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संत पापा लियो अस्सीसी में फ्रांसिसकन युवा सम्मेलन के दौरान मिस्सा पूजा में संत पापा लियो अस्सीसी में फ्रांसिसकन युवा सम्मेलन के दौरान मिस्सा पूजा में  (AFP or licensors)

संत पापा लियोः दूसरों के दुःख-दर्द का स्पर्श करें

संत पापा लियो 14वें ने 06 अगस्त, प्रभु के रूपांतरण पर्व के अवसर पर असीसी में आयोजित फ्रांसिसकन युवा सम्मेलन में भाग लेते हुए युवाओं के लिए मिस्सा बलिदान अर्पित किया। उन्होंने अपने प्रवचन में उन्हें दूसरों के दुःख, तकलीफों का स्पर्श करने को प्रोत्साहित किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने असीसी की एकदिवसीय प्रेरितिक यात्रा करते हुए फ्रांसिसकन युवा सम्मेलन में मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

संत पापा लियो ने मिस्सा बलिदान के दौरान प्रभु वचन के आधार पर युवाओं को दिये गये अपने संदेश में कहा कि प्रभु के रूपांतरण का त्योहार, जिसे हम आज मनाते हैं, ज्योति का एक रहस्य है जो हमारे मिलन को समृद्धि बनाता है- वह जो अपने में आनंदमय है यद्यपि यह वर्तमान और भविष्य से संबंधित बहुत सारे सवालों को हमारे लिए उत्पन्न करता है। सुसमाचार में ज्योति और छाया, शांति और शब्दों, आश्चर्य को हम समझ से परे एक विरोधाभाव स्वरुप पाते हैं। आज हम असीसी में हैं, एक शहर जिसकी तीर्थ असंख्य लोगों ने सदियों से की है क्योंकि यहाँ हर चीज फुसफुसाती है, जो हमारे जीवन को नया बनाते हुए ज्योति प्रसारित करती और विश्व को चंगाई प्रदान कर सकती है। हम यहाँ असीसी, कलारा और हजारों युवाओं के जीवन में परिवर्तन की शुरूआत को पाते हैं। उन्होंने सुसमाचार को अपनी सरलता में आलिंगन किया जिसे हम सिने ग्लोस्सा बिना चमक के कहा सकते हैं, जो येसु ख्रीस्त में नये जीवन की शुरूआत करती है।

संत पापा लियो का अस्सीसी में युवाओं के लिए मिस्सा
संत पापा लियो का अस्सीसी में युवाओं के लिए मिस्सा   (@Vatican Media)

संत पापा ने कहा कि हम यहाँ इतिहास और स्वयं किसी दिशा में जा रहते हैं उसे समझने हेतु आते हैं। सुसमाचार में हम इसके अर्थ को वास्तव में, एक मार्ग के रुप में देख सकते हैं। पेत्रुस, याकूब और योहन की भांति हमें भी येसु अलग लाते हैं, जो हमारे आंदर हैं। उनकी उपस्थिति हमारे लिए अर्थ रखती है। पर्वत के ऊपर प्रेरितगण येसु पर चिंतन करते हैं, जो उन्हें अपने भविष्य के बारे में बतलाते हैं, जिसे वे गलत रुप में समझते हैं। छः दिन बाद पेत्रुस, येसु अपने स्वामी को क्रूस के बारे में खुले रूप में कहते हैं क्योंकि वे मसीह और स्वयं अपनी महिमा की आशा रखते हैं। पेत्रुस विरोध की कुछ भी आशा नहीं करते हैं, वह स्वयं से यह नहीं पूछता कि महिमा का वास्तविक अर्थ क्या है। येसु के रुपांतरण में, ईश्वर स्वयं अपनी महिमा को प्रकट करते हैं, जो एक बादल के रुप में होता है जो उन्हें ढ़ंग लेता और उनकी रक्षा करता है। वे पुत्र की ओर इंगित करते और उन्हें सुनने का निमंत्रण देते हैं। जीवन का मार्ग हमारे लिए एक साथ उनका अनुसरण करने में प्राप्त होता है। इस मार्ग की सुन्दरता हमें एक नये आयाम, एक अभूतपूर्व तीव्रता की ओर ले चलती है, पेत्रुस वहाँ बने रहने की चाह रखते और उस दृश्य को लम्बें समय तक देखना चाहते हैं। वह उदारता में तीन तम्बू बनाने की पेशकश करते हैं जिससे येसु, मूसा और एलियस के बीच वार्ता जारी रहे। यद्यपि एक व्यक्ति को चाहिए कि वह वार्ता में संलग्न हो न कि एक मूकदर्शक मात्र बना रहें। वास्तव में, हम स्वामी के संग सुसमाचार पढ़ने के लिए बुलाये जाते हैं, हमारे समय की चीजों को देखने और उन्हें परिभाषित करने तथा उनके मार्ग का अनुसरण करते हुए निर्णयों को लेने हेतु कहे जाते हैं। हम यहाँ भय से मुक्त होने, संदेहों को दूर करते जो हमें बाधित करती है, जैसे कि प्रेरितों के संग हुआ। येसु हमें अपनी कहानी के संग जुड़ने को बुलाते हैं जिससे हम इतिहास के नये पन्नों को लिख सकें।

