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संत पापा लियो बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो बुधवारीय आमदर्शन समारोह में  (ANSA)

संत पापा लियोः प्रार्थना कलीसिया की सांसें

संत पापा लियो 14वें ने ग्रीष्मकालीन आवकाश के बाद पुनः अपने कार्यक्रमों की शुरूआत की और बुधवारीय आमदर्शन समारोह में कलीसिया की दैनिक प्रार्थना पर चिंतन किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो14वें ने अपने ग्रीष्मकालीन आवकाश के उपरांत अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह की पुनः शुरूआत की। उन्होंने वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात और सुस्वागतम्।

इस धर्मशिक्षा माला में हम स्क्रोसांतुम कोनसिलियुम पर अपना चिंतन जारी रखेंगे। आज हम धर्मविधि दैनिक प्रार्थना के कलीसियाई आयाम पर विचार करेंगे।

प्रार्थना, पवित्र आत्मा का कार्य

संत पापा लियो ने कहा जैसे कि प्रेरित संत पौलुस हमें सलाह देते हैं, यह पवित्र आत्मा हैं जो हमें प्रार्थना करने की शिक्षा देते हैं। पेन्तेकोस्त के दिन से, पवित्र आत्मा कलीसिया में निवास करते हैं, हर किसी को उसके कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं और विशेष कर प्रार्थना करने के लिए। येसु के पुनरूत्थान उपरांत येरूसालेम में जन्मे प्रथम ख्रीस्तीय समुदाय में हम पवित्र आत्मा में जीवन को पाते हैं जो पुनर्जीवित येसु द्वारा प्राप्त होता है। “तब से लेकर कलीसिया पास्का रहस्य की यादगारी मनाते हेतु एक साथ आने में कभी नहीं चूकी हैः जहाँ हम उन बातों को पढ़ते हैं जो पूरे धर्मग्रंथ में उनके संबंध में लिखे गये थे (लूका. 24:27), हम यूखारीस्तीय की धर्मविधि में, उनके पुनरूत्थान और मृत्यु के उपरांत विजय की यादगारी मनाते हैं, और इसके साथ ही हम ईश्वर को उनके अकथनीय उपहार के लिए धन्यवाद देते हैं, (2 कुरू.9:15), येसु ख्रीस्त में, उनकी महिमा के लिए (ऐफि.1.12), पवित्र आत्मा की शक्ति के माध्यम।”  

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन

वर्तमान में प्रार्थना के प्रति मनोभाव

हमारे समय में, जहाँ हम कुशलता के प्रभाव और भौतिकता की मानसिकता को पाते हैं, प्रार्थना हमारे लिए निरर्थक और तुच्छ जान पड़ती है। एक दुनिया में जहाँ विज्ञान और तकनीकी सारी चीजों का उत्तर देती है, प्रार्थना हमारे लिए एक तरह से पलायनवाद का स्वरूप लगता है। उससे भी बढ़कर, बहुत से ख्रीस्त परिवारों में, परंपरा से चली आ रही प्रार्थना को हम अब नहीं पाते हैं, जबकि बहुत से लोग इसे एक तकनीकी के रुप में देखने के भ्रम में पड़ जाते हैं, जो अपने में एक मनोवैज्ञानिक प्रकृति जान पड़ती है और जिसका लक्ष्य व्यक्तिगत रूप में कुशालमंगल रहने तक सीमित हो। प्रार्थना, यद्यपि मानवता के एक मूलभूत आयाम स्वरूप हमसे इस बात की मांग करती है कि हम इसकी सच्ची प्रभावकारिता की पुनः खोज करें।

प्रार्थना का पहला स्थान 

संत पापा लियो ने कहा कि धर्मसिद्धांत स्क्रोसांतुम कोनसिलियुम ने इसकी आवश्यकता को गम्भीरता से लिया है। यह संत पापा पौल 6वें के लिए एक बृहृद खुशी का कारण था, जो इस प्रथम दस्तावेज जिसे वाटिकन द्वितीय महासभा ने स्वीकृति दी, घोषणा करते हुए कहते हैं, “ईश्वर सर्वप्रथम आते हैं, प्रार्थना हमारा सर्वप्रथम कर्तव्य है, धर्मविधि हमारे लिए दिव्य जीवन का मुख्य स्रोत है जो हमें दिया गया है, वह हमारी आध्यात्मिकता की प्रथम पाठशाला है।”

संत पापा की धर्मशिक्षा
संत पापा की धर्मशिक्षा   (ANSA)

