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2026.06.26 कार्डिनल मंडल के साथ उद्घाटन पवित्र मिस्सा अर्पित करते संत पापा लियो 14वें 2026.06.26 कार्डिनल मंडल के साथ उद्घाटन पवित्र मिस्सा अर्पित करते संत पापा लियो 14वें  (@Vatican Media)

कार्डिनलमण्डल सभा के उदघाटन पर सन्त पापा लियो का प्रवचन

वाटिकन स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में शुक्रवार प्रातः सन्त पापा लियो 14 वें की अध्यक्षता में कार्डिनलमण्डल की सभा के उदघाटन के उपलक्ष्य में ख्रीस्तयाग अर्पित किया गया।

वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 26 जून 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में शुक्रवार प्रातः सन्त पापा लियो 14 वें की अध्यक्षता में कार्डिनलमण्डल की सभा के उदघाटन के उपलक्ष्य में ख्रीस्तयाग अर्पित किया गया। इस अवसर पर अपने प्रवचन में सम्पूर्ण विश्व से रोम आये कार्डिनलों को सन्त पापा ने आमंत्रित किया कि वे अपने जीवन, समुदाय, अपनी प्रेरितिक योजनाओं एवं अनुभवों और साथ ही अपनी समस्त खुशियों एवं दुखों को ईश्वर को अर्पित करें।   

अनुग्रह और सत्य

सन्त पापा ने कहा कि “हमारी भावनाएँ एवं हमारे विचार एक साथ मिलकर प्रभु ख्रीस्त में एक प्रकाशमान केन्द्र को पाते हैं, जो सन्त योहन रचित सुसमाचार के अनुसार कहते हैं, “मैं सच्ची दाखलता हूँ।“ उन्होंने कहा, “येसु के द्वारा अनुग्रह और सत्य हमारे जीवन में प्रवेश करता और हमें अंदर से नया बनाता है। ये दिव्य वरदान उस कार्डिनलमण्डल सभा के लिए भी जीवन देने वाला पोषण है जिसका हम आज उद्घाटन कर रहे हैं।“ सन्त पापा ने कहा कि सुसमाचार खुद इसके फल देने के लिए ज़मीन तैयार करते हैं, जैसा कि सन्त योहन रचित सुसमाचार के अनुसार, प्रभु येसु कहते हैं: “मुझ में रहो, और मैं तुम में”।

चेतावनी

सन्त पापा ने कहा कि एक ओर प्रभु येसु और गुरु हमें चेतावनी देते हैं कि “मुझसे अलग तुम कुछ नहीं कर सकते”, और दूसरी ओर चाहते हैं कि उनके शिष्य “बहुत फल” उत्पन्न करें, क्योंकि ईश्वर का अनुग्रह विकास को अवरुद्ध नहीं करता बल्कि उसे प्रोत्साहित करता है। सन्त योहन लिखते हैं,  सच में, हमेशा रहने वाला वचन इंसान बना ताकि सभी को “जीवन मिले और भरपूर” जीवन मिले।  उन्होंने कहा कि विश्वास से शुरू होने के बाद  यह जीवन छंटाई की मुश्किलों से भी मज़बूत होता है क्योंकि यह ईश पिता की ध्यान से की गई देखभाल से पोषित होता है।

प्रथम प्रेरितों का आदर्श

सन्त पापा ने प्रथम प्रेरितों, पेत्रुस और पौलुस, का उदाहरण देते हुए कहा, सन्त पेत्रुस और सन्त पौलुस हमें प्रोत्साहन देते हैं कि हम विश्वास की सच्ची स्वतंत्रता में साझेदार बने। सच तो यह है कि प्रभु येसु के साथ हमारा सम्बन्ध ही हमें पाप और भय से मुक्ति दिलाता है। येसु हमें अपना अनुसरण करने के लिये बुलाते और ख़ुद हमें प्रेरितों के उत्तराधिकारी बनने के लिये विश्व में भेजते हैं। अस्तु, सुसमाचार का प्रचार करना, संस्कारों का निष्पादन करना और खुद को प्रभु के झुंड के लिए समर्पित करना, इस हद तक पूरा और फलप्रद होता है कि हम भले गड़ेरिये में विश्वास करते हैं।      