संत पापा लियो मिस्सा बलिदान में
संत पापा लियो मिस्सा बलिदान में

येसु नये जीवन की निशानी

संत पापा लियो ने कहा, जैसे कि हमने सुना,“उनका मुखमंडल सूर्य की तरह और उसके वस्त्र प्रकाश की तरह उज्जवल हो गये” (मत्ती.17.2), हम इसे पास्का की सुबह में देखते हैं जब एक स्वर्गदूत ने कब्र से पत्थर हटाया और पुनरूत्थान का संदेश घोषित किया। “उसका मुखमंडल बिजली की तरह चमक रहा था और उसके वस्त्र हिम की भांति उज्जवल थे।”(मत्ती 28.2) वे नये जीवन की ज्योति हैं, जिसकी ओर हम सभी आकर्षित होते हैं, जो भी कि अंधेरा हमें घेरे रहता है- और कभी-कभी हमारे अंदर निवास करता है। हम भोर की ज्योति को घोषित संतों जैसे कि संत फ्रांसिस और कलारा तथा बहुत से भाई-बहनों के जीवन में देखते हैं जो बुराई का उत्तर अच्छाई से देते हैं। हम अकेले नहीं है। हाल ही के दिनों में आप ने इसका अनुभव किया है, चूंकि आपने मिलन में एक दूसरे को सुना है, शोरगुल और युद्धों के शोर से परे वार्ता की कला में विकास किया है। आज हम येसु के जीवन पर चिंतन करते हैं जिनका रूपांतरण हुआ विशेष कर पिता से वार्ता करते हुए, वे जो उनके आगे आये- मूसा और एलियस - और उनके समकालीन शिष्यगण।

चढ़ावे की धर्मविधि
चढ़ावे की धर्मविधि   (ANSA)

कलीसिया में ईश्वर की आवाज

कलीसिया सुनते और निर्णयों को लेते हुए इस आयाम की ओर हमें अग्रसर करती है, जहाँ हम इस तथ्य को समझते हैं, हमें किसके लिए और कैसे जीने की जरुरत है। कलीसिया वह समुदाय है जहाँ हम ईश्वर की आवाज को पहचानते हैं जो कभी भी हमारे विचारों से मेल नहीं खाता है, हम पवित्र आत्मा की बातों को सुनने का साहस करते हैं जो उन्हें साहसिक और सृजनात्मक बनाते जो येसु का अनुसरण करने का चुनाव करते हैं। हम अपने को उनसे और दूसरों से अलग करते हुए कुरूप बनाते हैं, जबकि उनके संग संबंध स्थापित करने में हम परिवर्तित किये जाते हैं क्योंकि वे हमें पोषित करते और जीवन देते हैं। संत पापा ने कहा कि फ्रांसिसकन आध्यात्मिकता, जिसकी शिक्षा आप को मिली है, हमें ईश्वर और उनकी सारी सृष्टि के संग मूलभूत संबंध स्थापित करने का निमंत्रण देती है। पहले की अपेक्षा आज हमें उस एकता को स्थापित और सुरक्षित करने की जरुरत है।

