खोज

रोम के लासापिएन्सा विश्वविद्यालय में सन्त पापा लियो 145 वें, 14.05.2026 रोम के लासापिएन्सा विश्वविद्यालय में सन्त पापा लियो 145 वें, 14.05.2026  (ANSA)

रोम के लासापिएन्सा में गाज़ा के छात्रों का नया अध्याय

रोम धर्मप्रान्त और रोम स्थित सन्त इजिदियो लोकधर्मी समुदाय के तत्वाधान में गाज़ा से आए फ़िलिस्तीनी छात्रों का एक समूह इस समय रोम के ला सापिएन्सा विश्वविद्यालय में युद्ध के बाद फिर से अपने भविष्य की शुरुआत कर पा रहा है।

वाटिकन सिटी

रोम, शुक्रवार, 15 मई 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): रोम धर्मप्रान्त और रोम स्थित सन्त इजिदियो लोकधर्मी समुदाय के तत्वाधान में गाज़ा से आए फ़िलिस्तीनी छात्रों का एक समूह इस समय रोम के ला सापिएन्सा विश्वविद्यालय में युद्ध के बाद फिर से अपने भविष्य की शुरुआत कर पा रहा है। इन छात्रों ने 14 मई को सन्त पापा लियो 14 वें से भी मुलाकात की और अपने साक्ष्य प्रस्तुत किये।

फिलीस्तीनी छात्र

नादा जौदा और सलेम अबुमुस्तफा उन चार लोगों में से हैं, जिन्हें रोम के लासापिएन्सा विश्वविद्यालय में दाखिला मिला है। उनका साहसिक कार्य ज़ोरदार तरीके से शुरू हुआ क्योंकि 14 मई को सन्त पापा लियो 14 नें लासापिएन्सा का दौरा कर विश्वविद्यालयीन समुदाय को अपना सन्देश दिया था। नादा और सालेम ने हमारे संवाददाताओं से कहा कि सन्त पापा से मुलाकात करना और उनका स्वागत करना उनके लिये बड़े सौभाग्य की बात थी।

सन्त पापा ने अपने सन्देश में गाजा पट्टी से आये छात्रों के लिये मानवतावादी गलियारों को खोलने हेतु ला सापिएन्सा विश्वविद्यालय की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। फरवरी माह में हस्ताक्षरित इस समझौते का लक्ष्य गाजा में युद्ध से प्रभावित युवा फ़िलिस्तीनियों को छात्रवृत्ति, आवास की सुविधा और समाकलन एवं एकीकरण कार्यक्रमों द्वारा इटली में अपनी विश्वविद्यालयीन पढ़ाई जारी रखने का मौका देना है।  

विश्वविद्यालय में सन्त पापा लियो

सन्त पापा लियो ने अकादमिक समुदाय से आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालय को मेलमिलाप,  बातचीत और शांति निर्माण की जगह बनाये। उन्होंने गाज़ा के छात्रों को शरण देने तथा उनके अध्ययन अध्यापन में निवेश करने के लिये भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गाजा पट्टी के छात्रों की मौजूदगी अध्ययन और अनुसन्धान में निवेश करने की ज़रूरत का एक दिल को छू लेने वाला सबूत थी।

नादा का साक्ष्य

वाटिकन न्यूज़ से बात करते हुए 19 वर्षीय नादा ने याद किया कि कैसे युद्ध ने अचानक उनकी पढ़ाई में रुकावट डाली। उन्होंने कहा, "जब युद्ध शुरू हुआ, मैं 17 साल की थी और अपने सीनियर ईयर में थी। मुझे याद है कि 07 अक्टूबर को मेरा हिस्ट्री का टेस्ट था। उसके बाद हम लगभग दो साल तक स्कूल नहीं गए।"

मूल रूप से राफा की रहने वाली नादा ने बताया कि लड़ाई के दौरान उनके परिवार को बार-बार बेघर होना पड़ा। 2023 में उनके पिता की मौत के बाद, उन्हें, उनकी माँ और उनकी दो छोटी बहनों को अकेले युद्ध की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

सालेम का साक्ष्य

खान यूनिस के रहने वाले सलेम अबुमुस्तफा ने भी गाजा में हुई तबाही के बारे में बताया। 20 साल के सालेम ने कहा कि उसने अपने परिवार को बिना बिजली के एक टेंट में रहने के लिए छोड़ दिया है और रोज़ पानी एवं दूसरी ज़रूरी चीज़ें ढूंढने के लिए संघर्ष करता रहा। उसने कहा, "हमारा चार मंज़िला घर युद्ध के दौरान तबाह हो गया था। रोम में पढ़ाई करना महीनों की मुश्किल और अनिश्चितता के बाद उसके परिवार के लिए उम्मीद जगाने का एक मौका है।" सालेम ने कहाः "मैं यहां एक बेहतर भविष्य के लिए और अपने परिवार को मुझ पर गर्व महसूस कराने के लिए आया हूँ।" शुक्रगुज़ारी और उम्मीद के साथ उसने कहाः "फिलिस्तीन ज़िंदाबाद। इटली ज़िंदाबाद।"

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

15 मई 2026, 10:30