इतिहास के नये पन्ने रचें, युवाओं से सन्त पापा लियो
वाटिकन सिटी
असीसी, शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): असीसी में जारी फ्राँसिसकन युवा सम्मेलन 2026 के प्रतिभागी युवाओं को गुरुवार को सन्त पापा लियो 14 वें ने आमंत्रित किया कि वे येसु का अनुसरण कर "उदासीनता और भय पर काबू पायें" तथा "इतिहास के नए पन्ने रचें"।
युवाओं से उन्होंने आग्रह किया कि वे असीसी के सन्त फ्राँसिस को अपना आदर्श मानें। सन्त पापा ने कहा कि संत फ्रांसिस, एक मिसाल हैं जिनसे सीखा जा सकता है, "यूरोप और सम्पूर्ण विश्व नई पीढ़ी में ऐसे "नए संत" और "शांति निर्माताओं" को खोज रहा है जो "दुखद परिस्थितियों में भी जीवन की सेवा" के लिए तैयार रहें।
“Andiamo! Let’s go!
असीसी नगर के सान्ता मरिया देल्ली आन्जेली मरिमय महागिरजाघर के भीतर लगभग 2000 और प्राँगण में एकत्र अन्य तीन हज़ार युवा श्रद्धालुओं को गुरुवार 06 अगस्त को ख्रीस्तयाग के अवसर पर प्रवचन में सन्त पापा लियो 14 वें ने “Andiamo! Let’s go! “चलो चलें! कहकर प्रोत्साहित किया कि वे ऐसे विश्व में कुछ नया करें, जहाँ कुछ लोगों का अन्याय और घमंड बहुतों की प्रतिष्ठा, सम्मान और सपनों को छीन लेता है।
सन्त पापा ने कहा कि सच तो यह है कि हमें अपने प्रभु और गुरु येसु के साथ मिलकर धर्मग्रंथ का पाठ करने, अपने समय को समझने और उनके बताए रास्ते पर चलते हुए फैसले लेने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में हार न मानी जाये और न ही भयभीत हुआ जाये बल्कि उस हर डर और शक को दूर किया जाये जो जीवन में हमें आगे बढ़ने से रोकते हैं। प्रभु येसु हमें अपने जीवन की कहानी के द्वारा बातचीत के लिये आमंत्रित करते हैं, वे हमें इतिहास के नए पन्ने लिखने के लिए बुलाते हैं।
असीसी जीवन की संस्कृति
सन्त पापा लियो ने युवाओं से कहा कि असीसी एक ऐसी जगह है जहाँ की "हर चीज़ फुसफुसाती है कि हमारी ज़िंदगी अपना रूप बदल सकती है, रोशनी फैला सकती है, दुनिया को ठीक कर सकती है।" उन्होंने स्मरण दिलाया कि असीसी में ही "फ्रांसिस, क्लेयर और फिर हज़ारों अन्य नवयुवकों का मनपरिवर्तन शुरू हुआ," उन्होंने "बिना किसी समझौते के" ख्रीस्तीय सुसमाचार का स्वागत किया, और इस तरह "येसु की ज़िंदगी उनमें फिर से शुरू हुई।"
सन्त पापा ने समझाया कि ईश्वर पर भरोसा करने का अर्थ है, फ्रांसिस और क्लेयर की तरह, भाई-बहनों की एक ऐसी दुनिया को फिर से खोजना, जिसे सराहा जाये और जिसकी सेवा की जाए, न कि उसका शोषण किया जाए और उस पर हावी हुआ जाए। ऐसी दुनिया जिसकी रक्षा की जाए और उसे अपनाया जाए। युवाओं से उन्होंने अनुरोध किया कि वे खुद को प्रेम की सभ्यता के प्रति समर्पित कर दें, जिसके बीज उन्होंने उदारता के इतने सारे उदाहरणों में देखे हैं, और जो येसु मसीह की छवि में अनगिनत शांति निर्माताओं को बदल देता है, जो जीवन की सेवा के लिये सदैव तत्पर रहा करते हैं।
सन्त फ्राँसिस की प्रार्थना
नवीन पीढ़ियों से सन्त पापा ने कहा कि वे अपनी "सबसे उत्तम ऊर्जा, अपने सारे कार्य, पढ़ाई, क्षमता, मित्रता, प्रेम और प्रार्थना को एक साथ लायें तथा सन्त फ्रांसिस की दृष्टि को अलग-अलग तरीकों से पूरा करें।" असीसी के सन्त फ्राँसिस की विख्यात प्रार्थना को दुहराते हुए सन्त पापा ने कहाः "हे प्रभु, मुझे अपनी शांति का ज़रिया बना," यह दर्शाता है कि हमें "जहाँ घृणा है" वहाँ "प्रेम" का प्रसार करना चाहिए, "जहाँ नाराज़गी हो" वहाँ "क्षमा" और "जहाँ झगड़ा हो" वहाँ "एकता" लानी चाहिए, "जहाँ ग़लत हो" वहाँ "सच" और "जहाँ शक हो" वहाँ "विश्वास" लाना चाहिए, "जहाँ निराशा हो" वहाँ "आशा" और "जहाँ अंधेरा हो" वहाँ "रोशनी" लाना चाहिए तथा "जहाँ उदासी हो" वहाँ "खुशी" लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सब "सान्तवना देने," "समझने," और "प्यार" के लिए है, खुद को पूरी तरह से देना और प्रस्तुत करना है।
सन्त पापा लियो ने आशा व्यक्त की कि “असीसी में व्यतीत ये दिन” युवाओं की “यादों” में हमेशा के लिए बस जाएं, ताकि युवा भविष्य के प्रति उदार रहें तथा येसु ख्रीस्त के प्रति समर्पित रहकर अन्यों की सेवा के लिये प्रेरित होवें।
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