रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौती
वाटिकन सिटी
अलेज्द्रो जिसोत्ती
“रेडियो अब सिर्फ़ रेडियो नहीं रहा।” संपादकीय विभाग के अध्यक्ष जिसोत्ती ने कहा कि बीस साल हो गए जब वाटिकन रेडियो के भूतपूर्व प्रबंधन अधिकारी पुरोहित फेदरिको लोम्बार्डी ने परमधर्मपीठीय प्रसारण के दौरान अपने साथियों के साथ एक मीटिंग में ये शब्द कहे थे।
पॉडकास्ट असल में एक उत्कृष्ट प्रयोगिक थे। वेब रेडियो का मीडिया इकोसिस्टम में तब भी कोई खास महत्व नहीं था। सोशल नेटवर्क शुरुआती दौर में थे और उनका इस्तेमाल न्यूज़ कंटेंट बांटने के लिए तो नहीं किया जाता था, ऑडियो फॉर्मेट में तो बिल्कुल ही नहीं।
और फिर भी, फादर लोम्बार्डी को पहले ही पता चल गया था कि रेडियो—सबसे ज़्यादा लचीला और मज़बूत माध्यम- एक बार फिर अपना रूप बदल रहा है। बीस साल बाद (सदी के इस हिस्से में संचार माध्यम तकनीकी जिस तरह तेज़ी से विकसित हुई है, उसे देखते हुए यह एक जियोलॉजिकल युग है), हम निश्चित रूप से येसु समाजी की भविष्यवाणी को सुनिश्चितता प्रदान कर सकते हैं: “रेडियो अब सिर्फ़ रेडियो नहीं रहा।”
लेकिन, भले ही आज आदतन “रेडियो और ऑडियो” को हम एक-दूसरे से अलग न करने वाला मानते हैं– जो इस बात का साफ़ सबूत है कि चीज़ें कितनी गहराई से बदल गई हैं – गुग्लिल्मो मार्कोनी के आविष्कार अभी भी अपनी खासियतें बनाए हुए हैं।
आवाज़ क्रेन्द बिन्दु में रहती है। आवाज़ अपनी मनोभावनाओं के साथ: जो किसी गाने या साक्षात्कार से, किसी बातचीत या किसी पब्लिक व्यक्तित्व के भाषण से पैदा होते हैं। आवाज़, जब कुछ ज़रूरी बात बतानी होती है तो लोगों तक सीधे पहुँचने की अपनी योग्याता रखती है। रेडियो में जिस तरह बाकी सारे संचार माध्यम—पुराने और नए—जो प्रसारण हेतु उपयोग किये जाते हैं, उनका “शानदार दोस्त” बना हुआ है। शायद इसलिए भी क्योंकि एक रेडियो प्रोग्राम में टेक्नोलॉजी एक अहम रोल है, लेकिन सबसे बड़ा नहीं। असली काम इंसान और उसकी आवाज़ करती है। लेकिन क्या यह आने वाले समय में भी सच रहेगाॽ
“आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एक साधन है। आवाज़ नहीं।” यह यूनेस्को विश्व रेडियो दिवस 2026 के लिए चुनी गई एक विषयवस्तु है, और यह उस चिंता को व्यक्त करती है जो तेज़ी से स्पष्ट होती जा रही है—और जो ज़रूरी भी है। क्या एआई रेडियो प्रसारण लोगों की आवाज़ की जगह ले लेगीॽ
तकनीकी के बारे में कहें तो, यह सिर्फ़ आज ही मुमकिन नहीं है—यह पहले से ही कई स्टेशनों पर बड़े पैमाने पर हो रहा है। “एआई प्रस्तोताओं” द्वारा संचालित किये जाने वाले प्रोग्राम में, एआई से ऑडियो डबिंग में। म्यूज़िक और क्लोन की गई आवाज़ों से बनाए गए पॉडकास्ट, ऐसे टूल्स का इस्तेमाल करते जिनमें इंसानी योगदान कम से कम होते हैं।
ये एप्लिकेशन कई सवाल उठाते हैं, जिनमें पारदर्शिता का मुद्दा सबसे पहले आता है: सुनने वालों को सबसे पहले यह पता होना चाहिए कि उनसे बात करने वाली आवाज़ इंसान की है या एआई से बनी आवाज। और उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि वे जो समाचार सुन रहे हैं, या उसे किसी संवाददाता के बजाय किसी एल्गोरिदम ने चुना है।
24 जनवरी को प्रकाशित विश्व संचार माध्यम दिवस के अवसर पर संत पापा लियो का पहला संदेश इस तथ्य पर मज़बूती से विचार करने का आहृवान देता है।
संत पापा लिखते हैं, “चेहरों और आवाज़ों की सुरक्षा का मतलब है, आखिर में खुद की सुरक्षा करना। डिजिटल टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मिलने वाले अवसरों और प्रोत्साहन, सुदृढ़ता और समझदारी को अपनाने का मतलब यह नहीं है कि हम ज़रूरी मुद्दों, मुश्किलों और जोखिमों को नज़रअंदाज़ कर दें।
संत पापा सीधे तौर पर एक ऐसे बिन्दु पर बात करते हैं जिसे आज यूरोपियन ब्रॉडकास्टिंग यूनियन जैसे बड़े पब्लिक सर्विस मीडिया संगठन भी ज़रूरी मानते हैं। संत पापा लियो चेतावनी देते हैं, “सिमुलेशन की ताकत इतनी है कि एआई समानंतर रुप में इसे असलियत बनाकर, हमारे चेहरों और आवाज़ों पर कब्ज़ा करके हमें धोखा भी दे सकती है। हम एक ऐसी बहुमुखी आयामीय दुनिया में डूबे हुए हैं जहाँ असलियत और कल्पना में फ़र्क करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है।”
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उस इमोशन की जगह नहीं ले सकता जो एक इंसान अपनी आवाज़ के ज़रिए सुनने वालों तक पहुंचाता है। इसीलिए इस क्रांतिकारी नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल—यूनेस्को के शब्दों में—एक टूल की तरह किया जाना चाहिए। इससे ज़्यादा कुछ नहीं।
इस नज़रिए से देखें तो, एआई रेडियो के लिए बहुत मददगार हो सकता है: श्रोताओं की पसंद को बेहतर ढंग से समझने में; स्वर संग्रहण को ज़्यादा असरदार तरीके से संगठित करने में; जानकारी को तेज़ी से खोजने में; एक अधिक स्पष्ट और पहचानने लायक ध्वनि पहचान बनाने में। इसमें बहुत ज़्यादा विकास की संभावना है, और कुछ का अभी भी अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
लेकिन कोई भी तकनीकी तरक्की—चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो—कभी भी इंसानी पहलू, लोगों के बीच के संबंध की जगह नहीं ले पाएगी, जो मार्कोनी के खोज के हृदय में व्याप्त है।
एआई की आवाज़, पूरी आवाज़ को क्लोन कर सकता है। इसलिए यह स्वरग्रंथि को “स्थांतरित” कर सकता है। लेकिन दिल के कॉर्ड को नहीं। क्योंकि, जैसा कि मार्शल मैक्लुहान कहते थे, “रेडियो में दूर और भूले हुए कॉर्ड को छूने की जादुई ताकत है।”
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