पोप लियो ने रोम भिखारियेट के संविधान का अद्यतन किया
वाटिकन न्यूज
स्वर्गीय पोप फ्राँसिस द्वारा रोम भिखारियेट में किए गए सुधार के तीन साल बाद, पोप लियो 14वें ने मोतू प्रोप्रियो कोनफिरमा फ्रात्रेस तओस के साथ प्रेरितिक संविधान इन एक्लेसियारूम कोमुनियोने को अपडेट करने के लिए हस्ताक्षेप किया है।
इस दस्तावेज में, पोप ने मसीह द्वारा पेत्रुस को सौंपे गए मिशन को याद किया है—“अपने भाइयों को भी सँभालें” (लूक 22:32)—और रोम की कलीसिया की खास भूमिका को दोहराया है, जिसे संत पेत्रुस की प्रेरिताई से निकलनेवाली कलीसिया के रूप में दिखाने के लिए बुलाया किया गया है। इस नजरिए से, पोप कहते हैं, कलीसिया की संरचना को भी लगातार मिशन और ईश्वर के लोगों की सेवा की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए।
यह हस्ताक्षेप इसी जरूरत से आया है। जनवरी 2023 में इन एक्लेसियारूम कोमुनियोने के लागू होने के बाद, भिखारियेट के प्रेरितिक और प्रशासनिक अनुभव ने कुछ ऐसे पहलुओं को सामने लाया जिनकी समीक्षा की जरूरत थी। इसी वजह से, इस साल 25 फरवरी को, पोप ने एक खास कार्य दल बनाने का आदेश दिया था, जिसे मौजूदा कानून की जांच करने और कोई भी जरूरी अपडेट सुझाने का काम सौंपा गया।
पोप फ्राँसिस द्वारा बढ़ावा दिए गए भिखारियेट के नवीनीकरण को निर्देशित करनेवाले बुनियादी सिद्धांत वैसे ही हैं, जिसकी शुरुआत रोम की कलीसिया के मिशनरी और सिनॉडल स्वभाव से हुई है। सबसे खास नई बातों में से एक है विश्वासियों की सह-जिम्मेदारी के सिद्धांत को और स्पष्ट तरीके से बनाना, जिन्हें उनकी बुलाहट और करिश्मे के हिसाब से, कलीसियाई समुदाय और मिशन में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया है।
ये बदलाव मुख्य रूप से भिखारियेट के प्रशासन से जुड़े हैं। नया संविधान अलग-अलग निकाय के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को आसान और कारगर बनाता है। कार्डिनल विकर की भूमिका भिखारियेट के प्रमुख और धर्मप्रांत के आम जज के तौर पर निर्धारित की गई है, जबकि कार्यालय और प्रशासनिक संरचना का समन्वय मॉडरेटर कूरिये को सौंपा गया है, जिसे पोप ने पांच साल के अवधि के लिए नियुक्त किया है। संविधान, वाइसजेंट और सहायक धर्माध्यक्ष के बारे में कुछ प्रावधान के साथ-साथ पल्ली पुरोहित और सहायक पल्ली पुरोहित की नियुक्ति की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करता है।
एक दूसरा विभाग भागीदारी और विचार-विमर्श के लिए एक निकाय से जुड़ा है। धर्माध्यक्षीय समिति को एक स्थायी विचार-विमर्शवाली निकाय के रूप में भी बताया गया है, जिसे मुख्य प्रेरितिक एवं प्रशासनिक मामलों में कार्डिनल विकर की मदद करने के लिए बुलाया गया है। दूसरी धर्मप्रांतीय निकाय को चलानेवाले नियमों को भी इसी तरह आसान बनाया गया है।
2023 में शुरू की गई ऑफिस और सेवाओं की संरचना काफी हद तक वैसी ही है। यही बात भिखारियेट न्यायाधिकरण पर भी लागू होती है, जिनके काम पर कोई असर नहीं पड़ा है। हालांकि, स्वतंत्र पर्यवेक्षी कमीशन को चलानेवाले नियमों में बदलाव किया गया है: संविधान एक आंतरिक निरीक्षण निकाय के तौर पर इसकी भूमिका को पुष्ट करता है, जबकि इसकी जिम्मेदारियों और काम करने के तरीकों की विस्तृत परिभाषा को नियमों के एक अलग समूह में भेजा गया है।
मकसद वही है जो 2023 के सुधार में बताया गया था: भिखारियेट को कलीसिया के सुसमाचार प्रचार मिशन का समर्थन करने, कलीसिया के साथ मेलजोल बढ़ाने और रोम धर्मप्रांत के प्रेरितिक जीवन में साथ देने के लिए अधिक असरदार जरिया बनाना।
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here.
