस के रुप में प्राप्त होता है।
आइए हम पवित्र आत्मा की एक निशानी पर चिंतन करें जो की आज की धर्मविधि में हमारे सामने रखी जाती है- पवित्र आत्मा हमारे लिए द्वार खोलते हैं। सुसमाचार, वास्तव में, हमें यह बतलाता है, घर का द्वार जहाँ शिष्यगण यहूदियों के भय से एकत्रित बंद थे।” (यो 20.19) वहीं, प्रेरित चरित हम बतलाता है कि पवित्र आत्मा आंधी की तरह आते हैं, जो उन द्वारों को खोल दिया, जो उन्हें अपने से बाहर जाने और पुनर्जीवित प्रभु के सुसमाचार को घोषित करने को प्रेरित करता है।
संत पापा ने कहा कि हम अपने में पूछ सकते हैं- पवित्र आत्मा आज किस द्वार को खोलते हैं?
पहला द्वार हमारे लिए स्वयं ईश्वर है, क्योंकि पवित्र आत्मा ईश्वर के रहस्य को हमारे लिए खोलते हैं, जैसे कि येसु हमें उसे व्यक्त करते हैं। अपने पवित्र आत्मा के उपहार द्वारा, ईश्वर हमें सच्चा विश्वास प्रदान करते हैं, वे हमें सुसमाचार को समझने हेतु मदद करते हैं, वे हमें अपने को पड़ोसियों में व्यक्त करते और स्वयं जीवन को उनके संग साझा करने में मदद करते हैं। पवित्र आत्मा ईश्वर का व्यक्तिगत अनुभव करने में हमारी मदद करते हैं, येसु में मिलने में और केवल नियमों का अनुपालन में नहीं बल्कि वे हम अपने को आंतरिक रुप में पहचाने हेतु, और उनकी उपस्थिति को हमारे रोज दिन के जीवन की निशानियों में देखने में सहायता करते हैं।
कलीसिया का द्वार खुला है
दूसरा द्वार अंतिम व्यारी की कोठरी है जो कलीसिया है। आत्मा की आग के बिना, कलीसिया अपने में भय की कैदी बन जाती है, दुनिया की चुनौतियों के सामने वह भयभीत अपने में बंद होकर रह जाती है, इस भांति, वह बदले समय की चुनौतियों के सामने वार्ता में प्रवेश करने के अयोग्य हो जाती है। पवित्र आत्मा कलीसिया का द्वार खोलती है जिससे वह सभों का स्वागत और आतिथि-सत्कार करे, यहाँ तक की उनके लिए भी जो ईश्वर और पड़ोसी के लिए अपने द्वार बंद कर दिये हैं, आशा और खुशी में जीवन जीने हेतु बंद हो गये हैं। जैसे कि संत पापा फ्रांसिस हमें याद दिलाते हैं, “हम आशीष और प्रोत्सहित देने वाले कलीसिया बनने हेतु बुलाये गये हैं...कलीसिया का द्वार सभों के लिए खुले हैं।”
अंततः पवित्र आत्मा हमारे हृदय के द्वारों को खोलते हैं, वे हमारी मदद करते हैं जिससे हम अपने में कठोरता, स्वार्थ, अविश्वास और पूर्वाग्रह पर विजय प्राप्त कर सकें, वे हमें ईश्वर की संतान स्वरूप जीवनयापन करने में और एक दूसरे के लिए भाई-बहनों के रूप में जीवनयापन करने को मदद करते हैं। जहाँ ईश्वर का आत्मा निवास करता है वहाँ व्यक्तियों में, समुदायों और पृथ्वी के लोगों के बीच भातृत्व के भाव उत्पन्न होते हैं, और सब एक ही प्रेम की चर्चा करते हैं जो हमारी विभिन्नताओं के बावजूद हमें एकता में बनाये रखता है।
पवित्र आत्मा का आहृवान
संत पापा लियो ने कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों, आज भी हमारे समय में, विशेषकर पेन्तेकोस्त को इस दिन में, हम पवित्र आत्मा का आहृवान करते हुए उन्हें सभी दरवाजाओं को खोलने का निवेदन करें जो अब भी बंद हैं। हमें ईश्वर को पिता के रूप में खोजने की जरुरत है जो हमें प्रेम करते हैं, जिससे हम एक ऐसी कलीसिया का निर्माण कर सकें जहाँ हरजन अपने में सहज महसूस करता है, और हम एक भातृत्वमय विश्व का निर्माण कर सकें जहाँ सभों के बीच में शांति वास करती है।
प्रथम शिष्यों की भांति, हम अपने को कुंवारी मरियम की विचवई में सुपूर्द करते हैं, जो पवित्र आत्मा का निवास स्थल और कलीसिया की माता है।
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