मानीफिका ह्यूमानितास का संदेश

इस संदर्भ में अपने प्रथम विश्व प्रेरितिक पत्र मानीफिका ह्यूमानितास को संदर्भित करते हुए संत पापा लियो ने कहा कि हर पीढ़ी को अपने समय का निर्माण करने की विरासत मिली है, इतिहास को दिशा-निर्देशित करने का जिससे हर मानव के सम्मान की सुरक्षा की जाती हो, न्याय और भातृत्व को बढ़ावा दिया जाता हो। फिर भी, हर युग में हम अमानवीय और अन्याय की दुनिया के निर्माण की जोखिम को पाते हैं। जब कभी मानवता अपनी सच्ची पहचान खोने की जोखिम में पड़ जाती, हम ख्रीस्तीय अपनी आंखें देहधारण ईश्वर की ओर उन्मुख करते हैं, इस बात को जानते हुए कि “केवल शब्द के शरीरधारण रहस्य में मानव का रहस्य, वास्तव में, स्पष्ट होता है।” येसु ख्रीस्त में, यह मानवता अपनी सर्वश्रेष्ठता में मार्ग, सत्य और जीवन बनता है, जो हरएक के लिए पूर्णत की ओर बढ़ते हेतु मार्ग खोलता है।”

बलि परिवर्तन
बलि परिवर्तन   (ANSA)

नवीनता की शक्ति येसु में

प्रिय मित्रों, संत फ्रांसिस असीसी, अपनी मृत्यु के आठ सौ सालों बाद भी हमें अपनी ओर आकर्षित करते हैं क्योंकि मानवता की अद्वितीयता ने उन्हें ज्ञात मार्गों का परित्याग करने को प्रेरित किया जिससे वे नये मार्ग को खोज सकें जो येसु के अनुरूप हैं। हम असीसी के इस शहर को भी अपने में आंदोलनकारी पाते हैं। “संत कलारा का चुनाव अपने में और भी आकर्षक था, “एक लड़की जो फ्रांसिस की तरह बनना चाही, वह जीवन जीना चाही, एक नारी की भांति, उन स्वतंत्र भाइयों की तरह।” यह हमारे लिए ख्रीस्तयता की शक्ति है-नयी शुरूआत हेतु शक्ति और बहुत सारे नयी शुरूआतों के लिए शक्ति।

“जाना” अपने में एक प्रेरिताई

संत पापा ने येसु से कहा कि आज यूरोप और सारी दुनिया आप की ओर नये संतों की निगाहों से देखती है। “आप सुमसाचार के शब्दों में विश्वास करने का साहस करें,येसु के संग स्वतंत्रता में पूर्ण मानव बनें, बहन दरिद्रता का आलिंगन करें।”  आप के मिलन का शीर्षक है, “जाओ” अपने में एक प्रेरिताई है, उन मार्गों में भेजा जाना जिसके कोई नक्शें नहीं हैं, क्योंकि वे हृदय से सुनने द्वारा खुलते हैं, पवित्र आत्मा के आज्ञा पालन में और पुनर्जीवित के अनुसरण में जो हमें कहीं भी जाने को चुनते हैं। “जाओ, जाओ” उसके भी अच्छा, आओ हम चलें। हम हाशिए में पड़े लोगों के पास जाए, जहाँ अन्याय और कुछे लोगों की ढ़ीठाई बहुत से ईश्वरीय संतानों के सपनों का दमन करती है। संत पापा फ्रांसिस जिन्होंने असीसी के दरिद्र से अपने लिए प्रेरणा ली, हमें वैसे ख्रीस्तीय होने से बचे रहने को कहते हैं जो ईश्वर के घावों से अपने हाथों को दूर रखते हैं। यद्यपि येसु हमें मानवीय दुःखों का स्पर्श करने को कहते हैं, दूसरों के पीड़ित शरीर को छूने का आहृवान करते हैं। वे आशा करते हैं कि हम अपने व्यक्तिगत या सामुदायिक झरोखों को देखना बंद करें जो हमें मानवीय दुर्दशा में सुरक्षा प्रदान करती है।”

मिस्सा बलिदान में युवागण
मिस्सा बलिदान में युवागण   (@Vatican Media)

