धर्माध्यक्षों ने धर्मनिर्पेक्ष मूल्यों की रक्षा का किया आह्वान
वाटिकन सिटी
केरल, शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 (ऊका न्यूज़): केरल के काथलिक धर्माध्यक्षों ने देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर चिंता के बीच, मतदाताओं से अपील की थी कि वे धर्मनिर्पेक्ष मूल्यों की रक्षा करने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जिम्मेदारी से अपने वोट का इस्तेमाल करें।
केरल में 140 सीट वाले विधान सभा के लिये 09 अप्रैल को मतदान हुए। 07 अप्रैल को काथलिक नेताओं ने अपनी अपील जारी की थी जिसमें उन्होंने बांटने वाली राजनीति और 'खोखले वादों' के खिलाफ चेतावनी दी है।
धर्माध्यक्षों का वकतव्य
केरल में लातीनी रीति की धर्माध्यक्षीय समिति के 22 धर्माध्यक्षों ने एक वकतव्य जारी कर राजनीतिक दलों द्वारा जारी चुनाव घोषणापत्रों पर असंतोष व्यक्त किया था और कहा था कि उनमें राज्य के समग्र विकास और प्रगति पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया था।
उन्होंने मतदाताओं को चेतावनी दी थी कि वे चुनाव अभियान के दौरान किए गए “खोखले वादों और झूठे दावों” से बहकें नहीं। चुनावों में बड़ी रकम के इस्तेमाल की भी उन्होंने आलोचना की थी और कहा था कि इस तरह के खर्च से आखिर में आम लोगों पर बोझ पड़ता है।
धर्माध्यक्षों की चिन्ता
केरल धर्माध्यक्षीय समिति के उपाध्यक्ष जोसेफ जूड ने कहा कि धर्माध्यक्ष लोगों की भलाई के प्रति चिन्तित थे। उन्होंने ऊका न्यूज़ को बताया, “वे चाहते थे कि मतदाता अपनी शक्ति का उपयोग कर ऐसी सरकार चुनें जो उनकी शिकायतों को दूर करे और एक सही और विकसित समाज बनाने में मदद करे।”
जूड ने बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और ख्रीस्तीय धर्मानुयायी सहित अन्य अल्पसंख्यकों को हमलों का निशाना बनाये जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “ऐसी घटनाओं को सिर्फ़ अपने मत पर ध्यान देकर ही रोका जा सकता है।” उन्होंने मतदाताओं से “बांटने वाले एजेंडे” को बढ़ावा देने वाली पार्टियों को नकारने की अपील की और कहा कि “धार्मिक भेदभाव” को बढ़ावा देने वाली ताकतों का मुकाबला मतदान से किया जा सकता है।
केरल में राजनैतिक स्थिति
केरल में साम्यवादी पार्टी के नेतृत्ववाली सत्तारूढ़ वामपंथी डेमोक्रेटिक फ्रंट लगातार तीसरी बार जीतना चाहती है। इसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के नेतृत्नवाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस हैं।
राजनैतिक विश्लेषज्ञ सुरेश कुमार ने ऊका न्यूज़ से कहा कि धर्माध्यक्षों का सन्देश ख्रीस्तीय मतदाताओं को उन पार्टियों के खिलाफ सावधान करने के लिए था जिन्हें अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ काम करने वाला माना जाता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी को आम तौर पर ईसाइयों और मुसलमानों के खिलाफ एक पार्टी के तौर पर देखा जाता है, इसलिये कि पार्टी द्वारा शासित कई राज्यों में धर्म परिवर्तन के आरोपों से जुड़ी ईसाई विरोधी हिंसा में वृद्धि हुई है।
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, केरल की लगभग 03 करोड़, 30 लाख की आबादी में हिंदू लगभग 55%, इस्लाम धर्मानुयायी 27% और ख्रीस्तीय धर्मानुयायी 18% हैं।
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