प्रार्थना, ईश्वर की पहल

वास्तव में, धर्मसिद्धांत में, शब्दावली “प्रार्थना” हमारे लिए एक पूरी धर्मविधि की ओर इंगित कराती है। यह दृष्टिकोण हमारे लिए निर्णयक है, क्योंकि यह धर्मविधि में परिवर्तन की ओर दिशा-निर्देशित करती है, जिसके फलस्वरुप विश्वासियों की सक्रिय सहभागिता अपने में मुख्य आधार बनती है। धर्मविधि सर्वप्रथम ईश्वर से मिलन स्थल के रुप में प्रस्तुत किया गया है, जहाँ हम ईश्वर की पहल को पाते हैं जो अपने पुत्र में मानवता के करीब आते हैं, “शब्द ने शरीर धारण किया, जो पवित्र आत्मा से अभियंजित हुआ”, जिसके प्रत्युत्तर में हम कहते हैं, “ख्रीस्त के द्वारा, ख्रीस्त से और ख्रीस्त में, जो पवित्र आत्मा से संयुक्त हैं, कहने का अर्थ है, हम येसु ख्रीस्त की प्रार्थना के लिए उनके प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हैं, जो अपने शरीर से, अपने पिता को संबोधित करते हैं।

यूख्रारीस्त और दैनिक प्रार्थना

यही कारण है, संत पापा पौल 6वें ने धर्मविधि दैनिक प्रार्थनाओं की तीव्र चाह रखी, जो कलीसिया के लोगों के लिए दैनिक प्रार्थना है, जो यूखारीस्त से अलग नहीं है, यह अत्यधिक गहरी, सजीव, सभी ख्रीस्तीय प्रार्थना को निर्देशित और उच्चरित करती तथा ईश प्रजा के आध्यात्मिक जीवन को प्रभावकारी ढ़ंग से पोषित करती है।

संत पापा लियो 14वें - बुधवारीय आमदर्शन समारोह में

संत पापा लियो ने कहा कि इस चाह की प्रभावकारिता इस बात की मांग करती है कि धर्मविधि की प्रार्थनाओं को बपतिस्मा प्राप्त और समुदायों को पूर्णरूपेण आलिंगन करते हुए जीने की आवश्यकता है। बहुत से लोग जो प्रार्थना करने हेतु सीखने की चाह रखते हैं विशेष नव-दीक्षार्थीगण, यह ख्रीस्तीय प्रार्थना उनके लिए मार्ग और पाठशाला हो सकता है।

संत पापा लियो के  आमदर्शन समारोह में विश्वासीगण
संत पापा लियो के आमदर्शन समारोह में विश्वासीगण

प्रार्थना कलीसिया की साँसें

हर सप्ताह और हर दिन, यूखारीस्त और कलीसिया की दैनिक प्रार्थना, कलीसिया के जीवन की सांसें बनती हैं, जिसे पवित्र आत्मा अपने जीवन के द्वारा हमें प्रदान करते हैं। इस प्रार्थना में, ख्रीस्त सारी मानव जाति के समुदाय को अपने संग संयुक्त करते हैं, वे उसे अपने दिव्य महिमा के भजन में सम्मिलित करते हैं, इस भांति, दिन ब दिन, हम उनके पास्का रहस्य की एकता में संयुक्त होते जाते और उनके अनुरूप बनते हैं।  

संत अगुस्टीन हमारे लिए इस बात की सुनिश्चितता प्रदान करते हैं कि, “जब हम करूणा की प्रार्थना ईश्वर से करते हैं, तो हम पुत्र को उनसे अलग नहीं करते हैं, और जब पुत्र का प्रार्थना करते हैं, तो वे अपने को शीर्ष से अलग नहीं करते हैं, और यह एक मुक्तिदाता, हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त, जो ईश्वर के पुत्र हैं, दोनों हमारे लिए और हममें प्रार्थना करते हैं तथा जिनके द्वारा हम प्रार्थना करते हैं। वे पुरोहित के रुप में हमारे लिए प्रार्थना करते हैं, वे शीर्ष के रूप में हमारे लिए प्रार्थना करते हैं, और ईश्वर के रुप में, हम उनसे प्रार्थना करते हैं। आइए तब हम उनमें अपने शब्दों को पहचानें, और उनके शब्दों को अपने में।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद

क्या हम प्रार्थना करते?

संत पापा लियो 14वें ने कहा कि धर्मविधि की दैनिक प्रार्थना, जो यूखारीस्त से संयुक्त उसकी ज्योति को दीर्घ बनाती है, हमारे दैनिक जीवन के समय को पवित्र करती है, सुबह में, जब हम अपने दिन की शुरूआत विश्वास और कृतज्ञता में करते हैं, दोपहर में, जब हम अपनी मेहनत में विश्वासी बने रहने की शक्ति की कामना करते हैं, संध्या के समय, जब एक बार हमारे कार्य समाप्त हो जाते, संध्या वंदना सूर्यास्त के संग आगे बढ़ती है, रात में, हम ईश्वर की शांति में अपने को सौंपते हुए विश्राम के लिए जाते हैं। हर घड़ी हमारे लिए आशा का एक कार्य है- पृथ्वी पर हमारी यात्रा के दौरान, हम इस बात का ध्यान रखें, कि हम पूरी कलीसिया के संग ईश्वर के महिमा में आने की प्रतीक्षा करते हैं।

(दिलीप संजय एक्का ये.स.)

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05 अगस्त 2026, 12:09