अति निकट रहने वालों से नसमझी

संत पापा लियो ने युवाओं से कहा कि हम अपने अति निकट रहने वालों के द्वारा भी नहीं समझे जायेंगे, जैसे कि संत फ्रांसिस के साथ हुआ। फिर भी, शक्ति की संस्कृति से अपने को मुक्त करना और दीवारों को ढ़हना जो मानव जाति को एक दूसरे से अलग करता है, हमारे परिवारों, शहरों या परंपराओं के प्रति कभी एक धोखा नहीं है। बल्कि, यह उन्हें उन भूतों से आजाद करना है, जो शत्रुओं से भय या अज्ञानता और हिंसा के कारण उत्पन्न होते हैं, जिन्हें वे अपनी सीमाओं के कारण हमारे ऊपर थोपना चाहते हैं। ईश्वर में विश्वास करना संत फ्रांसिस और कलारा की भांति खोज करना है, एक दुनिया की जहाँ हम भाई-बहनों की आनंद में सेवा करते हैं न कि उनका शोषण और शासन। यह सुरक्षा की एक दुनिया नहीं बल्कि आलिंगन है।

फ्रांसिसकन युवा सम्मेलनः असीसी में संत पापा लियो 14वें का मिस्सा

संत पापा लियो का युवाओं से आहृवान

प्रिय युवाओं,“आप अपने को समर्पित करें, प्रेम की सभ्यता हेतु, जिसकी पहली निशानी को आपने निस्वार्थ रूप में अपने को देने में अनुभव किया है, और जो येसु की निशानी के रुप में- असंख्य लोगों को शांति स्थापक के रुप में परिवर्तित करता है, जो आज भी मौत से भरी स्थितियों में जीवन की सेवा हेतु समर्पित हैं।” आप अपने अद्वितीय मानवता की श्रेष्ठ शक्ति से अपने को संयुक्त करें- आप का अध्ययन, कौशल, कार्य, मित्रता, प्रेम और प्रार्थना जिससे आप संत फ्रांसिस के जीवन दर्शन को विभिन्न रूपों में जी सकें। मुझे आशा है कि उनकी प्रार्थना आप को प्रिय है-

प्रभु मुझे शांति का साधन बना। जहाँ घृणा है वहाँ मैं प्रेम लाऊँ। जहाँ हिंसा है मैं वहाँ क्षमा लाऊँ। जहाँ विभाजन है वहाँ एकता लाऊँ। जहाँ असत्य है वहाँ सत्य लाऊँ। जहाँ संदेह है वहाँ विश्वास लाऊँ। जहाँ निराशा है, वहाँ आशा लाऊँ। जहाँ अंधेरा है वहाँ तेरी ज्योति जलाऊँ। जहाँ उदासी है वहाँ खुशी लाऊँ।

संत पापा लियो का आशीर्वाद
संत पापा लियो का आशीर्वाद   (ANSA)

हमें उन स्थानों में जाना है, लेकिन हम गौर करें हम वहाँ कैसे जायें-

हे प्रभु, मुझे कृपा दे कि मैं सांत्वना पाने के बदले सांत्वना दूं, समझे जाने के बदले दूसरों के समझूं, प्रेम किये जाने के बदले प्रेम करूं, क्योंकि देने में व्यक्ति प्राप्त करता है, अपने को त्यागने में व्यक्ति अपने को पाता है, क्षमा देने में व्यक्ति क्षमा किया जाता है, मरने में एक व्यक्ति अनंत जीवन को प्राप्त करता है।

संत पापा लियो ने कहा कि इन दिनो अस्सीसी की यादें अपने में गूंजित हों और जब आप यूरोप के विभिन्न देशों, अपने घरों में लौटे, आप पेत्रुस, याकूब और योहन की भांति बनें जो रूपांतरण के उपरांत पर्वत से उतरे। आप का वापस जाना चिंतन भरा हो, आप भविष्य हेतु खुलें और येसु के लिए समर्पित हों। वे आप पर विश्वास करते हैं, आप पर भरोसा करते और आप के संग रहते हैं। 

 

(दिलीप संजय  एक्का ये.स.)

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06 अगस्त 2026, 17:12