विश्वास और स्वतंत्रता

सन्त पापा ने कहा कि विश्वास वह गुण है, जिसे कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, और जो कलीसिया को जीवन देता है क्योंकि यह वह कृपा है जो एक ही दाखलता की डालियों को पोषण देती है। जीवन्त कलीसिया वह कलीसिया है जो हमारे हृदयों में उँडेला गये पवित्र आत्मा के वरदान  द्वारा विश्वास करती और बहुत फल देती है।

सन्त पापा ने कहा कि इस तरह, जैसे ईश्वर की कृपा मनुष्यों की स्वतंत्रता से पहले आती है, वैसे ही कलीसिया का विश्वास हमारी अपनी आज़ादी से पहले आता है और इसके लिए एक जोशीली गवाही की ज़रूरत होती है। इस मिशन की शुरुआत और अंत येसु मसीह है। बाईबिल में निहित स्तोत्र ग्रन्थ के भजन 96 वें में लिखा हैः “प्रभु का नाम धन्य कहो, दिन- प्रतिदिन उसका मुक्ति विधान घोषित करो। राष्ट्रों में उसकी महिमा का बखान करो”।

शांति का वरदान

सम्पूर्ण विश्व के लिये एकता में शांति के वरदान की याचना करते हुए सन्त पापा ने कहा कि भले ही हम सभी लोगों को उस विश्वास के लिए आमंत्रित करते हैं जिसमें हम सचमुच में स्वतंत्र हैं, अन्तरराष्ट्रीय तनाव और झगड़े मानव परिवार को बुरी तरह घायल करते हैं। उन्होंने कहा कि  कलीसिया और विश्व में ऐसी पहलों और अनुभवों की कमी नहीं है जो मानव सम्मान, न्याय,  कानून की व्यवस्था और मानवीयता के लिए सम्मान की मांग करते हैं।

उन्होंने कहा कि वास्तव में ऐसे कई उदाहरण हैं, जो उम्मीद का एक ज़रिया है, क्योंकि यह ईश्वर के कार्यों की खूबसूरती को दर्शाते हैं, जिन्होंने हमारा सृजन, दुनिया में अपनी महिमा की निशानी के तौर पर अपनी छवि और प्रतिरूप में, किया है। उन्होंने कहा कि जब भी यह निशानी घायल होती है, हम सब घायल होते हैं। जब भी यह भ्रष्ट होती है, हम सब दुख उठाते हैं। जब भी यह खत्म होती है, हम सब टूटा हुआ महसूस करते हैं।

युद्ध मानवता के योग्य नहीं  

सन्त पापा ने कहा कि इसीलिये युद्ध कभी भी मानवता के योग्य नहीं है जिसे ईश्वर का आशीर्वाद कभी नहीं मिला, क्योंकि भले ही हम हाई-टेक हथियारों से लैस हों, सृष्टिकर्त्ता ने हमें इंसानों के तौर पर झगड़ों को सुलझाने के लिए समझदारी और स्वतंत्र इच्छा शक्ति का वरदान दिया है।

सन्त पापा ने कहा कि मानव परिवार की एकता अलग-अलग लोगों और देशों से पहले आती है, यह सिर्फ़ एक जैव-वैज्ञानिक तथ्य नहीं बल्कि एक नैतिक सिद्धांत भी है। उन्होंने कहा, शांति न्याय का कर्तव्य है क्योंकि हम एक मानव परिवार हैं, मानिफिका ऊमानितास, ऐसी शानदार मानवता जिसका मुखिया और उद्धारक येसु मसीह हैं।

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26 जून 2026, 11:26