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संत रीता का जन्म स्थल संत रीता का जन्म स्थल  

संत रीता येसु में बनी रहीं

संत रीता के पर्व दिवस पर अगुस्टीनियन धर्मसमाज के परमाधिकारी जोसेफ फार्रेल्ला ने अगुस्टीनियन संत के जीवन पर चिंतन करते हुए येसु के संग सदैव बनने रहने का संदेश दिया।

वाटिकन सिटी

संत रीता के पर्व दिवस मानते हुए संत अगुस्टीनियन धर्मसंघ के परमाधिकारी ने संत रीता के महागिरजाघर में मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

“तुम मुझमें बने रहो और मैं तुममें। डाली अगर दखालता में न रहे तो खुद से फल नहीं दे सकती, वैसे ही तुम भी अगर मुझमें न रहो तो फल नहीं दे सकते। जो मुझमें रहता है, और मैं जिसमें, वह बहुत फल देता है। अगर तुम मुझमें रहो, और मेरी बातें तुममें रहें, तो जो चाहो मांगो, वह तुम्हारे लिए हो जाएगा।”

बने रहने का अर्थ

संत योहन के सुसमाचार के वचनों पर चिंतन करते हुए अगुस्टीनियन धर्मसंघ के परमाधिकारी जोसेफ फार्रेल्ला ने कहा कि शब्द “रहने”  का क्या अर्थ है?... यूनानी भाषा में यह शब्द मेनो  है- जिसके अर्थ है जारी रखना, इंतज़ार करना, जीना, रहना...

उन्होंने कहा कि योहन ने इन बातों को येसु के मुँह से क्यों घोषित कियाॽ वह इसे क्यों बारंबार दुहराते हैं, क्योंकि यह समुदाय के लिए एक ज़रूरी विषय है। शिष्य और नये ख्रीस्तीय समुदाय में हो रहे जुल्म के कारण, शिष्य  इस नये रास्ते से भागने और उसे छोड़ने के प्रलोभन में पड़ जाते हैं। येसु उनके संग शारीरिक रूप में नहीं रहे अतः यह उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है। यदि उनके संग नहीं रहे, तो वे येसु के संग कैसे रह सकते थेॽ

उन्होंने कहा कि हम येसु के शब्दों में इस निश्चितता को पाते हैं कि वे सदैव अपने लोगों के संग नहीं रहेंगे... जैसे एक दखालता और उसकी डालियों के बीच का रिश्ता होता है। लेकिन डालियों को फल देना ही होगा... वे बिना फल के नहीं रह सकतीं... और येसु यह भी कहते हैं कि डालियाँ उनके बिना नहीं रह सकतीं।

संत रीता येसु में बनी रही

हम आगुस्टीनियन धर्मबहन, संत रीता का बड़ा त्योहार मना रहे हैं। हम अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी ज़िंदगी को बताने के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है, वे हैं... शांति, मेलजोल, ईमादारी, निष्ठा की निशानी है। एक और शब्द जो उनके संबंध में हमारे लिए ही लगता है, वह है क्रिया “रहना”। उनकी ज़िंदगी आसान नहीं थी, उन्होंने दुःख झेला, न सिर्फ़ अपने पति और बच्चों को असमय मौत दुःख,  बल्कि येसु ख्रीस्त के दुःख का भी जिसका अनुभव उन्होंने अपने शरीर में किया। 

पुरोहित जोसेफ फार्रेल्ला ने कहा कि संत रीता कभी भी येसु से दूर नहीं भाग पाई। उनके लिए बहुत प्रलोभन आये...। यद्यपि उन्होंने अपने मज़बूत विश्वास,  समझदारी के उपहार सें दुश्मनों के बीच शांति और मेलजोल का रास्ता खोला। वह दखालता में डालियों की भांति जुड़ी रहीं, हमेशा निष्ठावान बनी रहीं। उन्होंने संदेह, दर्द, तकलीफ और नुकसान का सामना करना पड़ा, लेकिन उससे भी ज़्यादा,  उन्होंने पवित्र आत्मा के ज़रिए अपने हृदय में ख्रीस्त के प्रेम का अनुभव किया, जो एक गुलाब की तरह उनमें खिला जिसे वह 15वीं सदी में अपनी अगुस्तीयन समुदाय और अब सदियों बाद पूरी दुनिया को अपनी सुंदरता स्वरूप प्रस्तुत करती हैं।

येसु का संदेश

अगुस्टीनियन परमाधिकारी ने कहा कि आज का संदेश क्या हैॽ हम भी येसु में बने रहने की जरुरत है... यदि ऐसा करने तो हम फलहित होते हैं। हम येसु के साथ तब रहते हैं जब हम इस बात को जानते हुए जीते हैं कि उनके बिना फलहित होना मुश्किल है। उनके बिना, हम उनमें नहीं रह सकते। संत रीता इसकी साक्षी हैं, येसु हमारे जीवन हैं।

विश्वास और प्रेम

उन्होंने कहा कि संत अगुस्टीन हमें अपने उपदेशों में याद दिलाते हैं: “मेरी भलाई ईश्वर के संग रहने में है, क्योंकि अगर मैं उनमें नहीं रहता, तो मैं खुद में नहीं रह सकता।” और उनमें जीने, बसने, बने रहने के लिए, दो चीजें जरूरी हैं-विश्वास और प्रेम।

अगर सिर्फ शब्दों का इस्तेमाल करके हमारी ज़िंदगी बन सकती तो कौन सा शब्द हमारी ज़िंदगी का सबसे बड़ा शब्द होताॽ

आइए हम येसु में अपनी मौजूदगी को पहचानने की कृपा मांगें... संत रीता की तरह, येसु में बने रहने की चाह हेतु... और आइए हम विश्वास और प्रेम के उपहारों के लिए प्रार्थना करें। इस तरह, हम येसु में बने रह सकते हैं, और येसु हम सभों में।

 

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21 मई 2026, 17:32