कार्डिलन क्यूपिचः संत पापा का विश्व पत्र एक नया लेंस
वाटिकन सिटी
वाटिकन समाचार के साथ एक साक्षात्कार में, शिकागो के धर्माध्यक्ष कार्डिनल ब्लेज़ क्यूपिच ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संत पापा लियो के विश्व पत्र मैग्निफिका ह्यूमैनिटास पर अपने विचार व्यक्त किये।
कार्डिनल ने कहा, “संत पापा लियो का यह विश्व पत्र हमारे लिए एक नया लेन्स प्रदान करता है जिससे हम कलीसिया की पूरी सामाजिक धर्मसिद्धांत की शिक्षा को नये रुप से देख और पढ़ सकें।”
कार्डिनल ने टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता के खिलाफ संत पापा की चेतावनी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण समाज में होने वाले सामाजिक असर और डिजिटल युग में काथलिक सामाजिक शिक्षा की अहमियत पर चर्चा की।
कार्डिनल क्यूपिच, आप संत पापा लियो 14वें के पहले विश्वपत्र मैग्निफिका ह्यूमैनिटास का क्या महत्व देखते हैं?
इस विश्वपत्र में हम संत पापा के द्वारा मानवता के लिए एक मुख्य चुनौती को पाते हैं: हम या तो नये येरुसालेम का निर्माण करें या तो बबेल के मीनार का निर्माण।
पहला निशानी को हम नबी नहेमायाह की कहानी से जुड़ा पाते हैं, जो देश से निर्वासन उपरांत परिवारों को एक साथ लाते हैं। जैसा कि संत पापा लिखते हैं, नहेमायाह ने "उनमें से हर एक को फिर से दीवार का एक हिस्सा बनाने का आह्वान किया, उनकी चिंताओं को सुनते हुए, उनके प्रयासों को सही दिशा देते हुए उन्होंने उनके मध्य किसी भी विरोध को दूर किया।” यह शहर किसी एक ताकतवर इंसान की पहल से नहीं बनता है, बल्कि “सभों के ज़िम्मेदारीपूर्ण सहयोग से बना है: नर-नारियाँ,पुरोहित, कारीगर, घर के मुखिया और सभी युवा इसमें हिस्सा लेते हैं। यह एक ऐसा काम है जिसके केंद्र में ईश्वर हैं, जो पत्थरों से निर्माण करने के पूर्व रिश्तों का पुनर्निर्माण करते हैं।”
यह एक एकता है जो तब संभव होता है जब लोग अपनी सही भूमिका निभाते हैं और इस बात को पहचानते हैं कि उनकी ताकत ईश्वर से आती है।
दूसरी ओर, बबेल का मीनार एक ऐसे शहर को दिखाता है जो ईश्वर की आशीर्वाद के बिना स्वर्ग तक पहुँचने की चाहत रखता है। घमंड और आत्मनिर्भरता के दावों पर बने होने के कारण, वार्ता में बिखराब आती है, और लोग एक-दूसरे को समझ नहीं पाते हैं।
शिकागो को दुनिया भर में व्यपार, तकनीकी, नवनीकरण और इंडस्ट्री का केन्द्र माना जाता है। इस पद पर आपको क्या प्रतिक्रिया दिख रही है, जिसमें तकनीकी दुनिया भी शामिल है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़माने में इंसानियत को बचाने की अपील की गई है
शिकागो के समाचार पत्र ने इस संदर्भ में सबसे पहले महाविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रतिक्रया पर फोकस किया, और हमें उन्हें ध्यान से सुनने की ज़रूरत है क्योंकि इस नई टेक्नोलॉजी का उनके भविष्य पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
जिन लोगों का साक्षात्कार लिया गया, उनमें से विद्यार्थियों ने संत पाता की भूरी-भूरी प्रशंसा की और विश्वपत्र का अध्यायन करने की एक गहरी दिलचस्पी दिखाई।
संत पापा लियो की बातों में कौन-सी चिंता आपके विचारों से मेल खाती है? आप अपने धर्मप्रांत में लोगों को इससे सबसे ज़्यादा किस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराना चाहेंगे?
यह दस्तावेज हमें कलीसिया की पूरी सामाजिक धर्मशिक्षा को एक नये दृष्टिकोण से देखने का आहृवान करता है। संत पापा ने पहले अध्याय में यह साफ़ कर दिया है, जहाँ उन्होंने संत पापा लियो 13वें के बाद से संत पापाओं की पहल का एक शानदार विवरण प्रस्तुत किया है। संत पापा लियो 14वें स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि यह कलीसिया का धर्मसिद्धांत है, न कि सिर्फ़ कोई शिक्षण जिसे काथलिक स्वीकार कर सकते या नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।
संत पापा लियो 13वें के रेरूम नोवारूम के बारे में विचार करते हुए, जिसका संत पापा लियो 14वें अक्सर ज़िक्र करते हैं, क्या आपको लगता है कि डिजिटल क्रांति की तुलना, उसके माप और प्रभाव के मामले में, आद्योगित क्रांति से की जा सकती है?
दोनों में समानताएं हैं, लेकिन कुछ ज़रूरी अंतर भी हैं।
इस नई टेक्नोलॉजी में नियंत्रण करने की हमारी योग्यता से आगे निकलने की क्षमता है, और संत पापा हमें इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इसके द्वारा मिलने वाली चुनौती का सामना करने को सजग करते हैं।
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